राम मंदिर घोटाले पर संजय राउत का BJP पर हमला: 'राम के श्राप से जाएगी यह सरकार'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने 22 जून को मुंबई में एक प्रेसवार्ता के दौरान राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर ट्रस्ट में लगभग ₹500 करोड़ का घोटाला हुआ है और मंदिर से सोना, चाँदी तथा चढ़ावे की अन्य वस्तुएँ गायब कर दी गई हैं। राउत ने कहा कि जो सरकार भगवान राम के आशीर्वाद से सत्ता में आई, वह राम के श्राप से ही सत्ता से बाहर होगी।
राम मंदिर घोटाले पर मुख्य आरोप
राउत ने प्रेसवार्ता में आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह के उस बयान का हवाला दिया जिसमें संजय सिंह ने कहा था कि जब भगवान राम वनवास पर गए थे तो भरत ने उनकी खड़ाऊं की रक्षा की थी, लेकिन BJP के लोगों ने खुद ही भगवान राम की खड़ाऊं चुरा ली है। राउत ने कहा, 'BJP के राज में राम का ही अस्तित्व मिटा दिया गया है, उनकी दानपेटी से पैसा चोरी किया जा रहा है और इसे देखने वाला कोई नहीं है।'
SIT जाँच पर संदेह
राउत ने SIT जाँच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि जिन्होंने घोटाला किया है वे BJP के ही लोग हैं, इसलिए जाँच रिपोर्ट को दबा दिया जाएगा और सच्चाई सामने नहीं आएगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और RSS सरसंघचालक मोहन भागवत से सवाल किया कि वे इस मामले पर एक शब्द भी क्यों नहीं बोल रहे, जबकि मंदिर में लंबे समय से धन की हेराफेरी होती रही। राउत ने कहा, 'यहीं लोग कहते थे कि पहले के शासकों ने भारत के मंदिरों को लूटा था — अब वही काम ये लोग कर रहे हैं।'
ओमराजे निंबालकर और दलबदल विवाद
राउत ने लोकसभा सांसद ओमराजे निंबालकर पर भी निशाना साधा और उन्हें 'कुख्यात गद्दार' करार दिया। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का उपयोग मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को कमज़ोर करने के लिए किया जा रहा है। राउत ने कहा, 'गद्दारों की कोई विचारधारा नहीं होती। अगर किसी सांसद को लगता है कि ₹100 करोड़ अपनी जेब में डालना ही विकास है, तो यह गलत सोच है।'
उद्धव ठाकरे गुट का रुख
राउत ने यह भी कहा कि शिवसेना को तोड़ना महाराष्ट्र को तोड़ने जैसा है और उद्धव ठाकरे भली-भाँति जानते हैं कि निंबालकर को सबसे पहले ₹15 करोड़ किसने दिए थे। उन्होंने दलबदलुओं पर आरोप लगाया कि वे पूरी तरह से स्वार्थ से प्रेरित हैं और उनके पास कोई वैचारिक आधार नहीं है। यह टकराव ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में गठबंधन की रेखाएँ लगातार बदल रही हैं।
आगे क्या
राम मंदिर ट्रस्ट घोटाले की SIT जाँच जारी है, हालाँकि विपक्ष इसकी स्वतंत्रता पर सवाल उठा रहा है। राउत के इन बयानों से राजनीतिक विवाद और गहराने की संभावना है, खासकर तब जब संसद का मानसून सत्र नज़दीक है।