गुरु अमरदास जी के ज्योति-ज्योत दिवस पर राजनाथ सिंह, शिवराज, हरदीप पुरी समेत दिग्गजों ने अर्पित की श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
सिख पंथ के तृतीय गुरु श्री गुरु अमरदास जी के ज्योति-ज्योत दिवस पर 26 सितंबर 2026 को देशभर के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन उन उल्लेखनीय नेताओं में शामिल रहे जिन्होंने गुरु जी की शिक्षाओं और उनकी समाज-सेवा की विरासत को नमन किया।
राजनाथ सिंह का संदेश
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी श्रद्धांजलि साझा करते हुए लिखा, 'सिख धर्म के तृतीय गुरु, श्री गुरु अमरदास जी के ज्योति-ज्योत दिवस पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन। श्री गुरु अमरदास जी ने 'पहले पंगत, फिर संगत' की परंपरा को सुदृढ़ करते हुए सामाजिक समरसता और समानता को प्रतिष्ठित किया।' उन्होंने आगे कहा कि गुरु जी ने जातिगत भेदभाव एवं सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध मानवता, सेवा और एकता का अमर संदेश दिया और उनके उच्च आदर्श, आध्यात्मिक दृष्टि तथा मानव कल्याण के प्रति समर्पित दिव्य जीवन सदैव सभी को प्रेरणा देता रहेगा।
अन्य केंद्रीय मंत्रियों की प्रतिक्रिया
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, 'प्रेम, दया और करुणा के सागर, सिखों के तृतीय गुरु, श्रद्धेय श्री गुरु अमरदास जी के ज्योति-ज्योत दिवस पर उनके चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं। आपने धर्म की रक्षा और मानवता के कल्याण के लिए जो पुण्य ज्योत प्रज्वलित की है, वह सदैव देदीप्यमान रहेगी।'
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपनी पोस्ट में कहा, 'तीसरे गुरु, साहिब श्री गुरु अमर दास जी की 'ज्योति-जोत' पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। 'गुरु का लंगर' की परंपरा को मजबूत करके 'पहले पंगत, फिर संगत' का सिद्धांत देकर गुरु साहिब ने 'गुरु घर' में हर जरूरतमंद को समान स्थान दिया।'
दिल्ली मुख्यमंत्री और BJP अध्यक्ष का नमन
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपनी श्रद्धांजलि में लिखा कि सेवा, समता और करुणा का मार्ग दिखाने वाले गुरु अमरदास जी की शिक्षाएं सामाजिक समरसता के लिए सदैव प्रासंगिक रहेंगी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी गुरु जी के ज्योति-ज्योत दिवस पर नमन करते हुए कहा, 'गुरु साहिब ने अपने जीवन में सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध खड़े होकर समानता की भावना को सुदृढ़ किया। संगत-पंगत की परंपरा को व्यापक रूप देकर उन्होंने हर व्यक्ति के सम्मान और समान अधिकार का संदेश समाज तक पहुंचाया।'
गुरु अमरदास जी की विरासत
गौरतलब है कि श्री गुरु अमरदास जी सिख पंथ के तृतीय गुरु थे, जिन्होंने 'पहले पंगत, फिर संगत' के सिद्धांत के ज़रिए सामाजिक समानता और जातिगत भेदभाव के उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने लंगर की परंपरा को व्यापक रूप दिया, जो आज भी गुरुद्वारों में करोड़ों लोगों की सेवा करती है। उनकी शिक्षाएं आज भी देश में सामाजिक सद्भाव और एकता के मूल्यों की प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में विभिन्न समुदायों के बीच सामाजिक समरसता को लेकर व्यापक चर्चा जारी है और गुरु जी की शिक्षाओं की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।