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गुरु पूर्णिमा पर इंदिरा कृष्णा का भावुक संदेश: 'मेरी माँ ही मेरी पहली और सच्ची गुरु हैं'

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गुरु पूर्णिमा पर इंदिरा कृष्णा का भावुक संदेश: 'मेरी माँ ही मेरी पहली और सच्ची गुरु हैं'

सारांश

गुरु पूर्णिमा पर अभिनेत्री इंदिरा कृष्णा ने माँ को अपना पहला गुरु बताया — पूजा, बड़ों का सम्मान और कर्म की सच्चाई, सब माँ की सीख है। 'गंगा माई की बेटियां' में दुर्गावती का किरदार निभा रहीं इंदिरा का कहना है कि अंतरात्मा ही असली गुरु है।

मुख्य बातें

अभिनेत्री इंदिरा कृष्णा ने गुरु पूर्णिमा पर अपनी माँ को जीवन की पहली और सबसे बड़ी गुरु बताया।
उन्होंने कहा कि माँ ने उन्हें भगवान की पूजा , बड़ों का सम्मान और कर्म की सच्चाई सिखाई।
इंदिरा के अनुसार हर व्यक्ति की अंतरात्मा ही उसकी असली गुरु होती है।
उन्होंने ध्यान और आत्मचिंतन को मानसिक संतुलन के लिए ज़रूरी बताया।
इंदिरा इन दिनों जी टीवी के सीरियल 'गंगा माई की बेटियां' में दुर्गावती की भूमिका निभा रही हैं।

टीवी अभिनेत्री इंदिरा कृष्णा ने गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर अपनी माँ को अपना सबसे पहला और सबसे बड़ा गुरु बताया। मुंबई से अपनी भावनाएँ साझा करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन के शुरुआती संस्कार, सही-गलत की समझ और ईश्वर के प्रति आस्था — सब कुछ उन्हें अपनी माँ से ही मिला। इन दिनों वह जी टीवी के सीरियल 'गंगा माई की बेटियां' में दुर्गावती की भूमिका निभाकर दर्शकों के बीच खासी चर्चा में हैं।

माँ को बताया जीवन की पहली गुरु

इंदिरा कृष्णा ने कहा, 'गुरु वह होता है जो आपका मार्गदर्शन करता है और आप उसी रास्ते पर आगे बढ़ते हैं। हर शिक्षक हमें बेहतर इंसान बनने और जीवन में सही-गलत की पहचान करना सिखाता है। लेकिन मेरे लिए मेरी माँ ही मेरी पहली गुरु थीं। उन्होंने मुझे भगवान की पूजा करना सिखाया, बड़ों का सम्मान करना सिखाया और यह भी समझाया कि सच हमेशा हमारे कर्मों के ज़रिए जीतता है।'

अभिनेत्री के अनुसार माँ द्वारा दिए गए ये संस्कार आज भी उनके व्यक्तित्व की नींव हैं। उनका मानना है कि एक सच्चा गुरु वही होता है जो न केवल ज्ञान दे, बल्कि जीवन जीने की सही दिशा भी दिखाए।

अंतरात्मा को बताया असली गुरु

इंदिरा ने यह भी स्वीकार किया कि जीवन के विभिन्न पड़ावों पर कई विद्वान और अनुभवी लोगों ने उनका मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा, 'मैंने अपने जीवन में कई ऐसे लोगों से बहुत कुछ सीखा है, जिन्होंने मुझे सही दिशा दिखाई। लेकिन मेरा मानना है कि हर व्यक्ति के भीतर एक अंतरात्मा होती है, जो उसे सही और गलत के बीच के फ़र्क को बताती है। वही हमारी असली गुरु है।'

उनके अनुसार इस आंतरिक आवाज़ को सशक्त बनाए रखने के लिए ध्यान, आत्मचिंतन और मानसिक संतुलन अनिवार्य हैं।

सीखने की प्रक्रिया कभी नहीं रुकती

अभिनेत्री ने कहा कि उनके लिए हर दिन कुछ नया सीखने का अवसर होता है। उनके शब्दों में, 'हर दिन ऐसा भी होता है, जब हम जाने-अनजाने अपने व्यवहार और अनुभवों से किसी दूसरे व्यक्ति को भी अच्छी बातें सिखा रहे होते हैं।' यह विचार उनकी इस सोच को दर्शाता है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन के हर अनुभव में समाई होती है।

'गंगा माई की बेटियां' में इंदिरा की भूमिका

जी टीवी पर प्रसारित होने वाले सीरियल 'गंगा माई की बेटियां' में इंदिरा कृष्णा दुर्गावती का किरदार निभा रही हैं। इस शो में उनके साथ शीजान खान और अमनदीप सिद्धू भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। अपने सशक्त अभिनय के ज़रिए इंदिरा ने दर्शकों के बीच एक अलग पहचान बनाई है। गुरु पूर्णिमा पर साझा किए उनके विचार उनकी इसी संवेदनशीलता और गहराई को उजागर करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसमें वह सार्वभौमिक सत्य है जिससे आम दर्शक तुरंत जुड़ सकता है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंदिरा कृष्णा ने गुरु पूर्णिमा पर क्या कहा?
इंदिरा कृष्णा ने गुरु पूर्णिमा पर अपनी माँ को अपना पहला और सबसे बड़ा गुरु बताया। उन्होंने कहा कि भगवान की पूजा, बड़ों का सम्मान और कर्म की सच्चाई — ये सब उन्हें माँ से ही मिले।
इंदिरा कृष्णा इस समय किस सीरियल में काम कर रही हैं?
इंदिरा कृष्णा इस समय जी टीवी के सीरियल 'गंगा माई की बेटियां' में दुर्गावती का किरदार निभा रही हैं। इस शो में शीजान खान और अमनदीप सिद्धू भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं।
इंदिरा कृष्णा के अनुसार असली गुरु कौन होता है?
इंदिरा का मानना है कि हर व्यक्ति के भीतर एक अंतरात्मा होती है जो सही और गलत का फ़र्क बताती है — वही असली गुरु है। उन्होंने ध्यान और आत्मचिंतन को इस आंतरिक आवाज़ को सशक्त बनाए रखने के लिए ज़रूरी बताया।
'गंगा माई की बेटियां' किस चैनल पर आता है?
'गंगा माई की बेटियां' का प्रसारण जी टीवी पर होता है। इसमें इंदिरा कृष्णा दुर्गावती की मुख्य भूमिका निभा रही हैं।
इंदिरा कृष्णा सीखने को लेकर क्या सोचती हैं?
इंदिरा का कहना है कि सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती — हर दिन कुछ नया सीखने का अवसर होता है। उनके अनुसार हम जाने-अनजाने अपने व्यवहार और अनुभवों से दूसरों को भी कुछ न कुछ सिखाते रहते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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