गुरु हरकिशन साहिब जी के प्रकाश पर्व पर BJP नेताओं ने किया नमन, बोले — उनकी सेवा भावना आज भी मार्गदर्शक
सारांश
मुख्य बातें
सिखों के आठवें गुरु श्री गुरु हरकिशन साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व पर 7 अगस्त को देशभर के वरिष्ठ भाजपा नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों ने श्रद्धापूर्वक शुभकामनाएं अर्पित कीं। करुणा, सेवा और विनम्रता के प्रतीक गुरु साहिब के जीवन आदर्शों को स्मरण करते हुए नेताओं ने देशवासियों से उनके पदचिह्नों पर चलने का संकल्प लेने का आग्रह किया।
लोकसभा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्रियों की श्रद्धांजलि
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'बाला प्रीतम' के नाम से विख्यात गुरु साहिब करुणा, सेवा और विनम्रता की साक्षात प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने कहा, "गुरु साहिब का आशीर्वाद सदैव मानव कल्याण और सेवा के मार्ग पर अग्रसर रखें।"
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने प्रकाश पर्व पर गुरु साहिब को कोटि-कोटि नमन करते हुए समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई दी।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरु हरकिशन साहिब जी को प्रेम, दया और करुणा का पर्याय बताया। उन्होंने कहा, "आपकी शिक्षाएं व उपदेश सर्वदा हम सबको धर्म पथ पर चलने तथा मानवता की सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।"
मुख्यमंत्रियों ने किया त्याग और समर्पण का स्मरण
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरु साहिब के दिव्य संदेश को जन-कल्याण से जोड़ते हुए कहा, "मानवता, सेवा, करुणा और त्याग का उनका दिव्य संदेश हम सभी को सदैव लोककल्याण, सामाजिक समरसता और राष्ट्रसेवा के पथ पर अग्रसर रहने की प्रेरणा देता रहेगा।"
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरु साहिब की बाल्यावस्था में दी गई शिक्षाओं को सम्पूर्ण विश्व के लिए प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा, "पीड़ितों और जरूरतमंदों की निस्वार्थ सेवा का उनका संदेश हमें प्रेम, सहानुभूति और समानता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।"
उत्तर प्रदेश के नेताओं का नमन
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने गुरु साहिब को करुणा और मानवता का प्रतीक बताते हुए कहा, "उनकी शिक्षाएं हमें निस्वार्थ सेवा, करुणा और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।"
गुरु हरकिशन साहिब जी का ऐतिहासिक महत्त्व
गौरतलब है कि श्री गुरु हरकिशन साहिब जी सिख परंपरा के सबसे कम आयु में गुरु पद पर आसीन हुए थे। मात्र पाँच वर्ष की आयु में गुरुगद्दी संभालने वाले गुरु साहिब ने चेचक महामारी के दौरान दिल्ली में पीड़ितों की सेवा करते हुए अपना जीवन समर्पित किया। यह ऐसे समय में उनकी याद है जब सेवा और सामाजिक एकता के मूल्यों की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है।
प्रकाश पर्व के इस अवसर पर देशभर के गुरुद्वारों में विशेष दीवान सजाए गए और लंगर की व्यवस्था की गई। नेताओं की इन श्रद्धांजलियों ने गुरु साहिब की शिक्षाओं को समकालीन राष्ट्रीय जीवन से जोड़ने का प्रयास किया।