मैहर में बंद कुएं से बैल बचाने उतरे तीन ग्रामीणों की जहरीली गैस से मौत, एक गंभीर
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मैहर जिले के खारमासेदा गांव में 4 जुलाई 2025 की रात एक दर्दनाक हादसे में तीन ग्रामीणों की जान चली गई, जब वे एक बंद पड़े कुएं में गिरे बैल को बचाने के लिए एक-एक करके उसमें उतरे और जहरीली गैस की चपेट में आ गए। एक चौथे व्यक्ति को गंभीर हालत में अस्पताल भेजा गया है। अमरपाटन पुलिस थाना क्षेत्र में घटी इस त्रासदी ने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया है।
घटनाक्रम: कैसे हुई यह त्रासदी
पुलिस के मुताबिक, यह हादसा शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे रामनिवास कुशवाहा के घर के पास हुआ। ग्रामीणों ने लंबे समय से बंद पड़े करीब 35 फुट गहरे कुएं के भीतर से बैल की आवाज सुनी। जानवर को बचाने के इरादे से पहले दो लोग रस्सी के सहारे कुएं में उतरे, लेकिन कुछ ही मिनटों में जहरीली हवा के कारण बेहोश हो गए। उन्हें बचाने की कोशिश में दो और ग्रामीण एक-एक करके कुएं में उतरे, और वे भी उसी जहरीली गैस की चपेट में आ गए।
प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि लंबे समय से अनुपयोगी पड़े उस कुएं में ऑक्सीजन की गंभीर कमी थी और वह जहरीली गैसों से भरा हुआ था, जिसके कारण उतरने के कुछ ही मिनटों के भीतर दम घुटने से मौतें हुईं।
मृतकों और घायल की पहचान
हादसे में जान गंवाने वाले तीनों की पहचान कृष्ण कुमार यादव (28 वर्ष), वीरेंद्र यादव (47 वर्ष) और राहुल यादव (34 वर्ष) के रूप में हुई है। हादसे में बचे रामचंद्र यादव (42 वर्ष) को पहले अमरपाटन सिविल अस्पताल और फिर बेहतर इलाज के लिए सतना जिला अस्पताल भेजा गया।
पुलिस के पहुंचने से पहले ही गांव के लोगों ने रस्सियों और लोहे के हुक की मदद से पीड़ितों को कुएं से बाहर निकाला। पुलिस ने बाद में शवों को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पुलिस और डॉक्टरों की प्रतिक्रिया
अमरपाटन की सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर ख्याति मिश्रा ने कहा, 'यह घटना तब हुई जब ग्रामीण कुएं में गिरे एक बैल को बचाने की कोशिश कर रहे थे। कुएं के अंदर दम घुटने से तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति को बचा लिया गया और उसका इलाज चल रहा है। मामला दर्ज कर लिया गया है और मौत की असली वजह का पता पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के बाद चलेगा।'
अमरपाटन सिविल अस्पताल के डॉक्टर हिमांशु पांडे ने बताया, 'अस्पताल में चार लोगों को लाया गया था। तीन लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि रामचंद्र को गंभीर हालत में भर्ती किया गया था। शुरुआती इलाज के बाद उनकी हालत स्थिर की गई और आगे के इलाज के लिए उन्हें जिला अस्पताल भेज दिया गया।'
आम जनता पर असर और सुरक्षा की चेतावनी
यह हादसा उस खतरे की याद दिलाता है जो बंद और पुराने कुओं से जुड़ा होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय से बंद कुओं में कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी जहरीली गैसें जमा हो जाती हैं, जो बिना किसी उपकरण के उतरने वाले व्यक्ति के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। गौरतलब है कि देश में ऐसी दुर्घटनाएं बार-बार सामने आती हैं, जिनमें बचाव की कोशिश करने वाले खुद शिकार बन जाते हैं।
आगे की जांच
पुलिस ने मामला दर्ज कर फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है। मौत के सटीक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद होगी। स्थानीय प्रशासन से अपेक्षा है कि वह क्षेत्र के अन्य बंद कुओं की सुरक्षा जांच के आदेश देगा।