शिवसेना (यूबीटी) की 'राम रक्षा' रैली आज मुंबई में, उद्धव ठाकरे करेंगे नेतृत्व; राम मंदिर दान विवाद पर जवाबदेही की माँग
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने 6 जुलाई 2025 को मुंबई के दादर स्थित हनुमान मंदिर से 'राम रक्षा' विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया, जिसका मकसद अयोध्या के राम मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही की माँग करना है। पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में यह प्रदर्शन शाम 4 बजे शुरू होना निर्धारित है, जिसमें हजारों राम भक्तों के शामिल होने की उम्मीद जताई गई है।
प्रदर्शन का स्वरूप और स्थान
यह विरोध प्रदर्शन दादर कबूतरखाना के निकट हनुमान मंदिर के पास आयोजित किया जाएगा। उद्धव ठाकरे पार्टी नेताओं और शिव सैनिकों के साथ 'राम रक्षा स्तोत्र', 'हनुमान स्तोत्र' और 'हनुमान चालीसा' का सामूहिक पाठ करेंगे। पार्टी ने इसे किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित न रखते हुए आम जनता के लिए खुला निमंत्रण दिया है।
उद्धव ठाकरे के आरोप
उद्धव ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर आरोप लगाया है कि वह राम मंदिर में भक्तों द्वारा अर्पित दान की जवाबदेही तय करने में नाकाम रही है। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि चढ़ावे के धन की लूट हुई है और मंदिर के फंड प्रबंधन में पारदर्शिता की सख्त ज़रूरत है। ठाकरे ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, 'मैं हर उस हिंदू को आमंत्रित करता हूँ जो भगवान राम के घर में हो रही इस चोरी को बर्दाश्त नहीं कर सकता। यह उन सभी के लिए है जिन्होंने हिंदुत्व या बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को नहीं छोड़ा है।'
संजय राउत का BJP और RSS पर हमला
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने BJP और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर निशाना साधते हुए कहा, 'उस समय BJP और RSS के नेता घर पर बैठे थे, जबकि हम सड़कों पर थे। यह हमारा कर्तव्य और अधिकार है कि हम उनसे पूछें कि इन चोरियों के पीछे कौन है?' राउत के अनुसार, यह प्रदर्शन धार्मिक भावनाओं की रक्षा के लिए उठाया गया कदम है।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में शिवसेना के दोनों धड़ों — एकनाथ शिंदे की शिवसेना और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) — के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता तीखी बनी हुई है। अयोध्या राम मंदिर, जो BJP के लिए एक प्रमुख राजनीतिक प्रतीक रहा है, को लेकर शिवसेना (यूबीटी) का यह कदम विपक्षी राजनीति में एक नई धार्मिक-राजनीतिक रणनीति का संकेत देता है। राम मंदिर निर्माण के लिए देश भर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने दान दिया था, और दान प्रबंधन में पारदर्शिता की माँग लंबे समय से उठती रही है।
आगे क्या होगा
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदर्शन में कितनी भीड़ जुटती है और BJP तथा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट इन आरोपों पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हैं। शिवसेना (यूबीटी) के इस कदम का असर महाराष्ट्र की राजनीति पर भी पड़ सकता है, जहाँ हिंदू मतदाताओं को लेकर दोनों पक्षों में होड़ जारी है।