21 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सिख कैदियों की रिहाई की मांग: पंजाब बंद का आह्वान, दोपहर 2 बजे तक बाज़ार-संस्थान बंद

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सिख कैदियों की रिहाई की मांग: पंजाब बंद का आह्वान, दोपहर 2 बजे तक बाज़ार-संस्थान बंद

सारांश

सजा पूरी कर चुके सिख कैदियों की रिहाई की मांग पर SGPC, शिरोमणि अकाली दल और वारिस पंजाब दे सहित कई संगठनों ने 21 अगस्त को पंजाब बंद बुलाया। 15 अगस्त को मोहाली बॉर्डर पर लाठीचार्ज के बाद उपजे इस आंदोलन ने राज्य में सुरक्षा और सामान्य जनजीवन दोनों को प्रभावित किया।

मुख्य बातें

SGPC, शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर), वारिस पंजाब दे और कौमी इंसाफ मोर्चा सहित कई संगठनों ने 21 अगस्त को पंजाब बंद का आह्वान किया।
बंद दोपहर 2 बजे तक प्रभावी रहा; बाज़ार, फैक्ट्रियाँ और निजी शिक्षण संस्थान बंद रहे।
बंद का कारण: सजा पूरी कर चुके सिख कैदियों की रिहाई और जगतार सिंह हवारा के लिए पैरोल की मांग।
15 अगस्त को मोहाली बॉर्डर पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और वॉटर कैनन के इस्तेमाल के बाद बंद का आह्वान किया गया।
पुलिस के अनुसार, बंद के दौरान हिंसा की कोई घटना नहीं हुई; सरकारी स्कूल सामान्य रूप से खुले रहे।
परीक्षा, शादी, अंतिम संस्कार और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को बंद से छूट दी गई।

सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC), शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर), वारिस पंजाब दे, कौमी इंसाफ मोर्चा और किसान संगठनों सहित कई सिख धार्मिक एवं राजनीतिक संगठनों ने शुक्रवार, 21 अगस्त को पंजाब में राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया। बंद दोपहर 2 बजे तक प्रभावी रहा और पूरे राज्य में भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए।

बंद की पृष्ठभूमि

यह बंद 15 अगस्त को मोहाली बॉर्डर पर हुई उस घटना के बाद बुलाया गया, जब सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया था। ये प्रदर्शनकारी राज्यपाल के आवास के बाहर विरोध दर्ज कराने के लिए चंडीगढ़ की ओर बढ़ रहे थे।

कौमी इंसाफ मोर्चा के नेतृत्व में निकाले गए इस मार्च की एक प्रमुख मांग जगतार सिंह हवारा के लिए पैरोल भी थी। हवारा 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। संगठनों का कहना है कि कई सिख कैदी अपनी सजा पूरी करने के बावजूद अब भी जेलों में बंद हैं।

बंद का असर और सुरक्षा व्यवस्था

सुबह के समय बंद का असर आंशिक रहा, हालाँकि कई शहरों और कस्बों में बाज़ार, फैक्ट्रियाँ और व्यावसायिक संस्थान दोपहर 2 बजे तक बंद रहे। कई निजी बस ऑपरेटरों ने बंद का समर्थन किया और अनेक निजी शिक्षण संस्थानों ने एहतियातन अपने दरवाज़े बंद रखे।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, बंद के दौरान हिंसा की कोई घटना सामने नहीं आई। पटियाला के खांडा चौक सहित राज्य के संवेदनशील स्थानों पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। पटियाला सिटी के एसपी मोहित अग्रवाल ने बताया कि पुलिस ने संबंधित संगठनों से बातचीत की और परिवहन व्यवस्था पर सहमति बनाई।

किसे मिली छूट, कहाँ रहे खुले

बंद के आयोजकों ने परीक्षा, शादी, अंतिम संस्कार या विदेश यात्रा के लिए जाने वाले छात्रों और नागरिकों को छूट दी। आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में बाधा न डालने का आग्रह भी किया गया। फाजिल्का जिले के अबोहर में सरकारी स्कूल खुले रहे और सामान्य रूप से संचालित हुए। सरकारी शिक्षण संस्थान भी कार्यरत रहे, हालाँकि छात्रों की उपस्थिति कम दर्ज की गई।

संगठनों की प्रतिक्रिया

SGPC ने एकजुटता दिखाने के लिए अपने कार्यालय और संस्थान बंद रखे तथा अपनी निर्धारित कार्यकारी बैठक भी स्थगित कर दी। किसान मजदूर मोर्चा के समन्वयक सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि बंद की सात घंटे की अवधि के दौरान बाज़ार और संस्थान बंद रहेंगे।

वारिस पंजाब दे के समर्थक विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने सवाल उठाया, 'सजा पूरी होने के बावजूद सिखों को जेल में क्यों रखा जा रहा है? उन्हें रिहा किया जाना चाहिए।' एसपी मोहित अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि बंद स्वैच्छिक है और जो इसमें भाग नहीं लेना चाहते, उन्हें यात्रा या कामकाज से नहीं रोका जाएगा।

आगे क्या

बंद आयोजकों ने रेल पटरियों, हाईवे और टोल संग्रह केंद्रों पर धरने का आह्वान किया था और कौमी इंसाफ मोर्चा के कार्यकर्ता राज्य एवं राष्ट्रीय राजमार्गों पर तैनात रहे। सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर संगठनों का आंदोलन जारी रहने की संभावना है, और यह देखना होगा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दीर्घकालिक समाधान बातचीत की मेज़ पर ही निकलता है।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

21 अगस्त को पंजाब बंद क्यों बुलाया गया?
यह बंद सजा पूरी कर चुके सिख कैदियों की रिहाई और जगतार सिंह हवारा के लिए पैरोल की मांग को लेकर बुलाया गया। इसके अलावा, 15 अगस्त को मोहाली बॉर्डर पर प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के विरोध में भी यह बंद आयोजित किया गया।
पंजाब बंद में कौन-से संगठन शामिल थे?
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC), शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर), वारिस पंजाब दे, कौमी इंसाफ मोर्चा और किसान मजदूर मोर्चा सहित कई सिख धार्मिक एवं राजनीतिक संगठनों ने बंद का समर्थन किया।
जगतार सिंह हवारा कौन हैं और उनकी पैरोल की मांग क्यों हो रही है?
जगतार सिंह हवारा 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। कौमी इंसाफ मोर्चा और अन्य सिख संगठन उनके लिए पैरोल की मांग कर रहे हैं।
पंजाब बंद के दौरान स्कूल और आपातकालीन सेवाएँ प्रभावित हुईं?
सरकारी शिक्षण संस्थान सामान्य रूप से खुले रहे, हालाँकि छात्रों की उपस्थिति कम रही। आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को बंद से छूट दी गई थी और परीक्षा, शादी या अंतिम संस्कार के लिए यात्रा करने वालों को भी नहीं रोका गया।
15 अगस्त को मोहाली बॉर्डर पर क्या हुआ था?
15 अगस्त को कौमी इंसाफ मोर्चा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी राज्यपाल के आवास के बाहर विरोध दर्ज कराने के लिए चंडीगढ़ की ओर बढ़ रहे थे। सुरक्षा बलों ने उन्हें रोकने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया, जिसके बाद बंद का आह्वान किया गया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले