पंजाब बंद: सफाई कर्मचारियों पर लाठीचार्ज के विरोध में कांग्रेस विधायक ढिल्लों का आह्वान, बरनाला ठप
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह ढिल्लों ने 30 जुलाई 2026 को बरनाला में सफाई कर्मचारियों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में पंजाब बंद का आह्वान किया, जिसे चौतरफा समर्थन मिला। ढिल्लों ने स्पष्ट किया कि यह लाठीचार्ज बिना किसी मजिस्ट्रेट की अनुमति के किया गया, जो कि प्रशासनिक नियमों का सीधा उल्लंघन है।
मुख्य घटनाक्रम
कांग्रेस विधायक ढिल्लों के अनुसार, बरनाला सहित पूरे पंजाब में बंद का असर व्यापक रूप से देखा गया। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों के साथ हुआ व्यवहार न केवल अमानवीय था, बल्कि कानूनी प्रक्रिया की भी अनदेखी थी। गौरतलब है कि इस मामले में उच्च न्यायालय ने भी संज्ञान लेते हुए आदेश जारी किया है, हालाँकि न्यायालय ने किसी पर बलप्रयोग की अनुमति नहीं दी थी।
सरकार की प्रतिक्रिया और प्रशासनिक रवैया
ढिल्लों ने आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन उन अधिकारियों को बचाने में लगा हुआ है जिन्होंने सफाई कर्मचारियों पर लाठियाँ बरसाईं। उनके अनुसार, प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले में उदासीन रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि लाठीचार्ज में शामिल कुछ लोग सोशल मीडिया पर अपनी गलती स्वीकार कर रहे हैं, फिर भी सरकार ऐसे अधिकारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई करने से बच रही है।
सफाई कर्मचारियों की माँगें
ढिल्लों के मुताबिक, सफाई कर्मचारियों की वेतन वृद्धि की माँग को स्वीकार कर लिया गया है। लेकिन उनकी कुछ अन्य माँगें अभी विचाराधीन हैं। प्रमुख माँग यह है कि लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए और उन्हें किसी भी कीमत पर बर्दाश्त न किया जाए।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
कांग्रेस विधायक ने इस मामले में राजनीति करने की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि एक पक्ष सफाई कर्मचारियों को अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई का आश्वासन देता है, जबकि दूसरी ओर उन्हीं अधिकारियों को बचाने की भी कोशिश की जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब उच्च न्यायालय का आदेश भी लंबित है।
आगे क्या होगा
ढिल्लों ने ज़ोर देकर कहा कि राजनीति से ऊपर उठकर सफाई कर्मचारियों को न्याय दिलाना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने माँग की कि प्रशासन तत्काल दोषी अधिकारियों की पहचान करे और उनके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करे। यह देखना होगा कि सरकार उच्च न्यायालय के निर्देशों और जन-दबाव के बीच क्या रुख अपनाती है।