'है जवानी तो इश्क होना है' रिव्यू: वरुण धवन की 4.5/5 कॉमेडी, डेविड धवन का क्लासिक मसाला फॉर्मूला
सारांश
मुख्य बातें
वरुण धवन अभिनीत और डेविड धवन निर्देशित फिल्म 'है जवानी तो इश्क होना है' एक ऐसी कॉमेडी है जो दर्शकों को शुरू से आखिर तक हंसाती रहती है — यह फिल्म सोचने पर नहीं, बल्कि ठहाके लगाने पर मजबूर करती है। गलतफहमियों, पारिवारिक उथल-पुथल और रोमांस के मिश्रण से बनी यह फिल्म क्लासिक बॉलीवुड एंटरटेनमेंट के उस फॉर्मूले को आगे बढ़ाती है जिसे डेविड धवन ने दशकों में परिपक्व किया है।
कहानी का ताना-बाना
फिल्म की धुरी 'जस' नाम के एक सीधे-सादे, बिना सोचे-समझे काम करने वाले किरदार के इर्द-गिर्द बुनी गई है। उसकी जिंदगी तब पेचीदा हो जाती है जब उसकी अलग हो चुकी पत्नी 'बानी' और अचानक उसकी जिंदगी में आई 'प्रीत' — दोनों एक साथ उसके सामने आ खड़ी होती हैं।
जो कहानी एक रिश्ते के नाटक के रूप में शुरू होती है, वह जल्द ही गलतफहमियों, राज़ और हास्यपूर्ण परिस्थितियों की एक के बाद एक श्रृंखला में बदल जाती है। कहानी जस को लगातार नई मुसीबतों में धकेलती रहती है, जिससे फिल्म में कहीं भी ठहराव नहीं आता। कहानी यूनुस सजावल के स्क्रीनप्ले और फरहाद सामजी के संवादों के साथ डेविड धवन ने लिखी है।
अभिनय और परफॉर्मेंस
वरुण धवन 'जस' के किरदार में पूरी तरह रमे हुए हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग, जबरदस्त ऊर्जा और स्वाभाविक स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म को सहज गति से आगे ले जाती है। वे डेविड धवन की कॉमेडी की लय को भली-भाँति समझते हैं और एक ऐसी परफॉर्मेंस देते हैं जो आकर्षक और लगातार मनोरंजन करने वाली है।
मृणाल ठाकुर 'बानी' के किरदार में अपनापन और भावनात्मक गहराई लाती हैं। चारों ओर मची उथल-पुथल के बीच भी उनका किरदार दर्शकों को अपना-सा लगता है, और वरुण के साथ उनकी केमिस्ट्री बेहद सहज है। पूजा हेगड़े 'प्रीत' के रूप में स्क्रीन पर छा जाती हैं — आत्मविश्वास, ग्लैमर और जोश से भरपूर उनकी मौजूदगी हर दृश्य में ताजगी भर देती है।
सहायक कलाकारों में मनीष पॉल सबसे ज्यादा ध्यान खींचते हैं और कई ऐसे पल बनाते हैं जिन पर जोरदार हंसी आती है। जिमी शेरगिल, चंकी पांडे, कुब्रा सैत, राकेश बेदी और मौनी रॉय भी इस मजेदार और पागलपन भरे माहौल में अपना-अपना खास रंग जोड़ते हैं।
संवाद और हास्य
फरहाद सामजी के संवाद फिल्म के मनोरंजन स्तर को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। पंचलाइनें असरदार हैं, परिस्थितिजन्य हास्य काम करता है और कई वन-लाइनर्स थिएटर में दर्शकों से तालियाँ बटोर सकते हैं। फिल्म पुराने जमाने की बॉलीवुड कॉमेडी को अपनाती है और साथ ही आज के दर्शकों के हिसाब से उसे अपडेट भी करती है।
संगीत और तकनीकी पक्ष
फिल्म का संगीत इसके जोशीले अंदाज के साथ अच्छी तरह मेल खाता है। रंग-बिरंगा प्रोडक्शन डिज़ाइन और शानदार विज़ुअल्स फिल्म के उत्सवी रूप को और निखारते हैं। डेविड धवन ने अधिकांश हिस्सों में फिल्म की रफ्तार तेज रखी है, जिससे कहानी की गति कहीं भी कम नहीं पड़ती।
कमियाँ और निष्कर्ष
कॉमेडी के कुछ हिस्से थोड़े लंबे खिंचते हैं और कुछ परिस्थितियों में दर्शकों को तार्किक सोच को किनारे रखना पड़ता है। लेकिन ये छोटी-मोटी कमियाँ हैं, क्योंकि यह फिल्म यथार्थवाद के बजाय भरपूर मनोरंजन को प्राथमिकता देती है।
कुल मिलाकर, 'है जवानी तो इश्क होना है' (रेटिंग: 4.5/5) डेविड धवन की एक बेहतरीन मनोरंजक फिल्म है — जो कन्फ्यूजन, कॉमेडी और अफरातफरी को पूरे उत्साह के साथ अपनाती है। जो दर्शक लॉजिक की तलाश में नहीं, बल्कि हंसी-मजाक और क्लासिक बॉलीवुड मसाले की चाहत रखते हैं, उनके लिए यह फिल्म बड़े पर्दे पर एक पूरा मजेदार अनुभव है।