एनएचआरसी ने जम्मू-कश्मीर पुलिस से नागरिकों की हत्याओं पर रिपोर्ट मांगी

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एनएचआरसी ने जम्मू-कश्मीर पुलिस से नागरिकों की हत्याओं पर रिपोर्ट मांगी

सारांश

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जम्मू-कश्मीर में हो रही हिंसा और हत्याओं की शिकायत का संज्ञान लिया है। आयोग ने पुलिस से कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है, जिससे नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

मुख्य बातें

एनएचआरसी ने जम्मू-कश्मीर में हो रही हिंसा पर ध्यान दिया है।
पुलिस से कार्रवाई की रिपोर्ट दो सप्ताह में मांगी गई है।
शिकायत में हत्याओं के पैटर्न का जिक्र है।
पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजा और पुनर्वास की अपील की गई है।

नई दिल्ली, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने जम्मू-कश्मीर में हिंदू नागरिकों और अन्य कमजोर समुदायों के खिलाफ चल रही हिंसा और हत्याओं की शिकायत पर ध्यान दिया है। शिकायत में यह आरोप लगाया गया है कि इन मामलों की जांच और अभियोजन में पारदर्शिता की कमी है।

एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि आरोपों की जांच की जाए और दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट (एटीआर) आयोग को प्रस्तुत की जाए।

यह शिकायत 'एंटी टेररिज्म ग्लोबल फ्रंट' (एटीजीएफ) के अध्यक्ष और अधिवक्ता विनीत जिंदल द्वारा दायर की गई थी। उन्होंने चिंता व्यक्त की है कि हिंसा के मामलों में एक ही प्रकार के पैटर्न बार-बार देखे जा रहे हैं और जांच तथा अभियोजन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है।

शिकायत में कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं का उल्लेख भी किया गया है, जैसे नादिमार्ग नरसंहार, जिसमें २४ कश्मीरी पंडितों की हत्या की गई थी। इसके अलावा, १९९८ का वंधामा नरसंहार, जिसमें २३ लोगों की जान गई थी, और अमरनाथ यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों पर हुए हमले भी शामिल हैं। शिकायत में वर्ष २००० और २०१७ की घटनाओं का भी उल्लेख है, जिनमें कई लोगों की जानें गई थीं।

एनएचआरसी ने स्पष्ट किया है कि आयोग इस प्रकार की गंभीर हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों की शिकायतों को गंभीरता से लेता है। आयोग ने पुलिस महानिदेशक से कहा है कि जांच प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए और सभी मामलों में दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

इस कदम से यह संकेत मिलता है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग जम्मू-कश्मीर में कमजोर समुदायों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है। आयोग की कार्रवाई का उद्देश्य उन घटनाओं की जिम्मेदारी तय करना और भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकना है।

शिकायतकर्ता ने एनएचआरसी से हस्तक्षेप की मांग की और आरोपों की विस्तृत जांच रिपोर्ट, एफआईआर, गिरफ्तारियों और मुकदमों की केस-वार स्थिति उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। उन्होंने निवारक उपाय लागू करने, कमजोर समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजा और पुनर्वास की अपील भी की।

एनएचआरसी ने जम्मू और कश्मीर पुलिस को निर्देश दिया है कि आरोपों की जांच की जाए और निर्धारित समय के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट आयोग को प्रस्तुत की जाए। आयोग ने कहा कि रिपोर्ट में सभी जांच के विवरण, घटनाओं की जानकारी और उपलब्ध साक्ष्य शामिल होने चाहिए।

एनएचआरसी ने आगे कहा कि इस मामले से संबंधित सभी पत्राचार एचआरसी नेट पोर्टल के माध्यम से प्रस्तुत किए जा सकते हैं, जिसमें जांच से संबंधित दस्तावेज, केस-वार जानकारी और अन्य सहायक सामग्री भी शामिल हो सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनएचआरसी ने किस मामले की जांच के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस को नोटिस दिया?
एनएचआरसी ने जम्मू-कश्मीर में हिंदू नागरिकों और अन्य कमजोर समुदायों के खिलाफ हो रही हिंसा और हत्याओं की शिकायत के लिए पुलिस को नोटिस दिया।
शिकायत में किस प्रकार की पारदर्शिता की कमी का जिक्र है?
शिकायत में जांच और अभियोजन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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