लखनऊ अलीगंज अग्निकांड: पीड़ित परिवारों को ₹5 लाख सहायता, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने दोषियों पर कार्रवाई का दिया भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह सक्रिय हो गई है। हादसे में जान गंवाने वाले 15 छात्रों के परिजनों को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की गई है और दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। 23 जून को सामने आई इस दुखद घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।
सरकार की तत्काल राहत और सहायता
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस घटना को अत्यंत दुखद और हृदयविदारक बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने मृतकों के प्रत्येक परिजन को तत्काल ₹5 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री राहत कोष से भी प्रत्येक पीड़ित परिवार को ₹2 लाख की अलग सहायता राशि दी गई है।
पाठक ने कहा, 'इस दुख की घड़ी में पूरी सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। आगे भी जो भी आवश्यकता होगी, उसे पूरा किया जाएगा। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों। जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।'
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के दूसरे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि 15 होनहार बच्चों की असमय मृत्यु से पूरा देश शोकाकुल है। मौर्य ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल की जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि जिस स्थान पर इतनी बड़ी संख्या में छात्र अध्ययन कर रहे थे, वहाँ सुरक्षित निकास मार्ग का अभाव अत्यंत चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है, तो उनके विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कानपुर में भी कोचिंग सेंटरों की जांच
लखनऊ अग्निकांड के बाद कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) भी पूरी तरह सक्रिय हो गया है। शहर के प्रमुख शिक्षा केंद्र काकादेव में बड़े पैमाने पर निरीक्षण अभियान चलाया गया। सुरक्षा मानकों और भवन नियमों के संभावित उल्लंघन की आशंका पर कई कोचिंग संस्थानों की जांच की गई और कई स्थानों पर कार्रवाई भी की गई।
छापेमारी के दौरान नियमों का पालन न करने वाले कई कोचिंग संस्थानों को खाली कराया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी संस्थान को सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
आगे क्या होगा
यह घटना उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर दोषी संस्थान संचालकों और लापरवाह अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार से अपेक्षा है कि वह प्रदेश भर के कोचिंग संस्थानों के लिए सख्त सुरक्षा मानक तय करे, ताकि ऐसी त्रासदी की पुनरावृत्ति न हो।