सिख कैदियों की रिहाई की मांग: पंजाब बंद का आह्वान, दोपहर 2 बजे तक बाज़ार-संस्थान बंद
सारांश
मुख्य बातें
सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC), शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर), वारिस पंजाब दे, कौमी इंसाफ मोर्चा और किसान संगठनों सहित कई सिख धार्मिक एवं राजनीतिक संगठनों ने शुक्रवार, 21 अगस्त को पंजाब में राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया। बंद दोपहर 2 बजे तक प्रभावी रहा और पूरे राज्य में भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए।
बंद की पृष्ठभूमि
यह बंद 15 अगस्त को मोहाली बॉर्डर पर हुई उस घटना के बाद बुलाया गया, जब सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया था। ये प्रदर्शनकारी राज्यपाल के आवास के बाहर विरोध दर्ज कराने के लिए चंडीगढ़ की ओर बढ़ रहे थे।
कौमी इंसाफ मोर्चा के नेतृत्व में निकाले गए इस मार्च की एक प्रमुख मांग जगतार सिंह हवारा के लिए पैरोल भी थी। हवारा 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। संगठनों का कहना है कि कई सिख कैदी अपनी सजा पूरी करने के बावजूद अब भी जेलों में बंद हैं।
बंद का असर और सुरक्षा व्यवस्था
सुबह के समय बंद का असर आंशिक रहा, हालाँकि कई शहरों और कस्बों में बाज़ार, फैक्ट्रियाँ और व्यावसायिक संस्थान दोपहर 2 बजे तक बंद रहे। कई निजी बस ऑपरेटरों ने बंद का समर्थन किया और अनेक निजी शिक्षण संस्थानों ने एहतियातन अपने दरवाज़े बंद रखे।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, बंद के दौरान हिंसा की कोई घटना सामने नहीं आई। पटियाला के खांडा चौक सहित राज्य के संवेदनशील स्थानों पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। पटियाला सिटी के एसपी मोहित अग्रवाल ने बताया कि पुलिस ने संबंधित संगठनों से बातचीत की और परिवहन व्यवस्था पर सहमति बनाई।
किसे मिली छूट, कहाँ रहे खुले
बंद के आयोजकों ने परीक्षा, शादी, अंतिम संस्कार या विदेश यात्रा के लिए जाने वाले छात्रों और नागरिकों को छूट दी। आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में बाधा न डालने का आग्रह भी किया गया। फाजिल्का जिले के अबोहर में सरकारी स्कूल खुले रहे और सामान्य रूप से संचालित हुए। सरकारी शिक्षण संस्थान भी कार्यरत रहे, हालाँकि छात्रों की उपस्थिति कम दर्ज की गई।
संगठनों की प्रतिक्रिया
SGPC ने एकजुटता दिखाने के लिए अपने कार्यालय और संस्थान बंद रखे तथा अपनी निर्धारित कार्यकारी बैठक भी स्थगित कर दी। किसान मजदूर मोर्चा के समन्वयक सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि बंद की सात घंटे की अवधि के दौरान बाज़ार और संस्थान बंद रहेंगे।
वारिस पंजाब दे के समर्थक विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने सवाल उठाया, 'सजा पूरी होने के बावजूद सिखों को जेल में क्यों रखा जा रहा है? उन्हें रिहा किया जाना चाहिए।' एसपी मोहित अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि बंद स्वैच्छिक है और जो इसमें भाग नहीं लेना चाहते, उन्हें यात्रा या कामकाज से नहीं रोका जाएगा।
आगे क्या
बंद आयोजकों ने रेल पटरियों, हाईवे और टोल संग्रह केंद्रों पर धरने का आह्वान किया था और कौमी इंसाफ मोर्चा के कार्यकर्ता राज्य एवं राष्ट्रीय राजमार्गों पर तैनात रहे। सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर संगठनों का आंदोलन जारी रहने की संभावना है, और यह देखना होगा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।