31 जुलाई 2026
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पटना में हजारों टन कचरे का अंबार, PMC कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से सफाई व्यवस्था ठप

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पटना में हजारों टन कचरे का अंबार, PMC कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से सफाई व्यवस्था ठप

सारांश

पटना की सड़कें कचरे से पट गई हैं — PMC के 8,000 कर्मचारी हड़ताल पर हैं, रोज़ाना 1,200 टन कचरा उठाना बंद है, और मानसून के बीच डेंगू-मलेरिया का खतरा मंडरा रहा है। 28 जुलाई की सरकारी वार्ता बेनतीजा रही; अब हर बीतता दिन स्वास्थ्य संकट को गहरा कर रहा है।

मुख्य बातें

पटना नगर निगम (PMC) के लगभग 8,000 कर्मचारी 30 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।
सफाई ठप होने से किदवईपुरी, इंद्रपुरी, मीठापुर, राजीव नगर समेत कई इलाकों में हजारों टन कचरा जमा हो गया है।
सामान्य दिनों में पटना से प्रतिदिन 1,200 टन कचरा उठाया जाता है — अभी यह पूरी तरह बंद है।
PMCH के सुपरिटेंडेंट डॉ.
राजीव कुमार सिंह ने मानसून में डेंगू और मलेरिया फैलने की चेतावनी दी है।
कर्मचारियों की माँगें: दिहाड़ी कर्मचारियों का नियमितीकरण, आउटसोर्सिंग खत्म करना, और ACP/MACP लाभ बहाल करना।
28 जुलाई को शहरी विकास मंत्री से वार्ता विफल रही; हड़ताल जारी है।

पटना नगर निगम (PMC) के लगभग 8,000 स्थायी, दिहाड़ी और आउटसोर्स कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने 31 जुलाई को राजधानी पटना की सफाई व्यवस्था को पूरी तरह चरमरा दिया है। घर-घर कचरा संग्रह और सड़कों की दैनिक सफाई ठप होने से शहर के प्रमुख मार्गों पर हजारों टन कचरा जमा हो गया है, और मानसून के बीच सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएँ उठने लगी हैं।

मुख्य घटनाक्रम

यह हड़ताल 30 जुलाई को राज्यव्यापी आंदोलन के तहत शुरू हुई। शुक्रवार सुबह काम बंद होते ही सड़कों पर कचरे के ढेर लगने लगे। प्रभावित इलाकों में किदवईपुरी का कवि रमन पथ, इंद्रपुरी में अटल पथ की सर्विस लेन, नवीन किशोर सिन्हा पथ, मीठापुर मेन रोड और राजीव नगर मेन रोड शामिल हैं। हार्डिंग रोड पर नगर निगम की कचरा उठाने वाली गाड़ियाँ खड़ी देखी गईं।

गौरतलब है कि सामान्य परिस्थितियों में पटना से प्रतिदिन लगभग 1,200 टन कचरा एकत्र किया जाता है, जिसमें करीब 60 प्रतिशत गीला और 40 प्रतिशत सूखा कचरा होता है। हड़ताल के हर दिन के साथ यह बोझ सड़कों पर बढ़ता जा रहा है।

आम जनता पर असर

मानसून के मौसम में कचरे का जमाव विशेष रूप से खतरनाक है। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) के सुपरिटेंडेंट डॉ. राजीव कुमार सिंह ने चेतावनी दी है कि बारिश के बीच सड़कों पर पड़े कचरे से मच्छरों और मक्खियों का पनपना बढ़ सकता है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाएगा। निवासियों ने दुर्गंध और जलभराव की शिकायतें भी दर्ज कराई हैं।

कर्मचारियों की माँगें

नगर निगम कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं। पहली, दिहाड़ी कर्मचारियों को नियमित किया जाए। दूसरी, आउटसोर्सिंग प्रणाली समाप्त की जाए और आउटसोर्स कर्मचारियों को नगर निगम में सम्मिलित किया जाए। तीसरी, ACP (असिस्टेंट सिटी प्लानर) और MACP (मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) के लाभ बहाल किए जाएँ।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

यह विवाद अचानक नहीं उभरा। 23 जून को सफाई कर्मचारियों ने वेतन भुगतान में देरी के विरोध में पहला प्रदर्शन किया था। इसके बाद 30 जून से 25 जुलाई के बीच चरणबद्ध धरने और विरोध प्रदर्शन आयोजित हुए। 28 जुलाई को शहरी विकास और आवास मंत्री के साथ हुई वार्ता बेनतीजा रही, और 29 जुलाई को मशाल जुलूस निकाला गया — जिसके अगले दिन अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया गया।

क्या होगा आगे

फिलहाल हड़ताल जारी है और प्रशासन की ओर से कोई नई वार्ता की तारीख सामने नहीं आई है। यदि अगले कुछ दिनों में समझौता नहीं होता, तो कचरे का अंबार सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल में बदल सकता है। पटना के निवासियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की नज़रें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नगर निकायों में दशकों से चली आ रही अनुबंध-आधारित कार्यबल नीति की विफलता का प्रतीक है। जब वेतन भुगतान में देरी और नियमितीकरण की माँगें एक महीने की चरणबद्ध कार्रवाई के बाद भी अनसुनी रहें, तो अनिश्चितकालीन हड़ताल अपरिहार्य हो जाती है। विडंबना यह है कि मानसून के सबसे संवेदनशील हफ्तों में यह संकट चरम पर पहुँचा है, जब डेंगू और मलेरिया का जोखिम वैसे भी सर्वाधिक होता है। 28 जुलाई की बेनतीजा वार्ता यह भी दर्शाती है कि प्रशासन ने इस आंदोलन की गंभीरता को समय रहते नहीं भाँपा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पटना नगर निगम कर्मचारियों की हड़ताल क्यों हो रही है?
नगर निगम कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति ने तीन माँगें रखी हैं — दिहाड़ी कर्मचारियों का नियमितीकरण, आउटसोर्सिंग प्रणाली की समाप्ति, और ACP/MACP लाभों की बहाली। वेतन भुगतान में देरी को लेकर 23 जून से शुरू हुए विरोध के बाद 28 जुलाई की मंत्री-स्तरीय वार्ता विफल रहने पर 30 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हुई।
पटना में हड़ताल से सफाई व्यवस्था पर क्या असर पड़ा है?
घर-घर कचरा संग्रह और सड़कों की दैनिक सफाई पूरी तरह बंद हो गई है। सामान्य दिनों में प्रतिदिन 1,200 टन कचरा उठाया जाता है, जो अब सड़कों पर जमा हो रहा है। किदवईपुरी, इंद्रपुरी, मीठापुर और राजीव नगर जैसे इलाके सबसे अधिक प्रभावित हैं।
पटना में कचरे के जमाव से स्वास्थ्य को क्या खतरा है?
PMCH के सुपरिटेंडेंट डॉ. राजीव कुमार सिंह ने चेतावनी दी है कि मानसून के दौरान सड़कों पर जमा कचरे से मच्छरों और मक्खियों की संख्या बढ़ेगी, जिससे डेंगू और मलेरिया फैलने का जोखिम बढ़ जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब बारिश के कारण जलभराव पहले से ही एक समस्या है।
PMC हड़ताल में कितने कर्मचारी शामिल हैं?
इस हड़ताल में पटना नगर निगम के लगभग 8,000 स्थायी, दिहाड़ी और आउटसोर्स कर्मचारी शामिल हैं। यह राज्यव्यापी आंदोलन का हिस्सा है जो 30 जुलाई से शुरू हुआ।
पटना में सफाई हड़ताल कब तक चलेगी?
हड़ताल अनिश्चितकालीन घोषित की गई है और फिलहाल जारी है। 28 जुलाई को शहरी विकास मंत्री के साथ वार्ता बेनतीजा रही थी। नई वार्ता की कोई तारीख अभी तक सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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