पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल बोले — गड़बड़ी मिली तो होगा पुनर्मतदान, आयोग की जीरो टॉलरेंस नीति लागू

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पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल बोले — गड़बड़ी मिली तो होगा पुनर्मतदान, आयोग की जीरो टॉलरेंस नीति लागू

सारांश

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के दूसरे चरण में आयोग की सख्ती साफ़ दिखी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने पुनर्मतदान की चेतावनी देते हुए जीरो टॉलरेंस का संदेश दिया — एक राज्य में जहाँ चुनावी हिंसा की छाया हमेशा मंडराती रही है।

Key Takeaways

  • पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण में 142 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान हुआ।
  • मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने जीरो टॉलरेंस नीति की पुष्टि की।
  • गड़बड़ी की पुष्टि पर पुनर्मतदान का निर्णय लिया जा सकता है।
  • मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती।
  • कानून तोड़ने पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत जेल तक की सज़ा संभव।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण में 142 विधानसभा सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान जारी रहा। इसी बीच कोलकाता में मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने पत्रकारों से बात करते हुए स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है और जहाँ भी गड़बड़ी की पुष्टि होगी, वहाँ पुनर्मतदान कराया जा सकता है। प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और किसी भी अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम

मतदान के दौरान एक स्थान पर भीड़ जमा होने की घटना सामने आई। मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए क्विक रिस्पॉन्स टीम को तुरंत मौके पर भेजा गया। कोलकाता पुलिस और केंद्रीय बल भी शीघ्र पहुँचे और स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदान के दिन इस प्रकार की घटनाएँ स्वीकार्य नहीं हैं और ऐसी किसी भी स्थिति से सख्ती से निपटा जाएगा।

सुरक्षा व्यवस्था और कानूनी प्रावधान

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि तय मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार, मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में सुरक्षा की ज़िम्मेदारी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की होती है। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और मतदान कर्मियों की सुरक्षा भी इन्हीं बलों के अधीन है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी व्यक्ति की पहचान कानून उल्लंघन करने वाले के रूप में होती है, तो उसके विरुद्ध जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जेल की सज़ा भी शामिल हो सकती है।

पुनर्मतदान की चेतावनी

अग्रवाल ने कहा कि आयोग हर शिकायत को गंभीरता से ले रहा है। जहाँ भी गड़बड़ी की पुष्टि होगी — चाहे वह वेबकास्टिंग, ज़मीनी रिपोर्ट या पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के ज़रिए सामने आए — वहाँ पुनर्मतदान कराने का निर्णय लिया जा सकता है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पश्चिम बंगाल के चुनावों में हिंसा और बूथ कैप्चरिंग की शिकायतें ऐतिहासिक रूप से उठती रही हैं।

मतदान की गोपनीयता पर स्पष्टीकरण

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतदान की गोपनीयता को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वोटिंग कक्ष के अंदर किसी प्रकार का कैमरा या सीसीटीवी नहीं होता। कैमरे केवल यह रिकॉर्ड करते हैं कि मतदाता कक्ष में प्रवेश कर रहा है और बाहर आ रहा है, परंतु वोट किसे दिया गया, यह पूरी तरह गोपनीय रहता है।

उन्होंने कहा,

Point of View

लेकिन ज़मीनी हकीकत अक्सर अलग रहती है। मनोज अग्रवाल का पुनर्मतदान का संदेश तभी विश्वसनीय होगा जब वास्तव में किसी बूथ पर यह कदम उठाया जाए — न कि केवल प्रेस वार्ता तक सीमित रहे। गौरतलब है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में भी आयोग ने ऐसी ही भाषा इस्तेमाल की थी, फिर भी हिंसा की व्यापक शिकायतें दर्ज हुईं। असली परीक्षा यह है कि वेबकास्टिंग और पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर आधारित कार्रवाई कितनी त्वरित और पारदर्शी होती है।
NationPress
29/04/2026

Frequently Asked Questions

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के दूसरे चरण में कितनी सीटों पर मतदान हुआ?
दूसरे चरण में 142 विधानसभा सीटों पर 29 अप्रैल 2026 को मतदान हुआ। यह चुनाव का एक महत्वपूर्ण चरण है जिसमें राज्य की बड़ी संख्या में सीटें शामिल हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने पुनर्मतदान के बारे में क्या कहा?
अग्रवाल ने कहा कि जहाँ भी गड़बड़ी की पुष्टि होगी — वेबकास्टिंग, ज़मीनी रिपोर्ट या पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर — वहाँ पुनर्मतदान कराने का निर्णय लिया जा सकता है। आयोग हर शिकायत को गंभीरता से ले रहा है।
मतदान केंद्र पर सुरक्षा की ज़िम्मेदारी किसकी है?
मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में सुरक्षा की ज़िम्मेदारी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की होती है। EVM और मतदान कर्मियों की सुरक्षा भी इन्हीं बलों के अधीन है।
क्या वोटिंग बूथ के अंदर कैमरे लगे होते हैं?
नहीं, वोटिंग कक्ष के अंदर कोई कैमरा या सीसीटीवी नहीं होता। कैमरे केवल मतदाता के कक्ष में प्रवेश और बाहर आने को रिकॉर्ड करते हैं, जबकि वोट किसे दिया गया यह पूरी तरह गोपनीय रहता है।
चुनाव में बाधा डालने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
जो भी व्यक्ति चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालेगा या कानून तोड़ेगा, उसके विरुद्ध जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जेल की सज़ा भी शामिल हो सकती है।
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