21 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

झज्जर के कुएं में जहरीली गैस से चार ग्रामीणों की मौत, बछड़ा बचाने उतरे थे नीचे

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
झज्जर के कुएं में जहरीली गैस से चार ग्रामीणों की मौत, बछड़ा बचाने उतरे थे नीचे

सारांश

बछड़े को बचाने की कोशिश जानलेवा साबित हुई — झज्जर के मुनीमपुर गांव में चार ग्रामीण एक-एक करके कुएं में उतरे और जहरीली गैस की चपेट में आ गए। तीन घंटे के बचाव अभियान के बाद सभी को अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मुख्य बातें

हरियाणा के झज्जर जिले के मुनीमपुर गांव में 20 जुलाई को कुएं में जहरीली गैस से चार ग्रामीणों की मौत हो गई।
चारों व्यक्ति कुएं में गिरे बछड़े को बचाने के लिए एक-एक करके नीचे उतरे थे।
झज्जर पुलिस, फायर डिपार्टमेंट और जिला प्रशासन ने करीब तीन घंटे तक बचाव अभियान चलाया।
बचाव दल में शामिल सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार की तबीयत बिगड़ी, निजी अस्पताल में भर्ती, हालत स्थिर।
ग्रामीणों ने प्रशासन पर देरी से कार्रवाई का आरोप लगाया और निष्पक्ष जाँच की माँग की।
पुलिस और जिला अधिकारी बचाव के दौरान सुरक्षा इंतजामों की भी जाँच कर रहे हैं।

हरियाणा के झज्जर जिले के मुनीमपुर गांव में 20 जुलाई को एक दर्दनाक हादसे में चार ग्रामीणों की मौत हो गई, जब वे कुएं में गिरे एक बछड़े को बचाने के लिए एक-एक करके नीचे उतरे और कुएं में जमा जहरीली गैस की चपेट में आ गए। बचाव दल ने करीब तीन घंटे के अभियान के बाद चारों को बाहर निकाला, लेकिन अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा

मुनीमपुर गांव में एक बछड़ा कुएं में गिर गया। उसे बचाने के लिए गांव का पहला व्यक्ति कुएं में उतरा, लेकिन वहाँ भरी जहरीली गैस के कारण वह बेहोश हो गया। उसकी मदद के लिए तीन और ग्रामीण एक-एक करके नीचे उतरे — और वे भी गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गए।

सूचना मिलते ही झज्जर पुलिस, फायर डिपार्टमेंट और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमें मौके पर पहुँचीं और करीब तीन घंटे तक चले बचाव अभियान के बाद चारों पीड़ितों को कुएं से बाहर निकाला गया। उन्हें नज़दीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

झज्जर पुलिस कमिश्नर डॉ. राजश्री सिंह स्वयं घटनास्थल पर पहुँचीं और बचाव अभियान की निगरानी की। उन्होंने इस घटना को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हादसा' बताया और कहा कि बचाव के हरसंभव प्रयास किए गए, लेकिन चारों लोगों को बचाया नहीं जा सका।

बचाव कार्य के दौरान कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स भी मौके पर मौजूद रहे। बचाव दल में शामिल सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार की तबीयत भी बिगड़ गई — उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।

ग्रामीणों का आरोप: देरी से मिली मदद

घटना के बाद मुनीमपुर के ग्रामीणों ने प्रशासन पर तत्काल कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि यदि समय पर मदद मिली होती, तो इन चारों की जान बचाई जा सकती थी। ग्रामीणों ने घटना की निष्पक्ष जाँच और आपातकालीन प्रतिक्रिया में कथित देरी के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

जाँच के दायरे में क्या

अधिकारियों के अनुसार, मौत की असल वजह जाँच का विषय है, हालाँकि शुरुआती रिपोर्टें कुएं में जमा जहरीली गैस की ओर इशारा करती हैं। पुलिस और जिला प्रशासन यह भी जाँच कर रहे हैं कि बचाव कार्य के दौरान जरूरी सुरक्षा इंतजाम किए गए थे या नहीं। गौरतलब है कि देश में कुएं और सेप्टिक टैंक में उतरने से जहरीली गैस की चपेट में आकर मौत की ऐसी घटनाएँ अक्सर सामने आती हैं, जो सुरक्षित बचाव प्रोटोकॉल की कमी को उजागर करती हैं।

आगे क्या होगा

मुनीमपुर गांव में शोक का माहौल है। प्रशासन ने मामले की जाँच का आश्वासन दिया है। विशेषज्ञ लंबे समय से यह चेतावनी देते आए हैं कि बंद कुओं, सेप्टिक टैंकों और नालों में उतरने से पहले गैस-डिटेक्शन उपकरण और प्रशिक्षित बचाव दल की तैनाती अनिवार्य होनी चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

सेप्टिक टैंकों और नालों में जहरीली गैस की चपेट में आकर जान गँवाते हैं, और हर बार कारण एक ही होता है: बिना सुरक्षा उपकरण के बचाव का प्रयास। सवाल यह है कि जब यह खतरा इतना जाना-पहचाना है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में गैस-डिटेक्टर और प्रशिक्षित बचाव किट की उपलब्धता अभी तक अनिवार्य क्यों नहीं की गई। ग्रामीणों का देरी का आरोप जाँच का विषय है, लेकिन असली जवाबदेही उस तंत्र से भी माँगी जानी चाहिए जो इस तरह की 'श्रृंखला-मौतों' को रोकने में बार-बार विफल रहा है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झज्जर के मुनीमपुर गांव में क्या हुआ?
हरियाणा के झज्जर जिले के मुनीमपुर गांव में 20 जुलाई को एक कुएं में गिरे बछड़े को बचाने के लिए चार ग्रामीण एक-एक करके नीचे उतरे और कुएं में जमा जहरीली गैस की चपेट में आ गए। तीन घंटे के बचाव अभियान के बाद चारों को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
कुएं में जहरीली गैस से मौत कैसे होती है?
बंद या पुराने कुओं में कार्बन डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी जहरीली गैसें जमा हो जाती हैं, जो ऑक्सीजन की मात्रा घटा देती हैं। बिना सुरक्षा उपकरण के उतरने पर व्यक्ति कुछ ही सेकंड में बेहोश हो सकता है और समय पर बाहर न निकाले जाने पर मौत हो जाती है।
बचाव अभियान में कौन शामिल था?
झज्जर पुलिस, फायर डिपार्टमेंट और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमों ने करीब तीन घंटे तक बचाव अभियान चलाया। पुलिस कमिश्नर डॉ. राजश्री सिंह और कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स भी घटनास्थल पर मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने प्रशासन पर क्या आरोप लगाए?
ग्रामीणों का कथित तौर पर आरोप है कि प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई नहीं की और समय पर मदद मिलती तो चारों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने घटना की निष्पक्ष जाँच और आपातकालीन प्रतिक्रिया में हुई कथित देरी के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की माँग की है।
क्या बचाव दल का कोई सदस्य भी प्रभावित हुआ?
हाँ, बचाव कार्य में शामिल सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अधिकारियों के अनुसार उनकी हालत फिलहाल स्थिर है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले