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क्या कश्मीरी छात्रों और व्यापारियों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाना आवश्यक है?

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क्या कश्मीरी छात्रों और व्यापारियों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाना आवश्यक है?

सारांश

क्या कश्मीरी छात्रों और व्यापारियों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाना आवश्यक है? जेकेएसए ने एनएचआरसी को पत्र लिखकर उत्पीड़न की जांच की मांग की है। जानें क्या हो रहा है कश्मीरियों के साथ।

मुख्य बातें

कश्मीरी छात्रों और व्यापारियों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाने की आवश्यकता है।
उत्पीड़न के मामलों की जांच की जानी चाहिए।
कश्मीरी व्यापारियों को अपने कारोबार में सुरक्षा मिलनी चाहिए।

नई दिल्ली, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर छात्र संघ (जेकेएसए) ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को एक पत्र लिखकर कश्मीरी शॉल विक्रेताओं और छात्रों के खिलाफ विभिन्न स्थानों पर हो रहे उत्पीड़न की जांच की मांग की है।

संघ ने कहा है कि उत्तर भारत के कई क्षेत्रों, विशेषकर हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र में, कश्मीरी व्यापारियों को लगातार धमकियों, हिंसा और भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। पिछले दस दिनों में ऐसी एक दर्जन से अधिक घटनाएं हुई हैं, जो एक सोची-समझी साजिश का संकेत देती हैं।

पत्र में जेकेएसए के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने उल्लेख किया है कि ये शॉल विक्रेता 20-30 वर्षों से शांति से अपना कारोबार कर रहे हैं। लेकिन अब उनके कारोबार में बाधाएं आ रही हैं, उनके सामान को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और लूट लिया जा रहा है। कई मामलों में उन्हें ‘भारत माता की जय’, ‘जय श्री राम’ या ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यदि वे मना करते हैं, तो उन्हें धमकाया जाता है, अपमानित किया जाता है और जान से मारने की धमकी दी जाती है। कुछ घटनाओं में उनके मोबाइल फोन तोड़ दिए गए जब उन्होंने वीडियो रिकॉर्ड करने का प्रयास किया। संविधान किसी को भी अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए नारे लगाने का आदेश नहीं देता। देशभक्ति जबरदस्ती नहीं थोपी जा सकती, बल्कि यह स्वतंत्रता और समानता से आनी चाहिए।

पत्र में हिमाचल प्रदेश के सोलन, कांगड़ा और बिलासपुर जिलों, उत्तराखंड के काशीपुर, उधम सिंह नगर और उत्तरकाशी, हरियाणा के कैथल, फतेहाबाद, कुरुक्षेत्र, पिपली और अंबाला, साथ ही मुंबई और दिल्ली में हुई घटनाओं का जिक्र किया गया है। एक कश्मीरी छात्रा मुनज्जा ने बताया कि दिल्ली में उसे सिर्फ धर्म के कारण किराए का घर नहीं दिया गया और हिजाब उतारने की शर्त रखी गई। मुंबई में एक छात्र पर पाकिस्तानी कहकर हमले की कोशिश की गई। 2025 में हिमाचल में 17 से अधिक ऐसी घटनाएं हुईं, लेकिन राज्य सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पिछले 12 दिनों में 12 से अधिक मामले सामने आए, जिसमें हमले, धमकी और बेदखली शामिल हैं।

जेकेएसए ने कहा है कि कश्मीरी भारत के अभिन्न अंग हैं और उन्हें समान अधिकार प्राप्त होने चाहिए। ऐसे उत्पीड़न से अलगाववाद बढ़ता है, जो दुश्मन पड़ोसी देशों की साजिश को मजबूत करता है। कई व्यापारी डर के कारण राज्य छोड़ चुके हैं, जिससे उनकी आजीविका और शिक्षा प्रभावित हुई है। संघ ने मांग की है कि प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और पुलिस प्रमुखों से पिछले एक साल की सभी घटनाओं की रिपोर्ट मांगी जाए, जिसमें एफआईआर, गिरफ्तारियां और रोकथाम के उपाय शामिल हों। जहां लापरवाही हुई है, वहां जवाबदेही तय की जाए। साथ ही, कश्मीरी छात्रों और व्यापारियों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून लागू करने और निगरानी व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए जाएं।

संपादकीय दृष्टिकोण

मैं यह कह सकता हूं कि कश्मीरी छात्रों और व्यापारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारे देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह केवल एक कानूनी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की एकता और समानता का भी सवाल है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कश्मीरी छात्रों के खिलाफ उत्पीड़न की घटनाएं कब से बढ़ी हैं?
पिछले कुछ महीनों में, विशेषकर जनवरी 2025 से, कश्मीरी छात्रों और व्यापारियों के खिलाफ उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ी हैं।
जेकेएसए ने एनएचआरसी को पत्र क्यों लिखा?
जेकेएसए ने पत्र लिखकर कश्मीरी शॉल विक्रेताओं और छात्रों के खिलाफ हो रहे उत्पीड़न की जांच की मांग की है।
क्या सरकार ने इस मुद्दे पर कोई कदम उठाए हैं?
अभी तक सरकार ने इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं, जो चिंता का विषय है।
राष्ट्र प्रेस
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