संजय राउत का आरोप: राम मंदिर ट्रस्ट में ₹2,000 करोड़ का घोटाला, मिसिंग लिंक पर फडणवीस सरकार को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने 7 जुलाई को मुंबई में दोहरे मोर्चे पर सत्तापक्ष को घेरा — उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट में कथित तौर पर ₹2,000 करोड़ के वित्तीय घोटाले की कानूनी जाँच की माँग की और महाराष्ट्र की मिसिंग लिंक परियोजना में ₹6,700 करोड़ की बर्बादी के लिए राज्य सरकार को जवाबदेह ठहराया। राउत ने स्पष्ट किया कि केवल इस्तीफों से मामला नहीं निपटेगा — पूरे ट्रस्ट के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।
राम मंदिर ट्रस्ट पर आरोप
राउत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े लोगों और BJP द्वारा गठित राम मंदिर ट्रस्ट पर पहले ₹550 करोड़ के नगद घोटाले के आरोप लगे, जो कथित तौर पर पिछले एक वर्ष से चर्चा में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में भगवान राम और माता सीता के आभूषणों की चोरी के मामले भी सामने आए।
राउत ने तर्क दिया कि यदि ₹50 की चोरी में आरोपी गिरफ्तार होता है और ₹10 लाख के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) सक्रिय होता है, तो इतने बड़े कथित घोटाले में जाँच क्यों नहीं? उन्होंने इसे 'जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात' बताया और माँग की कि ट्रस्ट को कानूनी दायरे में लाकर जवाबदेह बनाया जाए।
मिसिंग लिंक परियोजना पर निशाना
राउत ने महाराष्ट्र की मिसिंग लिंक परियोजना के छह महीने में क्षतिग्रस्त होने को 'देश के सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक' करार दिया। उनके अनुसार इस परियोजना के क्षतिग्रस्त होने से ₹6,700 करोड़ बर्बाद हुए।
उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस — जो स्वयं को 'इन्फ्रा मैन' कहते हैं — और उपमुख्यमंत्री से सीधे जवाब माँगा। राउत ने कहा कि देश में 100 वर्ष पुराने पुल और बाँध आज भी सुरक्षित खड़े हैं, इसलिए विफलता का ठीकरा केवल बारिश पर फोड़ना तर्कसंगत नहीं है।
ठेका और कमीशन के आरोप
राउत ने आरोप लगाया कि जिस कंपनी को मिसिंग लिंक परियोजना का ठेका दिया गया, उसे कथित तौर पर कमीशन, किकबैक और राजनीतिक फंडिंग का लाभ मिला। उन्होंने सरकार से माँग की कि विधानसभा में स्पष्ट करे कि यह परियोजना आखिर क्यों विफल हुई। व्यंग्यात्मक लहजे में उन्होंने कहा, 'इस परियोजना में सीमेंट और मिट्टी कम, भ्रष्टाचार ज्यादा भरा हुआ है।'
आगे क्या
राउत की माँग है कि राम मंदिर ट्रस्ट के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो और मिसिंग लिंक परियोजना की स्वतंत्र जाँच कराई जाए। इन आरोपों पर अभी तक BJP या महाराष्ट्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह मामला आने वाले विधानसभा सत्र में राजनीतिक तूफान खड़ा कर सकता है।