गुरु अमरदास ज्योति-ज्योत दिवस: ओम बिड़ला, अमित शाह, योगी समेत कई नेताओं ने अर्पित किए श्रद्धासुमन
सारांश
मुख्य बातें
सिखों के तृतीय गुरु श्री गुरु अमरदास जी के ज्योति-ज्योत दिवस पर 26 सितंबर 2026 को देशभर के राजनेताओं ने कोटि-कोटि नमन अर्पित किए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने गुरु साहिब के जीवन और उनकी शिक्षाओं को स्मरण करते हुए समानता, सेवा और करुणा के उनके संदेश को आज भी प्रासंगिक बताया।
लोकसभा अध्यक्ष और गृह मंत्री के संदेश
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने एक्स पर लिखा कि गुरु अमरदास जी का जीवन सेवा, समानता, करुणा, मानव गरिमा और सामाजिक सुधार के महान मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने कहा, 'उन्होंने अपने आध्यात्मिक चिंतन और कर्मशील जीवन के माध्यम से ऐसे समाज की कल्पना को आगे बढ़ाया, जिसमें जाति, ऊंच-नीच और सामाजिक भेदभाव के लिए कोई स्थान न हो।' बिड़ला ने यह भी कहा कि मानवता के लिए समर्पित उनका सम्पूर्ण जीवन आज भी राह दिखाता है।
गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा कि गुरु अमरदास जी ने मानव को अहंकार त्यागकर सेवा और समर्पण का पथ अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा, 'स्नेह, समानता और विनम्रता को भक्ति का सच्चा मार्ग बताने वाले गुरु साहिब का दिव्य जीवन और उनके उच्च आदर्श समस्त मानव समाज के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेंगे।'
केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्रियों की श्रद्धांजलि
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी एक्स पर गुरु जी के ज्योति-ज्योत दिवस पर नमन अर्पित किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी पोस्ट में गुरु साहिब को 'मानवता, सेवा, समरसता और आध्यात्मिक चेतना के अमर संवाहक' बताते हुए कहा कि उनका 'प्रकाशमय जीवन सदैव लोक-कल्याण का मार्ग आलोकित करता रहेगा।'
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरु अमरदास जी को 'सेवा, समर्पण, त्याग और करुणा की दिव्य प्रतिमूर्ति' बताते हुए उनकी शिक्षाओं को मानव कल्याण और समानता का अनुपम उदाहरण कहा।
पंजाब और उत्तर प्रदेश के नेताओं के विचार
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक्स पर गुरु साहिब के उपदेश 'पहले पंक्ति, फिर संगत' का उल्लेख करते हुए नागरिकों से समानता, स्मरण और सेवा को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने गुरु अमरदास जी को 'सेवा व करुणा का प्रतीक' बताते हुए उनके सामाजिक भेदभाव के उन्मूलन के संदेश को आज भी प्रासंगिक करार दिया।
गुरु अमरदास जी की विरासत
गुरतलब है कि श्री गुरु अमरदास जी सिख धर्म के तृतीय गुरु थे, जिन्होंने जाति-प्रथा, सती प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज़ उठाई और 'लंगर' की परंपरा को और सुदृढ़ किया, जिसमें हर व्यक्ति — ऊंच-नीच का भेद किए बिना — एक साथ बैठकर भोजन करता है। उनकी शिक्षाएँ सिख धर्म की बुनियाद को गहरा करने में महत्वपूर्ण रहीं। उनका यह संदेश आज सामाजिक एकता और मानवीय गरिमा के संदर्भ में उतना ही सार्थक है जितना सदियों पहले था।
देश के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का एकसाथ गुरु साहिब को नमन करना यह दर्शाता है कि उनकी विरासत राजनीतिक विभाजन से परे सभी को एकसूत्र में पिरोती है। आने वाले समय में भी उनकी शिक्षाएँ सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय एकता की दिशा में प्रेरणा देती रहेंगी।