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सुप्रिया सुले ने महायुति में शामिल होने की अटकलें नकारीं, तावड़े-पाटिल मुलाकात को बताया सामान्य

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सुप्रिया सुले ने महायुति में शामिल होने की अटकलें नकारीं, तावड़े-पाटिल मुलाकात को बताया सामान्य

सारांश

सुप्रिया सुले ने महायुति में शामिल होने की अटकलें सिरे से नकार दीं और तावड़े-पाटिल मुलाकात को संसदीय समिति का रोज़मर्रा का काम बताया। साथ ही उन्होंने RAM मंदिर भ्रष्टाचार, किसान ऋण माफी और मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे भूस्खलन पर BJP व महायुति सरकार को घेरा।

मुख्य बातें

सुप्रिया सुले ने 7 जुलाई को एनसीपी (एसपी) के महायुति में शामिल होने की अफवाहों को पूरी तरह खारिज किया।
विनोद तावड़े और जयंत पाटिल की कथित मुलाकात को उन्होंने संसदीय समिति का सामान्य कार्य बताया; पिछले एक महीने में 21 बार ऐसी बैठकें हो चुकी हैं।
सुले ने अयोध्या राम मंदिर से धन व चांदी ले जाने के वायरल वीडियो का हवाला देते हुए BJP पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
उन्होंने फसल ऋण माफी को 'पूरी तरह छलावा' बताया और मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के 'मिसिंग लिंक' पर हुए भूस्खलन को बुनियादी ढाँचे की विफलता करार दिया।
उन्होंने संकेत दिया कि अगर महायुति सरकार इसी तरह चलती रही तो विपक्ष सत्ता के लिए कड़ा संघर्ष करेगा।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने मंगलवार, 7 जुलाई को स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी के सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में शामिल होने की अफवाहों में कोई सच्चाई नहीं है। मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने इन अटकलों को सिरे से खारिज किया और संबंधित मुलाकात को एक सामान्य संसदीय कार्य बताया।

तावड़े-पाटिल मुलाकात पर सुले का जवाब

पत्रकारों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े और एनसीपी (एसपी) नेता जयंत पाटिल के बीच कथित मुलाकात को लेकर सवाल उठाए, जिसे महायुति में संभावित प्रवेश का संकेत माना जा रहा था। सुले ने मजाकिया अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि उन्हें यह भी नहीं पता कि ऐसी कोई मुलाकात हुई या नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे और जयंत पाटिल एक ही संसदीय समिति में काम करते हैं, इसलिए उनकी नियमित बैठकें होना स्वाभाविक है।

सुले ने बताया कि पिछले एक महीने में ही उनकी और उनके सहयोगियों की 21 बार बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें BJP के कई नेता भी शामिल रहे हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक सौदेबाजी नहीं, बल्कि एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया करार दिया।

सत्ता में वापसी पर सुले का संकेत

जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या उनकी पार्टी जल्द सत्ता में नजर आएगी, तो सुले ने कहा कि उनकी प्राथमिक भूमिका आम जनता की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि लोग पिछले 12 वर्षों से उनके बारे में अटकलें लगाते आ रहे हैं। साथ ही उन्होंने आगाह किया कि अगर मौजूदा सरकार इसी तरह चलती रही, तो एनसीपी (एसपी) और उसके सहयोगियों के पास सत्ता के लिए कड़ा संघर्ष करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

अयोध्या राम मंदिर पर BJP पर हमला

सुले ने अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे पर BJP पर तीखा हमला बोला। उन्होंने हाल ही में वायरल हुए उन वीडियो का हवाला दिया जिनमें कथित तौर पर मंदिर से धन और चांदी ले जाते दिखाया गया है, और दावा किया कि ये वीडियो BJP के अपने चैनलों पर प्रसारित हुए। सुले ने कहा कि पूरे देश की जनता ने अथक परिश्रम से इस मंदिर का निर्माण करवाया है, और ऐसे में वहाँ भ्रष्टाचार के आरोप गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने BJP से जवाब माँगते हुए कहा कि यह मर्यादा पुरुषोत्तम राम का मंदिर है और उसकी पवित्रता से समझौता स्वीकार्य नहीं।

किसान ऋण माफी और बुनियादी ढाँचे पर आलोचना

सुले ने महायुति सरकार पर किसानों के साथ धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि फसल ऋण माफी पूरी तरह से छलावा है और सरकार मेहनती किसानों की कमर तोड़ रही है। उन्होंने मानसून के बाद उभरे कृषि संकट का भी उल्लेख किया।

इसके अलावा उन्होंने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के 'मिसिंग लिंक' खंड पर हुए भूस्खलन का जिक्र करते हुए बुनियादी ढाँचे के कुप्रबंधन पर सरकार को घेरा। आलोचकों का कहना है कि यह घटना राज्य में बड़े पैमाने पर निर्माण परियोजनाओं की निगरानी में चूक को उजागर करती है।

सुले की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब महाराष्ट्र में राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं और विपक्षी दलों पर सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर झुकने का दबाव बताया जा रहा है। एनसीपी (एसपी) की आगामी रणनीति पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उतना ही रणनीतिक भी — 'हम नहीं जाएँगे' कहते हुए उन्होंने 'जनता को जवाब देना होगा' की भाषा में दबाव बनाए रखा। महाराष्ट्र की राजनीति में जिस तरह 2023 में NCP टूटी और अजित पवार गुट ने महायुति का दामन थामा, उसके बाद हर मुलाकात को गठबंधन की अटकल में बदलना विपक्ष की स्वाभाविक कमज़ोरी बन गई है। राम मंदिर भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाकर सुले ने BJP को उसकी सबसे संवेदनशील जगह पर चोट की है — लेकिन वायरल वीडियो के दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। किसान ऋण माफी और एक्सप्रेसवे भूस्खलन जैसे ज़मीनी मुद्दों को जोड़कर उन्होंने यह भी जता दिया कि एनसीपी (एसपी) शासन-विफलता को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रिया सुले ने महायुति गठबंधन की अफवाहों को क्यों खारिज किया?
सुले ने स्पष्ट कहा कि एनसीपी (एसपी) के महायुति में शामिल होने की अफवाहों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने विनोद तावड़े और जयंत पाटिल की कथित मुलाकात को संसदीय समिति के सामान्य कार्य के रूप में परिभाषित किया, न कि किसी राजनीतिक सौदेबाजी के रूप में।
विनोद तावड़े और जयंत पाटिल की मुलाकात का क्या संदर्भ है?
BJP के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े और एनसीपी (एसपी) नेता जयंत पाटिल के बीच कथित बातचीत को लेकर महायुति में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थीं। सुले ने बताया कि दोनों एक ही संसदीय समिति में हैं और पिछले एक महीने में 21 बार ऐसी बैठकें हो चुकी हैं जिनमें BJP के कई नेता शामिल रहे।
सुले ने अयोध्या राम मंदिर पर BJP पर क्या आरोप लगाए?
सुले ने हाल ही में वायरल हुए उन वीडियो का हवाला दिया जिनमें कथित तौर पर राम मंदिर से धन और चांदी ले जाते दिखाया गया है। उन्होंने दावा किया कि ये वीडियो BJP के अपने चैनलों पर प्रसारित हुए और इसे भ्रष्टाचार बताते हुए BJP से जवाब माँगा।
सुले ने महाराष्ट्र के किसानों और बुनियादी ढाँचे पर क्या कहा?
सुले ने फसल ऋण माफी को 'पूरी तरह छलावा' बताया और कहा कि सरकार मेहनती किसानों की कमर तोड़ रही है। उन्होंने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के 'मिसिंग लिंक' खंड पर हुए भूस्खलन का उल्लेख करते हुए महायुति सरकार पर बुनियादी ढाँचे के कुप्रबंधन का आरोप भी लगाया।
एनसीपी (एसपी) की आगामी राजनीतिक रणनीति क्या है?
सुले ने संकेत दिया कि अगर महायुति सरकार इसी तरह काम करती रही, तो एनसीपी (एसपी) और उसके सहयोगियों के पास सत्ता के लिए कड़ा संघर्ष करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिक भूमिका जनता की सेवा करना है और पार्टी विपक्ष में रहते हुए सरकार को जवाबदेह बनाती रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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