'धमाल 4' रिव्यू: अजय देवगन और अरशद वारसी की खजाना-खोज कॉमेडी को 4 स्टार, परिवार संग देखने की बेस्ट पिक
सारांश
मुख्य बातें
'धमाल 4' निर्देशक इंद्र कुमार की इस मशहूर फ्रैंचाइजी की चौथी कड़ी है, जो अजय देवगन, अरशद वारसी, रितेश देशमुख और जावेद जाफरी जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ बड़े पर्दे पर धमाकेदार वापसी करती है। यह फिल्म बेफिक्र, दिल खोलकर हंसाने वाली कॉमेडी का वादा करती है — और काफी हद तक उसे निभाती भी है।
कहानी: खजाने की तलाश में मचती है धमाचौकड़ी
फिल्म की कहानी शैतान सिंह के 100 साल पुराने छिपे हुए खजाने के इर्द-गिर्द बुनी गई है। इस खजाने का राज पृथ्वी (उपेंद्र लिमये) की कमज़ोर याददाश्त में दफन है। जैसे ही यह भेद खुलता है, एक रहस्यमयी द्वीप — जिस पर विशाल 'एम' का निशान है — तक पहुँचने की होड़ शुरू हो जाती है। हर किरदार दूसरे को पछाड़ने में लगा है, जिससे गलत सुराग, उलझे हालात और भाग-दौड़ का एक मजेदार सिलसिला शुरू हो जाता है।
सिचुएशनल कॉमेडी: फिल्म की असली जान
फिल्म की रीढ़ इसकी सिचुएशनल कॉमेडी है। लालची, बदकिस्मत और अजीबोगरीब किरदारों को जंगल की मुसीबतों और अचानक समुद्री लुटेरों से सामना जैसे हास्यास्पद हालात में डाला जाता है। स्क्रिप्ट दर्शकों से तर्क की उम्मीद नहीं रखती — बल्कि बेतुकेपन का पूरा मज़ा लेने का न्यौता देती है। फिल्म का पहला हाफ खासा तेज़-रफ्तार है और पुरानी फिल्मों की मजेदार झलकियाँ फ्रैंचाइजी के पुराने प्रशंसकों को खूब गुदगुदाती हैं।
कलाकारों की परफॉर्मेंस: हर किरदार ने मारी बाज़ी
अजय देवगन पूरे स्वैग के साथ लीड रोल में हैं और संजय मिश्रा की जबरदस्त कॉमिक टाइमिंग के साथ मिलकर ज़बरदस्त हंसी के पल रचते हैं। अरशद वारसी और जावेद जाफरी की केमिस्ट्री फ्रैंचाइजी की पहचान है, और संजीदा शेख इस जोड़ी में नई ऊर्जा भरती हैं। रितेश देशमुख देसी अंदाज़ में अपनी कॉमेडी से दर्शकों को लोटपोट करते हैं, जबकि अंजलि आनंद पत्नी 'पारो' के किरदार में मज़ेदार घरेलू तड़का लगाती हैं। रवि किशन समुद्री लुटेरे लीडर 'अधूरा' के अनोखे किरदार में स्क्रीन पर छा जाते हैं और कॉमेडी की एक अलग लहर लाते हैं। उपेंद्र लिमये की ऊर्जावान परफॉर्मेंस कहानी को आगे बढ़ाती है, और ईशा गुप्ता स्क्रीन पर अपना अलग आकर्षण बिखेरती हैं।
निर्देशन, स्क्रीनप्ले और संगीत
इंद्र कुमार एक बार फिर साबित करते हैं कि एनर्जेटिक सिचुएशनल कॉमेडी बनाने में उनका कोई सानी नहीं। स्क्रीनप्ले दर्शकों को तेज़ी से आते जोक्स और जंगल-आइलैंड के मज़ेदार सर्वाइवल सीन से बाँधे रखता है। तकनीकी पक्ष में यह फिल्म बड़े पर्दे पर शानदार दिखती है। 'चटनी' और 'कहर' जैसे गाने माहौल को हल्का-फुल्का और उत्सवी बनाए रखते हैं।
फैसला: वीकेंड पर परिवार के साथ बेस्ट चॉइस
'धमाल 4' शुरू से आखिर तक भरपूर मनोरंजन का अपना वादा पूरा करती है। दादा-दादी से लेकर छोटे बच्चों तक — हर उम्र के दर्शकों के लिए यह फिल्म एक मज़ेदार सिनेमाई अनुभव है। इस वीकेंड परिवार संग खुलकर हंसने का इससे बेहतर विकल्प फिलहाल मुश्किल है।