गुरु पूर्णिमा पर हिमानी शिवपुरी का भावुक नमन, माता-पिता को बताया जीवन का पहला गुरु
सारांश
मुख्य बातें
दिग्गज अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी ने गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर अपने गुरुओं और जीवन-पथ प्रदर्शकों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। 29 जुलाई को इंस्टाग्राम पर साझा की गई एक भावुक पोस्ट में उन्होंने अपने माता-पिता को अपना 'सबसे पहला गुरु' बताया और उन सभी शिक्षकों को नमन किया जिन्होंने उनके जीवन और करियर को आकार दिया।
माता-पिता को दिल से नमन
हिमानी शिवपुरी ने इंस्टाग्राम पर माता-पिता के साथ पुरानी तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, 'गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं! मेरे सबसे पहले गुरु मेरे माता-पिता हैं। उन्हें मेरा दिल से नमन और आभार, जिन्होंने मुझे सही संस्कार और जीवन की अच्छी सीख दी।' यह पोस्ट सोशल मीडिया पर भावनात्मक प्रतिक्रियाओं का केंद्र बन गई।
शिक्षकों और गुरुओं का आभार
अभिनेत्री ने आगे लिखा कि उनके स्कूल, कॉलेज, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा तथा फिल्म और टीवी जगत के समस्त शिक्षकों और उन सभी लोगों का वे दिल से सम्मान करती हैं जिन्होंने उनकी जिंदगी में आकर उन्हें कुछ न कुछ सिखाया। उन्होंने कहा, 'आप सभी का दिल से धन्यवाद और सम्मान।' यह संदेश उनके विनम्र स्वभाव और गुरु-परंपरा के प्रति आस्था को दर्शाता है।
गुरु पूर्णिमा का महत्व
गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला वह पवित्र पर्व है जो अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाले गुरुओं को समर्पित है। इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है, क्योंकि यह महान ऋषि वेद व्यास के प्रकटोत्सव के रूप में भी मनाई जाती है। इस दिन शिष्य अपने गुरुओं का आदर करते हैं और उनका आशीर्वाद ग्रहण करते हैं।
हिमानी शिवपुरी का सफर
हिमानी शिवपुरी ने अपने करियर में 100 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है। 'हम आपके हैं कौन', 'राजा', 'खामोशी', 'मीरा के गिरधर' और 'परदेश' जैसी चर्चित फिल्मों में उनकी भूमिकाएँ आज भी याद की जाती हैं। नई पीढ़ी उन्हें लोकप्रिय टीवी शो 'हप्पू की उलटन पलटन' की कटोरी अम्मा के रूप में पहचानती है, हालाँकि वे यह शो कुछ समय पहले छोड़ चुकी हैं।
सामाजिक सरोकार और मायका गाँव
अभिनय के परे, हिमानी शिवपुरी ने उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित अपने पैतृक गाँव भटवाड़ी को गोद लिया है। वहाँ वे महिलाओं और बच्चों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य करती हैं — जो उनकी गुरु-भावना का ही व्यावहारिक विस्तार है।