18 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या जीरकपुर में नाबालिग बच्चों की पिटाई पर बाल आयोग सख्त हुआ?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या जीरकपुर में नाबालिग बच्चों की पिटाई पर बाल आयोग सख्त हुआ?

सारांश

जीरकपुर में नाबालिग बच्चों की पिटाई के मामले पर बाल आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। एसएसपी को नोटिस जारी कर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है। इस घटना ने पूरे पंजाब में आक्रोश पैदा कर दिया है। जानें पूरी कहानी और आयोग की कार्रवाई के बारे में।

मुख्य बातें

नाबालिग बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पंजाब बाल आयोग ने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
पुलिस प्रशासन को निष्पक्ष जांच करने के लिए निर्देशित किया गया है।
इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए।

जीरकपुर, २५ अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। पंजाब के जीरकपुर में पाँच नाबालिग बच्चों की पिटाई के मामले में बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को नोटिस जारी कर २७ अक्टूबर तक कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

यह मामला तब सुर्खियों में आया जब २४ अक्टूबर को एक टीवी चैनल ने एक रिपोर्ट प्रसारित की, जिसमें बताया गया कि जीरकपुर क्षेत्र में कुछ दुकानदारों ने चोरी के संदेह में पाँच नाबालिग बच्चों को पकड़कर पहले नग्न किया और फिर बेरहमी से पीटा।

इस घटना का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। यह वीडियो पंजाब राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग तक भी पहुँचा।

आयोग ने इसे बच्चों के मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए कहा कि किसी भी स्थिति में बच्चों के साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग ने पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

आयोग ने मोहाली के एसएसपी को आदेश दिया है कि जांच अधिकारी को २७ अक्टूबर सुबह ११ बजे आयोग के समक्ष पुलिस फाइल सहित उपस्थित कराया जाए ताकि अब तक हुई कार्रवाई का ब्यौरा प्रस्तुत किया जा सके।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के अधिकारों से जुड़ी ऐसी घटनाओं को किसी भी हालत में सहन नहीं किया जाएगा। जो भी आरोपी हैं, उनकी जल्द पहचान कर गिरफ्तार किया जाना चाहिए। शहर में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी कदम उठाए जाने चाहिए।

पंजाब राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग का गठन राज्य सरकार ने भारत सरकार के बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, २००५ की धारा १७ के तहत किया था। आयोग को किशोर न्याय अधिनियम, २०१५, पॉक्सो अधिनियम, २०१२, और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, २००९ के पालन की निगरानी का अधिकार प्राप्त है। अधिनियम की धारा १३ के अंतर्गत आयोग को बाल अधिकारों के उल्लंघन पर शिकायतों की जांच और स्वतः संज्ञान लेने का अधिकार है, जबकि धारा १४ के तहत उसे सिविल न्यायालय के समान अधिकार प्राप्त हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समाज के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है। बच्चों के प्रति हिंसा और अमानवीय व्यवहार को किसी भी सूरत में सहन नहीं किया जाना चाहिए। हमें मिलकर इस बुराई को समाप्त करने का प्रयास करना होगा।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाल आयोग ने इस घटना पर क्या कार्रवाई की?
बाल आयोग ने एसएसपी को नोटिस जारी कर 27 अक्टूबर तक कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
जीरकपुर में बच्चों के साथ क्या हुआ?
दुकानदारों ने चोरी के संदेह में पाँच नाबालिग बच्चों को पकड़कर उन्हें नग्न कर बेरहमी से पीटा।
सोशल मीडिया पर इस घटना का क्या असर हुआ?
इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में भारी आक्रोश फैल गया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले