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पटियाला लाठीचार्ज: मानवाधिकार आयोग ने 10 दिनों में माँगी रिपोर्ट, महिला प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग पर सवाल

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पटियाला लाठीचार्ज: मानवाधिकार आयोग ने 10 दिनों में माँगी रिपोर्ट, महिला प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग पर सवाल

सारांश

पटियाला में बिजली कर्मियों सहित प्रदर्शनकारियों पर हुए कथित लाठीचार्ज ने मानवाधिकार आयोग को हरकत में ला दिया है। आयोग सदस्य जितेंद्र सिंह शंटी और जस्टिस गुरबीर सिंह ने स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रशासन से 10 दिनों में जवाब माँगा है — महिलाओं पर बल प्रयोग और प्रक्रियागत उल्लंघन केंद्र में हैं।

मुख्य बातें

पंजाब और चंडीगढ़ मानवाधिकार आयोग ने पटियाला लाठीचार्ज मामले में पटियाला प्रशासन से 10 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट माँगी है।
आयोग सदस्य जितेंद्र सिंह शंटी (पद्मश्री) और जस्टिस गुरबीर सिंह ने स्वतः संज्ञान लिया।
सोशल मीडिया वीडियो में महिला प्रदर्शनकारियों सहित प्रदर्शनकारियों पर कथित बल प्रयोग के दृश्य सामने आए।
रिपोर्ट में घायलों की संख्या, मेडिकल सहायता और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती का ब्यौरा माँगा गया है।
रिपोर्ट असंतोषजनक रही तो आयोग डीजीपी को पत्र लिखकर उच्च स्तर पर कार्रवाई करेगा।

पंजाब और चंडीगढ़ मानवाधिकार आयोग ने पटियाला लाठीचार्ज मामले में सख्त रुख अपनाते हुए पटियाला प्रशासन से 10 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग के सदस्य और पद्मश्री से सम्मानित जितेंद्र सिंह शंटी ने 8 जून को स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और बल प्रयोग के औचित्य पर जवाब देना प्रशासन की ज़िम्मेदारी है।

मामले की पृष्ठभूमि

अत्यधिक गर्मी के बीच पटियाला में बिजली कर्मियों और अन्य प्रदर्शनकारियों द्वारा धरना दिया जा रहा था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कथित तौर पर पुलिस कार्रवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों — जिनमें महिलाएँ भी शामिल थीं — पर बल प्रयोग के दृश्य सामने आए। इन वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद इस घटना को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई।

आयोग की आपत्ति और प्रक्रियागत सवाल

जितेंद्र सिंह शंटी ने बताया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस के पास एक निर्धारित प्रक्रिया होती है — पहले नोटिस देना, फिर चेतावनी बोर्ड लगाना, आवश्यकता पड़ने पर आँसू गैस और पानी की बौछार, और अंतिम चरण में लाठीचार्ज। उन्होंने कहा कि यदि इन चरणों का पालन नहीं किया गया, तो यह गंभीर जाँच का विषय है।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि रिपोर्ट में यह बताना होगा कि प्रदर्शनकारियों का क्या दोष था, कितने लोग घायल हुए, कितनों को मेडिकल सहायता या अस्पताल में भर्ती करना पड़ा, और क्या घटनास्थल पर महिला पुलिसकर्मियों की पर्याप्त तैनाती की गई थी।

संज्ञान कैसे लिया गया

शंटी ने बताया कि उन्होंने आयोग के सदस्य जस्टिस गुरबीर सिंह के साथ मिलकर इस घटना पर स्वतः संज्ञान लिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि अभी तक आयोग को कोई औपचारिक शिकायत या ठोस प्रमाण सीधे तौर पर नहीं मिले हैं — जानकारी मुख्यतः मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया वीडियो पर आधारित है। इसीलिए रिपोर्ट मिलने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा।

आगे की कार्रवाई का संकेत

शंटी ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं रही या तथ्य छुपाए गए, तो आयोग डीजीपी को पत्र लिखकर उच्च स्तर पर मामले को ले जाएगा। उन्होंने भारतीय संविधान और डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा स्थापित मूल अधिकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपने हक की माँग कर रहे थे, तो उनके साथ न्याय होना चाहिए। यह मामला अब राज्य में पुलिस की जवाबदेही और नागरिक अधिकारों की रक्षा के व्यापक सवाल को केंद्र में ले आया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि आयोग के पास अभी तक कोई औपचारिक शिकायत नहीं है — कार्रवाई सोशल मीडिया वीडियो पर टिकी है, जो अपने आप में साक्ष्य की दृष्टि से सीमित आधार है। असली परीक्षा यह होगी कि प्रशासन की रिपोर्ट आने के बाद आयोग कितनी दृढ़ता से आगे बढ़ता है। पंजाब में बिजली कर्मियों के विरोध-प्रदर्शन नए नहीं हैं, लेकिन महिला प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के आरोप और प्रक्रियागत उल्लंघन के सवाल इस घटना को राज्य में पुलिस जवाबदेही की बड़ी बहस से जोड़ते हैं।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पटियाला लाठीचार्ज मामले में मानवाधिकार आयोग ने क्या कदम उठाया है?
पंजाब और चंडीगढ़ मानवाधिकार आयोग के सदस्य जितेंद्र सिंह शंटी और जस्टिस गुरबीर सिंह ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पटियाला प्रशासन से 10 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट माँगी है। रिपोर्ट में घायलों की संख्या, मेडिकल सहायता और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती का ब्यौरा देना होगा।
पटियाला में प्रदर्शन क्यों हो रहा था?
अत्यधिक गर्मी के बीच पटियाला में बिजली कर्मियों और अन्य प्रदर्शनकारियों द्वारा धरना दिया जा रहा था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें महिलाओं सहित प्रदर्शनकारियों पर कथित बल प्रयोग दिखाया गया।
आयोग ने पुलिस कार्रवाई पर क्या प्रक्रियागत सवाल उठाए हैं?
जितेंद्र सिंह शंटी के अनुसार, पुलिस को लाठीचार्ज से पहले नोटिस देना, चेतावनी बोर्ड लगाना, आँसू गैस और पानी की बौछार जैसे चरणों का पालन करना होता है। यदि इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं हुआ, तो यह गंभीर जाँच का विषय है।
रिपोर्ट संतोषजनक न होने पर आयोग क्या करेगा?
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं रही या तथ्य छुपाए गए, तो डीजीपी को पत्र लिखकर मामले को उच्च स्तर पर ले जाया जाएगा।
क्या आयोग के पास इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत है?
आयोग सदस्य जितेंद्र सिंह शंटी ने स्वयं स्वीकार किया कि अभी तक कोई औपचारिक शिकायत या ठोस प्रमाण सीधे तौर पर नहीं मिले हैं। संज्ञान मुख्यतः मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया वीडियो के आधार पर लिया गया है, और अंतिम निष्कर्ष रिपोर्ट मिलने के बाद निकाला जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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