19 अगस्त 2026
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तुलसीदास जयंती 2026: ओम बिरला, योगी, रेखा गुप्ता समेत कई नेताओं ने 'श्रीरामचरितमानस' के रचयिता को किया नमन

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तुलसीदास जयंती 2026: ओम बिरला, योगी, रेखा गुप्ता समेत कई नेताओं ने 'श्रीरामचरितमानस' के रचयिता को किया नमन

सारांश

तुलसीदास जयंती पर देश के शीर्ष नेताओं ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी — लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से लेकर योगी आदित्यनाथ, रेखा गुप्ता और भजनलाल शर्मा तक। 'श्रीरामचरितमानस' की सांस्कृतिक विरासत आज भी राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में है।

मुख्य बातें

19 अगस्त 2026 को गोस्वामी तुलसीदास की जयंती पर देशभर में श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक्स पर तुलसीदास की 'श्रीरामचरितमानस', 'विनय पत्रिका', 'कवितावली' सहित कई कृतियों का उल्लेख किया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ , दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता , मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी तुलसीदास को नमन किया।
तुलसीदास को 'श्रीरामचरितमानस' और 'हनुमान चालीसा' सहित अनेक कालजयी कृतियों का रचयिता माना जाता है।

गोस्वामी तुलसीदास की जयंती पर 19 अगस्त 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों ने 'श्रीरामचरितमानस' के इस महाकवि को श्रद्धापूर्वक नमन किया। नेताओं ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी श्रद्धांजलि साझा करते हुए तुलसीदास की साहित्यिक विरासत और भक्ति परंपरा को याद किया।

ओम बिरला का संदेश

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक्स पर लिखा, 'लोकभाषा में भक्ति को स्वर देने वाले, भगवान श्रीराम के आदर्शों को जन-जन के जीवन से जोड़ने वाले महाकवि गोस्वामी तुलसीदास की जयंती पर शत-शत नमन।' उन्होंने कहा कि 'श्रीरामचरितमानस' में मर्यादा, करुणा, त्याग, सत्य, कर्तव्य और धर्म का ऐसा समन्वय है जो हर युग में मनुष्य को जीवन की सही दिशा दिखाता है।

बिरला ने यह भी रेखांकित किया कि गोस्वामी तुलसीदास ने संस्कृत की गूढ़ आध्यात्मिक चेतना को लोकभाषा की सरलता में ढालकर भक्ति को जन-जन तक पहुँचाया। उन्होंने 'विनय पत्रिका', 'कवितावली', 'दोहावली', 'गीतावली' और 'वैराग्य संदीपनी' जैसी रचनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि 'उनकी वाणी की रामभक्ति और साहित्य का प्रकाश आने वाली पीढ़ियों को भी सदैव सत्य, मर्यादा और धर्म के पथ पर प्रेरित करता रहेगा।'

मुख्यमंत्रियों की श्रद्धांजलि

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर लिखा, 'अमर महाकाव्य 'श्रीरामचरितमानस' के रचयिता, भक्तिधारा के महान कवि, 'पूज्यपाद' गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज की जयंती पर कोटि-कोटि नमन।' उन्होंने कहा कि तुलसीदास की दिव्य कृतियों ने प्रभु श्रीराम के आदर्शों और सनातन संस्कृति के अमृत संदेश को जन-जन तक पहुँचाया।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर तुलसीदास को 'श्रीरामचरितमानस' और 'हनुमान चालीसा' के रचयिता के रूप में नमन किया। उन्होंने लिखा कि 'तुलसीदास की वाणी ने भक्ति को लोकमंगल से, आस्था को आचरण से और धर्म को कर्तव्य व मर्यादा से जोड़ा।' रेखा गुप्ता के अनुसार तुलसीदास का साहित्य 'सनातन सभ्यता की आत्मचेतना और हमारी राष्ट्रीय अस्मिता की अक्षय निधि है।'

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लिखा कि 'मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के चरित्र के माध्यम से गोस्वामी जी ने जो मंगलकारी दीप प्रज्वलित किया है, वह अनंतकाल तक जनमानस को आलोकित करता रहेगा।' राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी 'श्रीरामचरितमानस' को 'भारतीय संस्कृति, आस्था और जीवन मूल्यों की अनुपम धरोहर' बताते हुए तुलसीदास को नमन किया।

केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेताओं का नमन

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर लिखा, 'गोस्वामी तुलसीदास जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं। महान कवि तुलसीदास जी को कोटि-कोटि नमन।' बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी तुलसीदास की 'अमर रचनाओं' को 'सदैव प्रेरणा देने वाला' बताया।

तुलसीदास की साहित्यिक विरासत

गोस्वामी तुलसीदास को हिंदी साहित्य के भक्तिकाल का सर्वोच्च स्तंभ माना जाता है। 'श्रीरामचरितमानस' के अतिरिक्त 'विनय पत्रिका', 'कवितावली', 'दोहावली', 'गीतावली', 'हनुमान चालीसा' और 'वैराग्य संदीपनी' उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। गौरतलब है कि उन्होंने अवधी और ब्रजभाषा में रचनाएँ कर संस्कृत-केंद्रित आध्यात्मिक साहित्य को सामान्य जनता तक सुलभ बनाया — यह उनका सबसे बड़ा सांस्कृतिक योगदान माना जाता है।

यह जयंती ऐसे समय में मनाई जा रही है जब भारत में रामायण परंपरा और सनातन संस्कृति को लेकर राष्ट्रीय विमर्श तेज़ हो रहा है। राजनीतिक नेताओं की सक्रिय भागीदारी इस सांस्कृतिक उत्सव को एक व्यापक सार्वजनिक आयाम देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार की भागीदारी की व्यापकता — लोकसभा अध्यक्ष से लेकर पाँच राज्यों के मुख्यमंत्रियों तक — यह दर्शाती है कि सांस्कृतिक-आध्यात्मिक प्रतीकों को राजनीतिक विमर्श में केंद्रीय स्थान मिल रहा है। यह प्रवृत्ति केवल श्रद्धा नहीं, बल्कि एक सुविचारित सांस्कृतिक राजनीति का हिस्सा भी है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह चूक जाती है कि तुलसीदास की सबसे बड़ी उपलब्धि — संस्कृत को लोकभाषा में लाना — आज की नीतिगत बहसों में भाषाई समावेश और सांस्कृतिक लोकतंत्र के प्रश्नों से गहराई से जुड़ती है।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोस्वामी तुलसीदास की जयंती कब मनाई जाती है?
गोस्वामी तुलसीदास की जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास की शुक्ल सप्तमी को मनाई जाती है, जो इस वर्ष 19 अगस्त 2026 को पड़ी। वे 'श्रीरामचरितमानस' सहित अनेक भक्ति ग्रंथों के रचयिता हैं।
तुलसीदास जयंती 2026 पर किन नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी।
तुलसीदास की प्रमुख रचनाएँ कौन-सी हैं?
'श्रीरामचरितमानस' तुलसीदास की सर्वाधिक प्रसिद्ध रचना है। इसके अलावा 'हनुमान चालीसा', 'विनय पत्रिका', 'कवितावली', 'दोहावली', 'गीतावली' और 'वैराग्य संदीपनी' उनकी अन्य प्रमुख कृतियाँ हैं।
तुलसीदास का भारतीय साहित्य में क्या योगदान है?
तुलसीदास ने संस्कृत की आध्यात्मिक चेतना को अवधी और ब्रजभाषा जैसी लोकभाषाओं में ढालकर भक्ति साहित्य को सामान्य जनता तक सुलभ बनाया। उन्हें हिंदी साहित्य के भक्तिकाल का सर्वोच्च कवि माना जाता है।
ओम बिरला ने तुलसीदास जयंती पर क्या कहा?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक्स पर लिखा कि तुलसीदास ने संस्कृत की गूढ़ आध्यात्मिक चेतना को लोकभाषा की सरलता में ढालकर भक्ति को जन-जन तक पहुँचाया। उन्होंने कहा कि 'उनकी वाणी की रामभक्ति और साहित्य का प्रकाश आने वाली पीढ़ियों को भी सदैव सत्य, मर्यादा और धर्म के पथ पर प्रेरित करता रहेगा।'
राष्ट्र प्रेस
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