बरनाला लाठीचार्ज: पंजाब भाजपा ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, DSP-SHO को बर्खास्त करने की मांग
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने 27 जुलाई को चंडीगढ़ में राज्यपाल से मुलाकात कर बरनाला में सफाई कर्मचारियों पर हुई पुलिस लाठीचार्ज के मामले में न्याय की मांग करते हुए एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सेंट्रल वाल्मीकि सभा इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पंजाब सफाई कर्मचारी आयोग के पूर्व चेयरमैन गेज्जा राम वाल्मीकि ने किया।
मुख्य घटनाक्रम
22 जुलाई को बरनाला शहर में सफाई कर्मचारी अपनी जायज माँगों को लेकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। ज्ञापन के अनुसार, इस दौरान डीएसपी सतवीर सिंह बैंस और स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) लखविंदर सिंह ने कथित तौर पर बिना किसी उकसावे के प्रदर्शनकारियों पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया। भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने इस घटना को सरकारी पद का खुला दुरुपयोग बताया।
भाजपा की प्रमुख माँगें
ज्ञापन में राज्यपाल से हस्तक्षेप करते हुए कई ठोस कार्रवाइयाँ सुनिश्चित करने की माँग की गई। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि डीएसपी बैंस का निलंबन पर्याप्त नहीं है और दोनों अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किया जाना चाहिए।
इसके अतिरिक्त, पीड़ित सफाई कर्मचारियों की मेडिको-लीगल रिपोर्ट (एमएलआर) के आधार पर और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दोनों अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज करने की भी माँग की गई। साथ ही, सफाई कर्मचारियों की दीर्घकालिक लंबित माँगों पर बिना देरी के विचार करने का आग्रह किया गया।
राष्ट्रीय आयोग और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया
इस घटना पर नेशनल कमीशन फॉर सफाई कर्मचारी (एनसीएसके) के वाइस-चेयरपर्सन हरदीप सिंह गिल ने स्वतः संज्ञान लिया और पंजाब के मुख्य सचिव को सात दिनों के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। गिल ने अपने संदेश में कहा कि सफाई कर्मचारियों के अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा की रक्षा करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है और इस कथित उल्लंघन की गहन जाँच होनी चाहिए।
आयोग के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने डीएसपी बैंस को निलंबित कर दिया। हालाँकि, भाजपा और अन्य संगठनों का कहना है कि निलंबन से न्याय नहीं होगा।
व्यापक विरोध और समर्थन
लाठीचार्ज के बाद बीकेयू (एकता उग्राहन) सहित कई किसान और श्रमिक संगठनों ने पुलिस के बल प्रयोग की कड़ी निंदा की और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की माँग की। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में सफाई कर्मचारियों के सेवा-संबंधी मुद्दे लंबे समय से अनसुलझे हैं।
आगे क्या होगा
राज्यपाल को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब सभी की निगाहें राजभवन की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई है कि संवैधानिक अधिकारी जवाबदेही और पीड़ित कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए शीघ्र कदम उठाएँगे। एनसीएसके की रिपोर्ट की समयसीमा भी निकट है, जो इस मामले में अगला निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।