राम मंदिर ट्रस्ट भंग करो: संजय राउत का ऐलान, दादर में रविवार को आंदोलन
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने शनिवार, 4 जुलाई को मुंबई में घोषणा की कि रविवार को दादर स्थित हनुमान मंदिर में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित दुरुपयोग के विरुद्ध एक बड़े आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। राउत ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल भंग करने और पूरे ट्रस्ट के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की माँग की।
आंदोलन का एलान और माँगें
राउत ने कहा, 'आरोप हैं कि भगवान राम और माता सीता के गहने तथा मंदिर में चढ़ाया गया दान गायब हुआ है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है?' उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्धव ठाकरे स्वयं इस आंदोलन में उपस्थित रहेंगे और पार्टी भगवान राम में आस्था रखने वाले सभी नागरिकों से इसमें शामिल होने की अपील करती है।
राउत ने आगे कहा, 'चोरी के मामले में पूरे मंदिर ट्रस्ट के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और सभी को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।' यह माँग उस समय आई है जब राम मंदिर के दान में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
भाजपा और संघ पर निशाना
भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की आलोचना करते हुए राउत ने आरोप लगाया कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान जब शिवसैनिक सड़कों पर थे और बाबरी मस्जिद ध्वंस के बाद मुंबई में भड़के दंगों में हिंदुओं की रक्षा करते हुए अपनी जानें दे रहे थे, तब 'भाजपा और संघ के नेता घरों में बैठे थे।'
राउत ने यह भी आरोप लगाया कि महाकाल मंदिर, केदारनाथ और अन्य धार्मिक स्थलों पर भाजपा से जुड़े लोगों का दखल है। उन्होंने कहा, 'उन्होंने मंदिरों पर कब्जा कर लिया है और भगवान के नाम पर लूट हो रही है।' इन आरोपों पर भाजपा की तत्काल प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी।
RSS का संयम का आह्वान और राउत का जवाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने शुक्रवार को हिंदू समाज से संयम बरतने की अपील की थी। संघ ने कहा था कि राम मंदिर चढ़ावे के मुद्दे का इस्तेमाल कर 'राष्ट्र-विरोधी ताकतें' धर्म और समाज को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं।
संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले के 'संयम और धैर्य' वाले बयान पर पलटवार करते हुए राउत ने कहा, 'अगर हमने धैर्य ही रखा होता, तो क्या राम मंदिर बन पाता? ऐसे बयान उन्हें शोभा नहीं देते।' यह विवाद ऐसे समय में गहराया है जब अयोध्या में जनवरी 2024 में हुई प्राण-प्रतिष्ठा के बाद मंदिर ट्रस्ट की पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं।
आम श्रद्धालुओं पर असर
गौरतलब है कि राम मंदिर के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालुओं ने दशकों तक दान दिया और आंदोलन में योगदान दिया। कथित अनियमितताओं की खबरों ने उन करोड़ों राम भक्तों की भावनाओं को आहत किया है, जिन्होंने इस मंदिर निर्माण को एक ऐतिहासिक धार्मिक उपलब्धि माना था। शिवसेना (UBT) का यह आंदोलन उसी भावना को राजनीतिक स्वर देने का प्रयास है।
आगे क्या होगा
रविवार को दादर के हनुमान मंदिर में होने वाले आंदोलन में बड़ी संख्या में राम भक्तों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह देखना होगा कि क्या अन्य विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर शिवसेना (UBT) के साथ खड़े होते हैं और क्या सरकार या ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक जवाब आता है।