गुजरात में जनगणना 2027 का पहला चरण 1 जून से शुरू, 3.74 लाख नागरिकों ने पूरी की स्व-गणना
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात में जनगणना 2027 का पहला चरण 1 जून 2026 से आधिकारिक रूप से शुरू हो रहा है। इस ऐतिहासिक अभ्यास के आरंभ से पहले ही राज्य में 3.74 लाख से अधिक नागरिक ऑनलाइन स्व-गणना प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार यह भारत का पहला पूर्णतः डिजिटल जनगणना अभ्यास है, जो देश की जनसांख्यिकीय डेटा संग्रह पद्धति में एक बड़ा बदलाव है।
जनगणना का ऐतिहासिक संदर्भ
यह देश के इतिहास में 16वीं और स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना है। गौरतलब है कि पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, यानी यह अभ्यास पूरे 16 वर्षों के अंतराल के बाद संपन्न हो रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में जाति जनगणना को लेकर राजनीतिक बहस चरम पर है, और सरकार ने इस बार जनसंख्या गणना के साथ-साथ जाति आँकड़ों का संग्रह भी शामिल किया है।
पहले चरण में क्या होगा
जनगणना निदेशक सुजल मायात्रा ने बताया कि 1 जून से 30 जून 2026 तक पहला चरण — जिसे हाउस लिस्टिंग एंड हाउसिंग सेंसस (HLO) कहा जाता है — संचालित किया जाएगा। इस दौरान जनगणनाकर्ता आवास की स्थिति, परिवार की संरचना, पीने के पानी के स्रोत, शौचालय सुविधाओं और अन्य संपत्तियों से संबंधित कुल 33 प्रश्न पूछेंगे।
यह सर्वेक्षण गुजरात के सभी जिलों, नगर निगमों, नगरपालिकाओं और ग्राम पंचायतों में एक साथ आयोजित होगा। राज्य में कुल 1,10,598 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (HLB) को कवर किया जाएगा, जिसके लिए 1,09,038 गणनाकर्ता और 18,254 पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं।
दूसरे चरण में जाति जनगणना
मायात्रा के अनुसार, दूसरा चरण — जनसंख्या गणना (PE) और जाति गणना — 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 के बीच आयोजित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया, "इस चरण के दौरान जनसंख्या गणना और जाति गणना की जाएगी, और देश भर में जाति जनगणना का कार्य भी पूरा किया जाएगा।" जनगणना अधिकारियों के अनुसार यह देशव्यापी जाति आँकड़ों के संग्रह का पहला आधिकारिक प्रयास होगा।
डिजिटल तकनीक और स्व-गणना अभियान
इस बार जनगणना में आधुनिक तकनीक की केंद्रीय भूमिका है। गुजराती सहित 16 भाषाओं में समर्पित Android और iOS एप्लिकेशन विकसित किए गए हैं, जिनमें सीमित इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों के लिए ऑफलाइन डेटा संग्रह की सुविधा भी है। एक विशेष स्व-गणना पोर्टल के माध्यम से नागरिक सीधे अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं।
17 मई 2026 को शुरू हुए स्व-गणना अभियान में राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य, मुख्य सचिव और जिला कलेक्टरों ने भाग लिया। 30 मई 2026 तक 3.74 लाख से अधिक नागरिक स्व-गणना फॉर्म भर चुके थे, जिनमें से लगभग 33 लाख आवेदन सफलतापूर्वक जमा हो चुके थे और लगभग 44,000 फॉर्म अभी प्रक्रियाधीन थे।
गोपनीयता और प्रशिक्षण
जनगणना अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के तहत एकत्र की गई सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी। जनगणनाकर्ताओं, पर्यवेक्षकों और अन्य अधिकारियों को तीन चरणों में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। यह अभ्यास भारत की जनसांख्यिकीय नीति निर्माण की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।