झज्जर के कुएं में जहरीली गैस से चार ग्रामीणों की मौत, बछड़ा बचाने उतरे थे नीचे
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के झज्जर जिले के मुनीमपुर गांव में 20 जुलाई को एक दर्दनाक हादसे में चार ग्रामीणों की मौत हो गई, जब वे कुएं में गिरे एक बछड़े को बचाने के लिए एक-एक करके नीचे उतरे और कुएं में जमा जहरीली गैस की चपेट में आ गए। बचाव दल ने करीब तीन घंटे के अभियान के बाद चारों को बाहर निकाला, लेकिन अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा
मुनीमपुर गांव में एक बछड़ा कुएं में गिर गया। उसे बचाने के लिए गांव का पहला व्यक्ति कुएं में उतरा, लेकिन वहाँ भरी जहरीली गैस के कारण वह बेहोश हो गया। उसकी मदद के लिए तीन और ग्रामीण एक-एक करके नीचे उतरे — और वे भी गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गए।
सूचना मिलते ही झज्जर पुलिस, फायर डिपार्टमेंट और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमें मौके पर पहुँचीं और करीब तीन घंटे तक चले बचाव अभियान के बाद चारों पीड़ितों को कुएं से बाहर निकाला गया। उन्हें नज़दीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
झज्जर पुलिस कमिश्नर डॉ. राजश्री सिंह स्वयं घटनास्थल पर पहुँचीं और बचाव अभियान की निगरानी की। उन्होंने इस घटना को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हादसा' बताया और कहा कि बचाव के हरसंभव प्रयास किए गए, लेकिन चारों लोगों को बचाया नहीं जा सका।
बचाव कार्य के दौरान कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स भी मौके पर मौजूद रहे। बचाव दल में शामिल सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार की तबीयत भी बिगड़ गई — उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप: देरी से मिली मदद
घटना के बाद मुनीमपुर के ग्रामीणों ने प्रशासन पर तत्काल कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि यदि समय पर मदद मिली होती, तो इन चारों की जान बचाई जा सकती थी। ग्रामीणों ने घटना की निष्पक्ष जाँच और आपातकालीन प्रतिक्रिया में कथित देरी के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।
जाँच के दायरे में क्या
अधिकारियों के अनुसार, मौत की असल वजह जाँच का विषय है, हालाँकि शुरुआती रिपोर्टें कुएं में जमा जहरीली गैस की ओर इशारा करती हैं। पुलिस और जिला प्रशासन यह भी जाँच कर रहे हैं कि बचाव कार्य के दौरान जरूरी सुरक्षा इंतजाम किए गए थे या नहीं। गौरतलब है कि देश में कुएं और सेप्टिक टैंक में उतरने से जहरीली गैस की चपेट में आकर मौत की ऐसी घटनाएँ अक्सर सामने आती हैं, जो सुरक्षित बचाव प्रोटोकॉल की कमी को उजागर करती हैं।
आगे क्या होगा
मुनीमपुर गांव में शोक का माहौल है। प्रशासन ने मामले की जाँच का आश्वासन दिया है। विशेषज्ञ लंबे समय से यह चेतावनी देते आए हैं कि बंद कुओं, सेप्टिक टैंकों और नालों में उतरने से पहले गैस-डिटेक्शन उपकरण और प्रशिक्षित बचाव दल की तैनाती अनिवार्य होनी चाहिए।