रांची-टाटा NH-33 जाम: ऑबर्न डिजाइन की महिला कामगारों ने वेतन व सुरक्षा की मांग पर सड़क रोकी
सारांश
मुख्य बातें
रांची के दशमफॉल थाना क्षेत्र के पांचा स्थित ऑबर्न डिजाइन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की महिला कामगारों ने 14 अक्टूबर 2026 को वाजिब वेतन, निर्धारित कार्य अवधि और कार्यस्थल सुरक्षा की मांगों को लेकर रांची-टाटा राष्ट्रीय राजमार्ग-33 को जाम कर दिया। बुधवार सुबह नौ बजे सड़क पर उतरीं इन महिलाओं के प्रदर्शन से मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और रांची व जमशेदपुर के बीच यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ।
मुख्य घटनाक्रम
ऑबर्न डिजाइन प्राइवेट लिमिटेड रेडीमेड कपड़ों के उत्पादन से जुड़ी कंपनी है। यहाँ कार्यरत महिला कामगारों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन द्वारा श्रम विभाग के नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। कामगारों के अनुसार, वेतन, कार्य के घंटों और कार्यस्थल सुरक्षा से जुड़ी शिकायतें बार-बार उठाने के बावजूद प्रबंधन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।
प्रदर्शनकारियों का यह भी आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें प्रबंधन की ओर से कार्रवाई की धमकी दी जाती रही है। इससे नाराज महिलाओं ने पांचा के निकट मुख्य मार्ग पर बैठकर प्रदर्शन किया और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।
यातायात पर असर
राष्ट्रीय राजमार्ग-33 पर जाम लगने से रांची और जमशेदपुर के बीच आवागमन ठप हो गया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतारें लगने से यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुँचने में काफी देरी हुई। स्थानीय निवासियों और लंबी दूरी के वाहन चालकों, दोनों को इस व्यवधान का सामना करना पड़ा।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
जाम की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुँची। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी महिलाओं से बातचीत कर उन्हें सड़क से हटाने का प्रयास किया। प्रशासन की कोशिश यातायात बहाल कराने के साथ-साथ शिकायतों के समाधान की भी रही, परंतु खबर लिखे जाने तक महिलाएं अपनी मांगों पर अड़ी रहीं।
कंपनी का पक्ष और आगे की स्थिति
रिपोर्ट तैयार होने तक ऑबर्न डिजाइन प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। कंपनी और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत जारी थी और राजमार्ग-33 पर यातायात सामान्य नहीं हो सका था। महिला कामगारों ने स्पष्ट किया है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
गौरतलब है कि झारखंड के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रम अधिकारों को लेकर कामगारों की शिकायतें नई नहीं हैं। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब असंगठित क्षेत्र की महिला मज़दूरों के अधिकारों को लेकर राज्य स्तर पर बहस तेज है। प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के बीच बातचीत के नतीजे पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं।