'धमाल 4' पर दर्शकों का मिला-जुला फैसला: अजय देवगन-अरशद वारसी की कॉमेडी पसंद, पर 2007 का जादू नहीं
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में 10 जुलाई को रिलीज़ हुई कॉमेडी फिल्म 'धमाल 4' को लेकर दर्शकों की राय दो खेमों में बंटी नज़र आई — एक वर्ग ने अजय देवगन और अरशद वारसी की कॉमिक टाइमिंग की तारीफ की, जबकि दूसरे वर्ग का कहना है कि फिल्म 2007 में आई मूल 'धमाल' का जादू दोहरा नहीं पाई। इंद्र कुमार के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक पुराने खज़ाने की तलाश पर केंद्रित है।
फिल्म की कहानी और स्टारकास्ट
'धमाल 4' की कहानी में कई किरदार एक पुराने खज़ाने को पाने के लिए अलग-अलग मुश्किलों का सामना करते हैं। अजय देवगन गुड्डू, रितेश देशमुख लल्लन, अरशद वारसी आदि और जावेद जाफरी मानव के किरदार में हैं। इनके अलावा रवि किशन, संजय मिश्रा, उपेंद्र लिमये, ईशा गुप्ता और अंजलि आनंद भी अहम भूमिकाओं में नज़र आए हैं।
फिल्म का निर्देशन इंद्र कुमार ने किया है, जो इस फ्रेंचाइजी के पुराने निर्देशक भी हैं। गौरतलब है कि 2007 में आई पहली 'धमाल' ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी अलग पहचान बनाई थी और आज भी हिंदी कॉमेडी सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है।
दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया
फिल्म देखने पहुँचे एक दर्शक ने कहा, 'धमाल 4' बहुत अच्छी लगी। अरशद वारसी और अजय देवगन ने खूब हंसाया है। रितेश देशमुख और अंजलि आनंद पर फिल्माया गया 'गुलाबी साड़ी' गाना बेहद पसंद आया। उन्होंने यह भी कहा कि अजय देवगन के पीछे से कांटा निकालने वाला सीन फिल्म के सबसे मज़ेदार कॉमेडी सीन्स में से एक था, और उनके मुताबिक यह फिल्म पहली 'धमाल' से बेहतर है।
एक अन्य दर्शक ने अंजलि आनंद के अभिनय की विशेष तारीफ की। उन्होंने कहा कि अंजलि अपने किरदार में पूरी तरह फिट नज़र आईं और फिल्म का म्यूजिक भी कहीं बोर नहीं करता। एक और दर्शक ने फिल्म को 5 में से 4 स्टार देते हुए कहा कि अजय देवगन की एक्टिंग और फिल्म का म्यूजिक दोनों ने उन्हें बांधे रखा।
आलोचनात्मक प्रतिक्रिया
हालाँकि कुछ दर्शकों की राय इससे अलग रही। एक दर्शक ने कहा कि फिल्म की कहानी ज़्यादा खास नहीं लगी और यह उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। उनके अनुसार, दोस्तों के साथ कई जगहों पर कोई भी नहीं हंस रहा था। हालाँकि उन्होंने अंजलि आनंद और रितेश देशमुख के काम को सराहा।
एक और दर्शक ने कहा कि फिल्म की कॉमिक टाइमिंग, कहानी और डायरेक्शन तो अच्छे हैं, लेकिन कुछ ऐसे सीन भी हैं जिनकी ज़रूरत महसूस नहीं होती। उनका मानना था कि 'धमाल' फ्रेंचाइजी की बड़ी ऑडियंस होने के कारण दर्शकों की उम्मीदें भी ऊँची थीं, और फिल्म का फर्स्ट हाफ सेकंड हाफ से बेहतर रहा।
फ्रेंचाइजी का सफर
यह ऐसे समय में आया है जब हिंदी कॉमेडी फिल्मों की ऑडियंस लगातार बदल रही है। 2007 में पहली 'धमाल' की सफलता के बाद फ्रेंचाइजी की अगली कड़ियाँ भी दर्शकों तक पहुँचीं, लेकिन हर बार मूल फिल्म की तुलना का सामना करना पड़ा। 'धमाल 4' इस मायने में फ्रेंचाइजी की चौथी कड़ी है और 19 साल की लंबी यात्रा का हिस्सा।
आने वाले दिनों में बॉक्स ऑफिस के आँकड़े तय करेंगे कि क्या 'धमाल 4' इस फ्रेंचाइजी को नई ऊँचाई दे पाती है, या दर्शकों का मिला-जुला रिएक्शन इसकी कमाई पर असर डालता है।