लखनऊ कोचिंग अग्निकांड: NHRC ने डीएम और पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी किया, 2 सप्ताह में रिपोर्ट तलब
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने लखनऊ के अलीगंज स्थित एक कोचिंग सेंटर में 22 जून को लगी भीषण आग के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए लखनऊ के जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस आयुक्त को औपचारिक नोटिस जारी किया है। शिकायत के अनुसार इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। आयोग ने दोनों अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (ATR) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग की कार्रवाई का आधार
NHRC ने यह कदम एक शिकायत के आधार पर उठाया, जिसमें आरोप लगाया गया कि जिस बहुमंजिला इमारत में आग लगी, वहाँ अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे और भवन निर्माण तथा सुरक्षा संबंधी नियमों का गंभीर उल्लंघन किया गया था। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि उक्त इमारत में कोचिंग सेंटर के अलावा लाइब्रेरी, एनिमेशन स्टूडियो और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी संचालित हो रहे थे, जिससे भवन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठते हैं।
गौरतलब है कि यह हादसा ऐसे समय में सामने आया है जब देश भर में कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से ही चिंता व्यक्त की जा रही थी। 2024 में दिल्ली के राजेंद्र नगर में एक कोचिंग संस्थान के बेसमेंट में बाढ़ से हुई छात्रों की मौत के बाद यह दूसरी बड़ी त्रासदी है जिसने नियामक चूक को उजागर किया है।
शिकायतकर्ता की मांगें
शिकायतकर्ता ने NHRC से निम्नलिखित मांगें की हैं — मामले की निष्पक्ष जाँच, लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही, पीड़ितों और उनके परिजनों को उचित मुआवजा, तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम। इसके अलावा, घायल छात्रों को त्वरित और समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश जारी करने की भी माँग की गई है।
आयोग ने अपने नोटिस में अधिकारियों को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी 'कोचिंग सेंटर्स के नियमन के लिए गाइडलाइंस, 2024' का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने और इसके अनुपालन की रिपोर्ट भी आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है।
जाँच के दायरे में क्या-क्या
NHRC ने स्पष्ट किया है कि जाँच में भवन में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन, आपातकालीन निकासी व्यवस्था की स्थिति, आपदा प्रबंधन की तैयारियाँ, तथा नियामक एजेंसियों और संबंधित सरकारी अधिकारियों की भूमिका — इन सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा। यह जाँच छात्रों और शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा से जुड़े व्यापक सवालों को भी संबोधित करेगी।
उत्तर प्रदेश सरकार की कार्रवाई
उत्तर प्रदेश सरकार ने भी इस हादसे की जाँच के लिए दो सदस्यीय विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया है। SIT में अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और अपर पुलिस महानिदेशक (लखनऊ जोन) प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। टीम ने 23 जून को घटनास्थल का निरीक्षण कर आग लगने के कारणों और संभावित लापरवाही की जाँच शुरू कर दी है।
अब जब NHRC और राज्य SIT — दोनों स्तरों पर जाँच एक साथ चल रही है, तो यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि जवाबदेही के नतीजे कब और किस रूप में सामने आते हैं।