गुरु पूर्णिमा 2026: राजनाथ सिंह, अमित शाह, ओम बिड़ला समेत शीर्ष नेताओं ने दी देशवासियों को शुभकामनाएं
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, शिवराज सिंह चौहान और मनोहर लाल ने 29 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर अपने-अपने गुरुओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इन सभी नेताओं ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपने संदेश साझा किए, जिनमें गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता और भारतीय संस्कृति में गुरु के सर्वोच्च स्थान को रेखांकित किया गया।
राजनाथ सिंह का संदेश
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर लिखा कि भारतीय परंपरा में गुरु केवल ज्ञान के दाता नहीं, बल्कि जीवन में संस्कार और चरित्र के शिल्पकार हैं। उन्होंने कहा, 'गुरु-शिष्य परंपरा ही हमारी सांस्कृतिक चेतना की वह अमूल्य धरोहर है, जिसने पीढ़ियों को सत्य, सेवा, समर्पण और राष्ट्रधर्म का मार्ग दिखाया है।' सिंह ने इस अवसर पर राष्ट्रसेवा के पथ पर निरंतर अग्रसर रहने का संकल्प भी व्यक्त किया।
अमित शाह और ओम बिड़ला के उद्गार
गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि ज्ञान रूपी अमृत से शिष्यों के जीवन को संवारने वाले गुरु का स्थान भारतीय संस्कृति में सर्वोच्च है। उन्होंने चरित्र निर्माण के माध्यम से समाज और राष्ट्र का भविष्य बेहतर बनाने वाले समस्त गुरुजनों को नमन किया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने अपने एक्स संदेश में गुरु पूर्णिमा को 'भारतीय संस्कृति की सनातन चेतना का उत्सव' बताया। उन्होंने कहा कि गुरु केवल अक्षरों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी सत्य व कर्तव्य के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देते हैं। बिड़ला ने महर्षि वेदव्यास से लेकर आधुनिक युग के महान शिक्षकों तक की गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने में इस परंपरा की भूमिका को रेखांकित किया।
गडकरी, शिवराज और मनोहर लाल के संदेश
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 'तस्मै श्रीगुरवे नमः' के साथ देशवासियों को गुरु पूर्णिमा की बधाई दी। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जगद्गुरु आदि शंकराचार्य को विशेष रूप से नमन करते हुए कहा कि उन्होंने भारत की चारों दिशाओं में चार पीठों की स्थापना कर देश को एक अटूट सांस्कृतिक सूत्र में पिरोया। चौहान ने यह भी कहा कि वर्तमान में जब विश्व युद्ध, संघर्ष और घृणा से जूझ रहा है, तब आदि गुरु का अद्वैत दर्शन ही शांति और विश्व-बंधुत्व का पथ प्रदर्शित करता है।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने 'गुरु बिन ज्ञान न उपजै' दोहे से अपना संदेश प्रारंभ करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति में गुरु को साक्षात् परम ब्रह्म माना गया है। उन्होंने देशवासियों के जीवन को यशस्वी, धर्ममय और जनकल्याणकारी बनाने की कामना की।
गुरु पूर्णिमा का महत्व
गुरु पूर्णिमा का पर्व प्रतिवर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह दिन महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी जाना जाता है, जिन्होंने वेदों का संकलन किया और महाभारत की रचना की। भारत में यह पर्व शिक्षकों, आध्यात्मिक गुरुओं और मार्गदर्शकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर माना जाता है। इस वर्ष देश के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व ने एक साथ इस परंपरा को सार्वजनिक रूप से रेखांकित किया, जो भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति राजनीतिक वर्ग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।