हरियाणा सफाई कर्मचारी हड़ताल: हिसार में 50-60 कर्मचारी हिरासत में, 30 अगस्त तक बढ़ी हड़ताल
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल 22वें दिन भी जारी रही और मांगों का समाधान न होने पर कर्मचारी संगठनों ने इसे 30 अगस्त तक बढ़ाने का फैसला किया है। हिसार सहित हांसी, जींद, सिरसा, यमुनानगर और झज्जर जैसे कई जिलों में सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित है और शहरों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं।
हिसार में टकराव, 50-60 कर्मचारी हिरासत में
हिसार में 27 अगस्त की सुबह प्रशासनिक टीम जब कचरा उठाने पहुँची तो हड़ताली कर्मचारियों ने घर-घर जाकर कचरा एकत्र करने और वाहनों से कचरा उठाने का विरोध किया। सुबह करीब 7:30 बजे पुलिस बल मौके पर पहुँचा और कर्मचारियों को गाड़ियाँ न रोकने की चेतावनी दी गई। विरोध जारी रहने पर पुलिस ने करीब 50 से 60 कर्मचारियों को बसों में शांतिपूर्वक हिरासत में ले लिया।
हिसार के डीएसपी किशोरी लाल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पुलिस का उद्देश्य हालात बिगाड़ना नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए जनता के लिए सफाई व्यवस्था बहाल करना है।
अन्य जिलों में भी गतिरोध
हांसी में कूड़ा उठाने पहुँची पुलिस और सफाई कर्मचारियों के बीच कई बार आमना-सामना हुआ। जींद, सिरसा और यमुनानगर में भी कर्मचारियों ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कचरा उठाने का विरोध किया। झज्जर में प्रशासन ने रातभर अभियान चलाकर करीब 125 टन कचरा उठवाया, जहाँ भगत सिंह चौक पर सबसे अधिक तनाव देखा गया और कुछ कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया।
यूनियन नेताओं का समर्थन
हरियाणा म्युनिसिपल एम्प्लॉइज यूनियन के पूर्व अध्यक्ष राजेश बागरी और फायर एम्प्लॉइज यूनियन के जिला अध्यक्ष राजेश मेहला ने हड़ताली कर्मचारियों के प्रति एकजुटता जताई। यह ऐसे समय में आया है जब प्रशासन और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत का कोई ठोस परिणाम अभी तक सामने नहीं आया है।
आम जनता पर असर
22 दिनों से जारी इस हड़ताल ने प्रदेश के कई शहरों में स्वच्छता व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। गौरतलब है कि लंबे समय तक कचरा न उठाए जाने से सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी खतरा बढ़ता जा रहा है। प्रशासन की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए कचरा हटाने का अभियान जारी है, लेकिन यह पूर्ण सफाई व्यवस्था की भरपाई नहीं कर पा रहा।
आगे क्या होगा
कर्मचारियों की मांगों के समाधान और हड़ताल समाप्त करने को लेकर अब सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर सबकी नज़र है। 30 अगस्त की समयसीमा नज़दीक आने के साथ दोनों पक्षों के बीच गतिरोध टूटता है या नहीं, यह देखना अहम होगा।