झारखंड हाई कोर्ट का कस्टोडियल टॉर्चर पर कड़ा रुख, सरायकेला एसपी और स्वास्थ्य सचिव से माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड हाई कोर्ट ने सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ थाने में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता तरुण महतो की पुलिस हिरासत में कथित बर्बर पिटाई के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए प्रधान स्वास्थ्य सचिव और सरायकेला एसपी से जवाब तलब किया है। 5 मई 2026 को हुई इस सुनवाई में अदालत ने स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज जनहित याचिका पर सख्त टिप्पणियाँ कीं और 18 जून तक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। आरोप है कि 19 नवंबर 2025 की रात ईचागढ़ पुलिस ने तरुण महतो को हिरासत में लेकर उन्हें 'थर्ड डिग्री टॉर्चर' दिया। तरुण महतो के शरीर पर जख्म के निशान होने के बावजूद एक चिकित्सा अधिकारी ने उन्हें अदालत में पेश करने से पहले 'फिट फॉर कस्टडी' का प्रमाण-पत्र दे दिया।
तरुण महतो की पत्नी ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई थी, जिसे अदालत ने जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए स्वतः संज्ञान लिया। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता रितेश कुमार महतो ने पक्ष रखा।
अदालत की तीखी टिप्पणी
अदालत ने प्रधान स्वास्थ्य सचिव से पूछा कि जब पीड़ित के शरीर पर चोट के निशान स्पष्ट थे, तब संबंधित मेडिकल ऑफिसर ने किस आधार पर उन्हें 'फिट' घोषित किया और कथित तौर पर झूठी रिपोर्ट तैयार की। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि उस चिकित्सा अधिकारी के विरुद्ध अब तक क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
गौरतलब है कि पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने सरायकेला एसपी को व्यक्तिगत रूप से दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का आदेश भी दिया था, जो इस मामले की गंभीरता को रेखांकित करता है।
सीसीटीवी और मुआवजे पर निर्देश
अदालत ने सरायकेला एसपी को जिले के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रगति पर 18 जून 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को सूचित किया गया कि पीड़ित तरुण महतो को अंतरिम राहत के रूप में ₹1,50,000 का मुआवजा प्रदान किया जा चुका है।
तरुण महतो कौन हैं
तरुण महतो झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता हैं और वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में ईचागढ़ सीट से जेएलकेएम के प्रत्याशी रह चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पुलिस हिरासत में प्रताड़ना के मामलों पर देशभर में न्यायपालिका की निगरानी बढ़ रही है।
आगे क्या होगा
इस मामले की अगली सुनवाई 18 जून 2026 को निर्धारित है, जब सरायकेला एसपी और प्रधान स्वास्थ्य सचिव को अपने जवाब प्रस्तुत करने होंगे। अदालत के इस कदम से झारखंड में पुलिस थानों की जवाबदेही और हिरासत में मानवाधिकारों की सुरक्षा पर व्यापक बहस छिड़ने की संभावना है।