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'है जवानी तो इश्क होना है' रिव्यू: वरुण धवन की 4.5/5 रेटिंग वाली कॉमेडी, डेविड धवन का जादू बरकरार

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'है जवानी तो इश्क होना है' रिव्यू: वरुण धवन की 4.5/5 रेटिंग वाली कॉमेडी, डेविड धवन का जादू बरकरार

सारांश

डेविड धवन की 'है जवानी तो इश्क होना है' सिर्फ एक कॉमेडी नहीं — यह पुरानी बॉलीवुड परंपरा का जश्न है। वरुण धवन, मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े की तिकड़ी के साथ यह फिल्म गलतफहमियों और हंसी के बीच दर्शकों को बाँधे रखती है। रेटिंग: 4.5/5।

मुख्य बातें

'है जवानी तो इश्क होना है' को 4.5/5 की रेटिंग मिली है।
वरुण धवन मुख्य भूमिका 'जस' में हैं; मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े प्रमुख सहभूमिकाओं में।
फिल्म का निर्देशन डेविड धवन ने किया है; संवाद फरहाद सामजी के हैं।
मनीष पॉल , जिमी शेरगिल , चंकी पांडे और मौनी रॉय सहायक भूमिकाओं में प्रभावशाली।
कुछ दृश्य लंबे लगते हैं, लेकिन क्लासिक बॉलीवुड मसाला चाहने वालों के लिए यह एक संपूर्ण मनोरंजन है।

वरुण धवन और डेविड धवन की जोड़ी एक बार फिर बड़े पर्दे पर धमाल मचाने आई है। 'है जवानी तो इश्क होना है' एक ऐसी फिल्म है जो दर्शकों को शुरू से आखिर तक हंसाती रहती है — और यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है। गलतफहमियों, पारिवारिक उठापटक, रोमांस और बेलगाम कॉमेडी से भरपूर यह फिल्म क्लासिक बॉलीवुड मसाला एंटरटेनमेंट का बेहतरीन नमूना है।

कहानी का ताना-बाना

फिल्म की कहानी 'जस' नाम के एक सीधे-सादे, बिना सोचे-समझे काम करने वाले युवक के इर्द-गिर्द बुनी गई है। उसकी ज़िंदगी तब पेचीदा हो जाती है जब उसकी अलग हो चुकी पत्नी 'बानी' और एक अनजान महिला 'प्रीत' एक साथ उसकी दुनिया में दाखिल होती हैं। जो शुरुआत में एक साधारण रिश्ते की उलझन लगती है, वह जल्द ही राज़, गलतफहमियों और हास्यपूर्ण स्थितियों की एक के बाद एक श्रृंखला में बदल जाती है।

डेविड धवन की कहानी, यूनुस सजावल के स्क्रीनप्ले और फरहाद सामजी के संवादों का मेल फिल्म को एक ऐसी रफ्तार देता है जो कहीं थमती नहीं। कहानी का तर्क भले ही कभी-कभी कमज़ोर पड़े, लेकिन फिल्म कभी यह दावा नहीं करती कि वह यथार्थवादी है — और यही उसकी ताकत है।

अभिनय और परफॉर्मेंस

वरुण धवन 'जस' के किरदार में पूरी तरह घुल-मिल गए हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग, भरपूर ऊर्जा और स्वाभाविक स्क्रीन उपस्थिति फिल्म की रीढ़ है। वे अपने पिता की कॉमेडी की लय को बखूबी समझते हैं और हर दृश्य में दर्शकों को बांधे रखते हैं।

मृणाल ठाकुर 'बानी' के रोल में भावनात्मक गहराई और अपनापन लाती हैं। चारों ओर मचे हंगामे के बीच भी उनका किरदार दर्शकों को अपना-सा लगता है। वरुण के साथ उनकी केमिस्ट्री सहज और विश्वसनीय है।

पूजा हेगड़े 'प्रीत' के रूप में स्क्रीन पर अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराती हैं। आत्मविश्वास, ग्लैमर और जोश से भरपूर उनका किरदार कहानी में एक नई ताज़गी भर देता है।

सहायक कलाकारों में मनीष पॉल सबसे अधिक ध्यान खींचते हैं — उनके कई दृश्यों पर थिएटर में ज़ोरदार ठहाके गूंजने की पूरी संभावना है। जिमी शेरगिल, चंकी पांडे, कुब्रा सैत, राकेश बेदी और मौनी रॉय भी इस मसाला उत्सव में अपना-अपना रंग जोड़ते हैं।

संवाद और हास्य

फरहाद सामजी के संवाद फिल्म के मनोरंजन स्तर को ऊँचा बनाए रखते हैं। पंचलाइनें धारदार हैं, परिस्थितिजन्य कॉमेडी प्रभावशाली है और एक के बाद एक वन-लाइनर दर्शकों की तालियाँ बटोरते हैं। फिल्म पुरानी बॉलीवुड कॉमेडी की परंपरा को थामे रहती है, लेकिन उसे आज के दर्शकों के अनुरूप भी ढालती है।

तकनीकी पहलू और संगीत

फिल्म का संगीत उसके उत्साही मिज़ाज के साथ कदमताल मिलाता है। रंग-बिरंगा प्रोडक्शन डिज़ाइन और चमकदार विज़ुअल्स फिल्म को एक उत्सवी रूप देते हैं। डेविड धवन ने अधिकतर हिस्सों में कहानी की रफ्तार तेज़ रखी है, जिससे दर्शकों को ऊबने का मौका नहीं मिलता।

कमज़ोर पहलू

कुछ कॉमेडी दृश्य थोड़े खिंचे हुए लगते हैं और कुछ स्थितियों में दर्शकों को तर्क को एक तरफ रख देना पड़ता है। लेकिन यह उस शैली की स्वाभाविक सीमा है जिसे फिल्म जानबूझकर चुनती है। जो दर्शक इस फ़ॉर्मूले से परिचित हैं, उन्हें यह कोई बड़ी कमी नहीं लगेगी।

फैसला

'है जवानी तो इश्क होना है' उन दर्शकों के लिए एक आदर्श फिल्म है जो बड़े पर्दे पर निर्मल मनोरंजन की तलाश में हैं। वरुण धवन की ऊर्जा, मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े की दमदार भूमिकाएँ और भरपूर हास्य मिलकर एक यादगार सिनेमाई अनुभव बनाते हैं। अगर आप लॉजिक की कसौटी पर नहीं कसना चाहते और सिर्फ हंसना-मुस्कुराना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो एक साहसिक दाँव है ऐसे दौर में जब दर्शक ओटीटी पर जटिल कहानियों के आदी हो चुके हैं। वरुण धवन की कॉमिक टाइमिंग निर्विवाद रूप से मज़बूत है, लेकिन असली परीक्षा बॉक्स ऑफिस पर होगी — क्या नई पीढ़ी इस शैली को उसी उत्साह से गले लगाएगी जैसे 90 के दशक में होता था।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'है जवानी तो इश्क होना है' फिल्म की रेटिंग क्या है?
फिल्म को 4.5/5 की रेटिंग दी गई है। यह एक क्लासिक बॉलीवुड कॉमेडी है जो गलतफहमियों, रोमांस और हास्य से भरपूर है।
फिल्म में मुख्य किरदार कौन हैं?
वरुण धवन मुख्य भूमिका 'जस' में हैं, मृणाल ठाकुर 'बानी' और पूजा हेगड़े 'प्रीत' के किरदार में हैं। सहायक भूमिकाओं में मनीष पॉल , जिमी शेरगिल , चंकी पांडे , कुब्रा सैत , राकेश बेदी और मौनी रॉय हैं।
फिल्म का निर्देशन किसने किया है?
फिल्म का निर्देशन डेविड धवन ने किया है। कहानी भी उन्हीं की लिखी है, जबकि स्क्रीनप्ले यूनुस सजावल और संवाद फरहाद सामजी के हैं।
क्या यह फिल्म परिवार के साथ देखने लायक है?
हाँ, यह फिल्म परिवार के साथ बड़े पर्दे पर देखने के लिए उपयुक्त मानी जा रही है। यह शुद्ध मनोरंजन पर आधारित क्लासिक बॉलीवुड मसाला फिल्म है।
फिल्म की कमज़ोरियाँ क्या हैं?
कुछ कॉमेडी दृश्य थोड़े लंबे लगते हैं और कुछ परिस्थितियों में दर्शकों को तर्क को एक तरफ रखना पड़ता है। जो दर्शक यथार्थवादी कहानियाँ पसंद करते हैं, उनके लिए यह फिल्म उतनी उपयुक्त नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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