झारखंड बंद का मिला-जुला असर: पलामू, गिरिडीह, बोकारो में सड़क जाम, रांची में बाजार खुले रहे
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड आंदोलनकारियों की पेंशन, आश्रितों को नौकरी और आंदोलनकारी चिह्नीकरण के लिए जेल जाने की शर्त समाप्त करने की माँग को लेकर बुलाए गए झारखंड बंद का 30 सितंबर 2026 (बुधवार) को राज्य में मिला-जुला असर देखने को मिला। पलामू, गिरिडीह और बोकारो समेत कई जिलों में आंदोलनकारियों ने प्रमुख सड़कों और चौराहों पर प्रदर्शन कर यातायात बाधित किया, जबकि राजधानी रांची समेत अधिकांश शहरों में बाजार और स्थानीय परिवहन सामान्य रूप से संचालित होते रहे।
मुख्य प्रभावित क्षेत्र
पलामू जिले के मेदिनीनगर में बंद का सबसे व्यापक असर देखा गया। आंदोलनकारी तीर-धनुष और पारंपरिक हथियारों के साथ सड़क पर उतरे तथा रेड़मा चौक को जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर और कुछ देर के लिए लेटकर भी विरोध जताया, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और स्कूली बच्चों, राहगीरों तथा लंबी दूरी के यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
गिरिडीह में आंदोलनकारियों ने पपरवाटाड़ स्थित पुराने टोल प्लाजा के पास गिरिडीह-डुमरी मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठकर नारेबाजी करते रहे। बाद में पुलिस ने बातचीत के जरिए जाम हटवाया। बोकारो के चास स्थित आईटीआई मोड़ पर भी प्रदर्शन हुआ, जिससे कुछ समय के लिए स्थानीय और मालवाहक वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही।
रांची में सीमित असर, प्रशासन सतर्क
राजधानी रांची में बंद का प्रभाव अपेक्षाकृत सीमित रहा। सुबह आंदोलनकारियों ने अलबर्ट एक्का चौक के पास कुछ समय के लिए यातायात बाधित किया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के पहुँचने तथा बातचीत के बाद जाम हटा लिया गया। इसके बाद आंदोलनकारी पास स्थित सीपीआई कार्यालय परिसर में धरने पर बैठ गए। शहर के अधिकांश बाजार खुले रहे और ऑटो व बसों का परिचालन भी सामान्य रूप से जारी रहा।
अन्य जिलों में आंशिक प्रभाव
चतरा और गढ़वा में बसों तथा बड़े व्यावसायिक वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की सूचना मिली। रामगढ़ और धनबाद के कुछ इलाकों में आंदोलनकारियों ने दुकानदारों से बंद का समर्थन करने की अपील की, जिससे कुछ स्थानों पर स्थानीय आवागमन भी प्रभावित हुआ। लंबी दूरी की बस सेवाओं पर अधिक असर पड़ा — जमशेदपुर, रांची, धनबाद और हजारीबाग से बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा तथा राज्य के विभिन्न जिलों के लिए चलने वाली कुछ बस सेवाएँ सुरक्षा कारणों से प्रभावित रहीं। हालाँकि, राज्य के प्रमुख रेल मार्गों पर ट्रेन परिचालन सामान्य रहा।
आंदोलनकारियों की माँगें और आगे की चेतावनी
मोर्चे के नेता पुष्कर महतो और पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि झारखंड गठन के 26 वर्ष बाद भी आंदोलनकारियों की कई माँगें लंबित हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि माँगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ, तो 15 नवंबर 2026, यानी झारखंड स्थापना दिवस से राज्यभर में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार पर विभिन्न आंदोलनकारी समूहों की पुरानी माँगों को लेकर दबाव पहले से ही बना हुआ है।
गौरतलब है कि झारखंड राज्य आंदोलन में भाग लेने वाले लोगों को मान्यता, पेंशन और रोजगार दिलाने की माँग दशकों पुरानी है। आने वाले हफ्तों में इस मुद्दे पर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया निर्णायक होगी।