गुरु पूर्णिमा पर PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित, कहा — गुरु सुसंस्कारों से करते हैं शिष्य का निर्माण
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए देशवासियों को शुभकामनाएँ दीं। अपनी पोस्ट में उन्होंने गुरु की महत्ता को रेखांकित करते हुए लिखा कि गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि अपने शिष्यों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर उन्हें सुविचार और सुसंस्कारों से सुशिक्षित भी करते हैं।
गुरु पूर्णिमा पर साझा किया गया सुभाषित
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'गुरु पूर्णिमा की सभी देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई। गुरु ज्ञान के साथ ही अपने शिष्यों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर उन्हें सुविचार और सुसंस्कारों से सुशिक्षित करते हैं। आइए, उनके आदर्शों को अपने जीवन का संबल बनाएं।'
इसके साथ उन्होंने संस्कृत श्लोक — 'प्रेरकः सूचकश्चैव वाचको दर्शकस्तथा। शिक्षकः बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः॥' — भी साझा किया। इस श्लोक का भाव है कि जो जीवन में प्रेरणा का संचार करे, सही दिशा का संकेत दे, ज्ञान और सत्य का उपदेश करे, उचित मार्ग दिखाए, शिक्षा प्रदान करे और आत्मविकास का मार्ग प्रशस्त करे — ये गुरु के छह स्वरूप बताए गए हैं।
मंगलवार को प्रकृति-संरक्षण पर सुभाषित
इससे एक दिन पूर्व, मंगलवार को, प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा था, 'प्रकृति के संरक्षण और सम्मान में ही मानवता का कल्याण निहित है। हमारी परंपरा भी हमें इसी धर्मसम्मत आचरण की प्रेरणा देती है।' साथ में उन्होंने संस्कृत श्लोक — 'लोकपालाश्च ते सर्वे वासवप्रमुखास्तथा। ऋतवः षट् च ते सर्वे मासाः संवत्सराः क्षपाः॥ दिनानि च मुहूर्ताश्च स्वस्ति कुर्वन्तु ते सदा। श्रुतिः स्मृतिश्च धर्मश्च पातु त्वां पुत्र सर्वतः॥' — भी पोस्ट किया था।
इस श्लोक का आशय है कि प्रकृति और धर्म के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन ही सुख, सुरक्षा और मंगल का आधार है; दिशाओं के रक्षक देवता, छह ऋतुएँ, सभी मास, वर्ष, रात्रियाँ, दिन और शुभ मुहूर्त सदैव कल्याणकारी हों तथा वेद, स्मृतियाँ और धर्म सर्वत्र सबकी रक्षा करें।
सोमवार को सदाचार पर श्लोक
सोमवार को प्रधानमंत्री ने एक्स पर संस्कृत श्लोक — 'शीलवान् पूजितो लोके, शीलवान् साधुसम्मतः। शीलवान् सर्वकर्मार्हः, शीलवान् प्रियदर्शनः॥' — साझा किया था। इसका भाव है कि सदाचारी मनुष्य समाज में प्रतिष्ठा और सज्जनों का आदर प्राप्त करता है; उत्तम चरित्र से युक्त व्यक्ति प्रत्येक उत्तरदायित्व के योग्य माना जाता है और उसका व्यक्तित्व सभी के लिए अनुकरणीय होता है।
सुभाषित-श्रृंखला का संदर्भ
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी नियमित रूप से एक्स पर संस्कृत श्लोक और सुभाषित साझा करते रहे हैं, जो भारतीय दर्शन, प्रकृति-प्रेम और नैतिक आचरण को केंद्र में रखते हैं। यह श्रृंखला सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने के उनके प्रयास का हिस्सा मानी जाती है। गुरु पूर्णिमा 2026 के अवसर पर साझा किया गया सुभाषित इस दृष्टि से विशेष रूप से प्रासंगिक है।