10 जुलाई 2026
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वर्ल्ड बैंक ने भारत के रूफटॉप सोलर कार्यक्रम को दी $89 करोड़ की मंजूरी, 17 लाख रोजगार का अनुमान

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वर्ल्ड बैंक ने भारत के रूफटॉप सोलर कार्यक्रम को दी $89 करोड़ की मंजूरी, 17 लाख रोजगार का अनुमान

सारांश

विश्व बैंक ने भारत के रूफटॉप सोलर कार्यक्रम के लिए $89 करोड़ से अधिक का सरकारी वित्त और $4.2 अरब का निजी वित्त जुटाने की मंजूरी दी है। 500 मेगावाट से 27 गीगावाट तक की यात्रा के बाद, अब असली दांव 1 करोड़ घरों और 17 लाख नौकरियों पर है।

मुख्य बातें

विश्व बैंक ने 10 जुलाई 2026 को भारत के राष्ट्रीय रूफटॉप सोलर कार्यक्रम के लिए बहु-स्तरीय वित्तीय पैकेज को मंजूरी दी।
पैकेज में IBRD का 82 करोड़ डॉलर का ऋण, क्लीन टेक्नोलॉजी फंड का 6 करोड़ डॉलर का रियायती ऋण और 1 करोड़ डॉलर का अनुदान शामिल है।
विश्व बैंक अतिरिक्त 4.2 अरब डॉलर की निजी वित्तीय सहायता भी जुटाएगा।
कार्यक्रम का लक्ष्य 1 करोड़ परिवारों को सोलर रूफटॉप से जोड़ना और 17 लाख रोजगार सृजित करना है।
विश्व बैंक की मदद से भारत की रूफटॉप सोलर क्षमता 500 मेगावाट से बढ़कर 27 गीगावाट से अधिक हो चुकी है।
भारत का लक्ष्य 2035 तक 60% गैर-जीवाश्म ईंधन बिजली और 2070 तक 'नेट जीरो' उत्सर्जन है।

विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने 10 जुलाई 2026 को भारत के राष्ट्रीय रूफटॉप सोलर कार्यक्रम के लिए बहु-स्तरीय वित्तीय पैकेज को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य देश के लाखों घरों तक स्वच्छ ऊर्जा पहुँचाना और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में करीब 17 लाख रोजगार के अवसर सृजित करना है। यह स्वीकृति ऐसे समय में आई है जब भारत 2070 तक 'नेट जीरो' उत्सर्जन और 2035 तक 60 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की ओर बढ़ रहा है।

वित्तीय पैकेज का विवरण

मंजूर किए गए वित्तीय ढाँचे में इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट (IBRD) की ओर से 82 करोड़ डॉलर का ऋण, क्लीन टेक्नोलॉजी फंड से 6 करोड़ डॉलर का रियायती ऋण और IBRD के लिवेबल प्लैनेट फंड से 1 करोड़ डॉलर का अनुदान शामिल है। इसके अतिरिक्त, विश्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों के माध्यम से 4.2 अरब डॉलर की निजी वित्तीय सहायता भी जुटाएगा, जिससे परिवारों के लिए सोलर रूफटॉप स्थापना को आर्थिक रूप से सुलभ बनाया जा सके।

पीएम सूर्य घर योजना से जुड़ाव

घरेलू रूफटॉप सोलर को अपनाने की रफ्तार अब तक अपेक्षाकृत धीमी रही है, जबकि बड़े पैमाने की सौर परियोजनाओं में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इसी अंतर को पाटने के लिए केंद्र सरकार ने 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' शुरू की है, जिसका लक्ष्य 1 करोड़ ग्रामीण और शहरी परिवारों को उनके घरों की छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए प्रोत्साहित करना, बिजली का खर्च घटाना और सोलर उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बल देना है। विश्व बैंक की यह वित्तीय सहायता इसी राष्ट्रीय पहल को गति देने में सहायक होगी।

एक दशक की साझेदारी का विस्तार

विश्व बैंक के भारत के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी ने कहा, 'वर्ल्ड बैंक पिछले एक दशक से भारत के रूफटॉप सोलर क्षेत्र का समर्थन कर रहा है। इस दौरान 2 अरब डॉलर से अधिक की वित्तीय सहायता जुटाई गई, जिससे देश की स्थापित रूफटॉप सोलर क्षमता 500 मेगावाट से बढ़कर 27 गीगावाट से अधिक हो गई है।' उन्होंने आगे कहा कि नई वित्तीय सहायता से घरेलू रूफटॉप सोलर को बड़े स्तर पर बढ़ावा मिलेगा और पूरी सप्लाई चेन तथा इंस्टॉलेशन इकोसिस्टम में लाखों रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।

वित्तीय बाधाएँ दूर करने की रणनीति

कार्यक्रम के टास्क टीम लीडर मोएज शरीफ ने बताया कि यह कार्यक्रम वित्तीय बाधाओं को दूर करके घरेलू रूफटॉप सोलर बाज़ार में बड़ा बदलाव लाएगा। साथ ही बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम), बैंकों और विक्रेताओं की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी, ताकि वे लोगों को एकीकृत और बेहतर सेवाएँ दे सकें। उन्होंने यह भी कहा कि बिना किसी गिरवी के उपलब्ध कराए जाने वाले ऋण से अधिकाधिक परिवार सोलर सिस्टम लगाकर अपने मासिक बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी ला सकेंगे।

आगे की राह

गौरतलब है कि भारत की रूफटॉप सोलर क्षमता में एक दशक में 500 मेगावाट से 27 गीगावाट तक की छलांग पहले से ही वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय मानी जाती है। इस नई वित्तीय सहायता से विनिर्माण, इंस्टॉलेशन और रखरखाव के क्षेत्र में 17 लाख रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि निजी वित्त की बड़ी भागीदारी और बिना गिरवी वाले ऋण का संयोजन इस बार घरेलू सोलर अपनाने की रफ्तार को वास्तव में बदल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की है — पीएम सूर्य घर जैसी योजनाएँ पहले भी घोषित हुई हैं, मगर घरेलू रूफटॉप अपनाने की दर बड़े सोलर पार्कों की तुलना में लगातार पिछड़ती रही है। बिना गिरवी वाले ऋण और डिस्कॉम क्षमता निर्माण का संयोजन सही दिशा में है, पर डिस्कॉम की वित्तीय सेहत और नेट मीटरिंग नीतियों की राज्य-दर-राज्य असमानता अब भी बड़ी बाधा है। 17 लाख रोजगार का अनुमान विनिर्माण, इंस्टॉलेशन और सेवा — तीनों को जोड़कर बनाया गया है; इनमें से कितने स्थायी और औपचारिक होंगे, यह स्पष्ट नहीं है। जब तक राज्य सरकारें नेट मीटरिंग और ग्रिड कनेक्टिविटी में एकरूपता नहीं लाती, तब तक यह विशाल वित्तीय ढाँचा भी अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाएगा।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व बैंक ने भारत के रूफटॉप सोलर कार्यक्रम के लिए कितनी वित्तीय सहायता मंजूर की है?
विश्व बैंक ने कुल मिलाकर IBRD से 82 करोड़ डॉलर का ऋण, क्लीन टेक्नोलॉजी फंड से 6 करोड़ डॉलर का रियायती ऋण और 1 करोड़ डॉलर का अनुदान मंजूर किया है। इसके अलावा वाणिज्यिक बैंकों के जरिए 4.2 अरब डॉलर की निजी वित्तीय सहायता भी जुटाई जाएगी।
पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना क्या है और इसका विश्व बैंक से क्या संबंध है?
'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' केंद्र सरकार की वह पहल है जिसका लक्ष्य 1 करोड़ ग्रामीण और शहरी परिवारों को उनके घरों की छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए प्रोत्साहित करना है। विश्व बैंक की नई वित्तीय सहायता इसी योजना को गति देने और परिवारों के लिए ऋण सुलभ बनाने के लिए मंजूर की गई है।
इस कार्यक्रम से कितने रोजगार पैदा होने का अनुमान है?
इस कार्यक्रम से नवीकरणीय ऊर्जा के विनिर्माण, इंस्टॉलेशन और सेवा क्षेत्र में करीब 17 लाख (1.7 मिलियन) रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है। यह अनुमान पूरी सप्लाई चेन और इंस्टॉलेशन इकोसिस्टम को मिलाकर लगाया गया है।
भारत की रूफटॉप सोलर क्षमता अब तक कहाँ पहुँची है?
विश्व बैंक के अनुसार, पिछले एक दशक में 2 अरब डॉलर से अधिक की सहायता के बाद भारत की स्थापित रूफटॉप सोलर क्षमता 500 मेगावाट से बढ़कर 27 गीगावाट से अधिक हो गई है। हालाँकि, घरेलू रूफटॉप सोलर को अपनाने की रफ्तार बड़े सोलर पार्कों की तुलना में अब भी अपेक्षाकृत धीमी रही है।
भारत के नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े प्रमुख लक्ष्य क्या हैं?
भारत ने 2070 तक 'नेट जीरो' उत्सर्जन हासिल करने और 2035 तक बिजली उत्पादन में गैर-जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। विश्व बैंक का यह वित्तीय पैकेज इन्हीं दीर्घकालिक लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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