पंजाब बंद का व्यापक असर: अमृतसर के बाजार बंद, मोहाली में सड़कें जाम; 'बंदी सिखों' की रिहाई की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कौमी इंसाफ मोर्चा और सिख धार्मिक व राजनीतिक संगठनों के आह्वान पर 21 अगस्त 2026 को बुलाए गए पंजाब बंद का असर राज्यभर में स्पष्ट रूप से दिखा — अमृतसर के प्रमुख बाजार पूरी तरह बंद रहे और सड़कों पर आवाजाही सामान्य से काफी कम रही। यह बंद दोपहर 2 बजे तक प्रभावी रहा। किसान संगठनों, मजदूर यूनियनों, सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं और अनेक राजनीतिक दलों ने बंद को अपना समर्थन दिया।
बंद का मकसद और पृष्ठभूमि
इस बंद की प्रमुख मांगों में 'बंदी सिखों' की रिहाई के साथ-साथ जगतार सिंह हवारा को पैरोल दिए जाने की माँग भी शामिल थी। हवारा 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या से जुड़े मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। कौमी इंसाफ मोर्चा के अनुसार, संगठन लगभग साढ़े तीन वर्षों से बंदी सिखों की रिहाई के लिए निरंतर प्रदर्शन कर रहा है।
अमृतसर में स्थिति
हवारा कमिटी के अध्यक्ष बरजिंदर सिंह ने कहा, 'आज का पंजाब बंद पूरी तरह सफल रहा है। हम अभी अमृतसर के मुख्य बाजार, हॉल बाजार में खड़े हैं। पूरा बाजार बंद है। सभी शिक्षण संस्थान, यूनिवर्सिटी और कॉलेज बंद हैं। बैंक, कोर्ट और अन्य संस्थान भी बंद हैं।' अमृतसर एडीसीपी गुरदेव सिंह सहोटा ने बताया कि सुबह से ही बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए और पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर तीन जोन में सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मेडिकल और अन्य आपातकालीन सेवाएँ सामान्य रूप से चालू रहीं।
मोहाली और अन्य जिलों में जाम
मोहाली में कौमी इंसाफ मोर्चा के सदस्यों ने एयरपोर्ट-केएफसी रोड, रोपड़-मोहाली रोड और अन्य प्रमुख मार्गों पर ट्रक खड़े कर यातायात अवरुद्ध कर दिया, जिससे मोहाली एयरपोर्ट रोड और सनी एन्क्लेव चौक पर भारी जाम लगा। मानसा जिले के अकालिया गाँव में बरनाला-मानसा रोड पर भी जाम लगाने की खबर रही। अबोहर में सिख और किसान संगठनों के सदस्यों ने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद रखने की अपील की।
प्रदर्शनकारियों का पक्ष
कौमी इंसाफ मोर्चा के सदस्य सरबजीत सिंह ने कहा, 'मोर्चे के आह्वान पर आज पंजाब पूरी तरह बंद है। इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर बाकी सब कुछ बंद रहेगा। यह बंद पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। हालांकि, कभी-कभी हमें कुछ कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।' यह बंद उस लंबे आंदोलन की कड़ी है जो दशकों पुराने कैद मामलों में न्याय की माँग को लेकर चला आ रहा है।
आगे की स्थिति
बंद दोपहर 2 बजे तक निर्धारित था और प्रशासन ने शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने को प्राथमिकता दी। सुरक्षाबलों की व्यापक तैनाती के बावजूद किसी बड़ी हिंसक घटना की सूचना नहीं मिली। संगठनों की माँगों पर सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने आनी बाकी है।