बरनाला लाठीचार्ज के विरोध में पंजाब के 25 हज़ार सफाई कर्मचारी हड़ताल पर, शहरों में कचरा संकट गहराया
सारांश
मुख्य बातें
बरनाला में पुलिस के लाठीचार्ज के विरोध में पंजाब नगर पालिका कर्मचारी संगठन ने 24 जुलाई को अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया। संगठन के अनुसार पंजाब की 166 नगर काउंसिलों, नगर पंचायतों और नगर निगमों के लगभग 25 हज़ार सफाई कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल हो चुके हैं, जिससे राज्यभर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है।
मुख्य घटनाक्रम
संगठन के पंजाब अध्यक्ष गोपाल थापर ने पुलिस प्रशासन की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि जब तक कर्मचारियों की माँगें पूरी नहीं होतीं, हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने दावा किया कि पंजाब में पहले कभी सफाई कर्मचारियों पर लाठीचार्ज नहीं हुआ था, और यह घटना अभूतपूर्व है।
हड़ताल शुरू होते ही शहरों में कचरा उठाने का काम बंद हो गया है। जगह-जगह गंदगी के ढेर लगने की खबरें आ रही हैं, जिससे आम नागरिकों की परेशानियाँ बढ़ना तय माना जा रहा है।
कर्मचारियों की माँगें
संगठन ने पंजाब सरकार के सामने कई ठोस माँगें रखी हैं। गोपाल थापर के अनुसार, बरनाला घटना के लिए जिम्मेदार एसएचओ, डीएसपी और एसएसपी को तत्काल निलंबित किया जाए। इसके अलावा दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाए। संगठन ने यह भी माँग की है कि संबंधित पुलिसकर्मियों पर इरादा कत्ल और महिलाओं से छेड़छाड़ के गंभीर आरोपों के तहत प्राथमिकी दर्ज हो।
सरकार की प्रतिक्रिया
संगठन के अध्यक्ष गोपाल थापर ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर चुप है। उन्होंने कहा, अरविंद केजरीवाल दिल्ली में मगरमच्छ के आँसू बहा रहे हैं और पंजाब में अत्याचार हो रहा है।' थापर ने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब सरकार केजरीवाल के निर्देशों पर काम कर रही है। पंजाब सरकार की ओर से इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
आम जनता पर असर
पंजाब के शहरी इलाकों में सफाई कर्मचारियों की अनुपस्थिति से कचरा संकट तेज़ी से गहरा रहा है। 166 नगरीय निकायों में कामकाज ठप होने से स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ सकते हैं, खासकर मानसून के मौसम में जब संक्रामक बीमारियों का जोखिम पहले से अधिक होता है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में स्वच्छता अभियानों को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
क्या होगा आगे
गोपाल थापर ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की, तो संघर्ष को और तेज़ किया जाएगा। संगठन के अनुसार हड़ताल अनिश्चितकालीन है और माँगें पूरी होने तक जारी रहेगी। पंजाब सरकार पर अब दोहरा दबाव है — एक तरफ कर्मचारियों की न्यायिक माँगें, दूसरी तरफ शहरों में बढ़ता कचरा संकट।