एनआईए कोर्ट का बड़ा फैसला: मोगा DC ऑफिस पर खालिस्तानी झंडा फहराने वाले दो दोषियों को साढ़े पाँच साल की जेल
सारांश
Key Takeaways
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत, एसएएस नगर (मोहाली), ने 1 मई 2026 को 2020 के खालिस्तानी झंडा फहराने के मामले में दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हें 5 साल 6 महीने की जेल की सज़ा सुनाई। दोनों दोषियों पर ₹16,000 का जुर्माना भी लगाया गया है।
मामला क्या है
दोषियों की पहचान मोगा निवासी इंदरजीत सिंह और जसपाल सिंह के रूप में हुई है। इन दोनों ने 14 अगस्त 2020 को — स्वतंत्रता दिवस समारोह से ठीक एक दिन पहले — मोगा के डिप्टी कमिश्नर (DC) दफ़्तर के प्रशासनिक परिसर में घुसकर इमारत की छत पर एक लोहे के खंभे पर खालिस्तान शब्द अंकित केसरिया/पीले रंग का झंडा फहराया था।
इससे भी गंभीर बात यह है कि दोनों ने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की रस्सी काटकर तिरंगे को ज़मीन पर गिराया और फिर रस्सी पकड़कर उसे जमीन पर घसीटा — जो राष्ट्रीय सम्मान का खुला अपमान था।
पन्नू की भूमिका और इनाम की घोषणा
जांच में सामने आया कि प्रतिबंधित संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) के जनरल काउंसल और घोषित आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने 10-11 अगस्त 2020 के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड कर पंजाब और हरियाणा के निवासियों से खालिस्तानी झंडे फहराने की अपील की थी। पन्नू ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि दिल्ली के लाल किले पर खालिस्तानी झंडा फहराने वाले को $1,25,000 अमेरिकी डॉलर और किसी भी सरकारी दफ़्तर पर ऐसा करने वाले को $2,500 अमेरिकी डॉलर का इनाम दिया जाएगा।
जांच के दौरान यह भी पता चला कि हरप्रीत सिंह उर्फ राणा सिंह — जो एसएफजे का सदस्य है — ने इंदरजीत और जसपाल को नकद इनाम देकर इस हरकत को अंजाम दिलवाया था।
चार्जशीट और घोषित अपराधी
एनआईए ने इंदरजीत और जसपाल के साथ-साथ दो अन्य गिरफ्तार आरोपियों और अमेरिका में रह रहे फरार आरोपी गुरपतवंत सिंह पन्नू तथा हरप्रीत सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। मोहाली की विशेष अदालत ने 2021 में पन्नू और हरप्रीत को 'घोषित अपराधी' करार दे दिया था, क्योंकि दोनों अमेरिका से फरार हैं।
किन धाराओं में सज़ा
दोनों दोषियों को भारतीय दंड संहिता (IPC), गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम [UA(P)A] और राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया है। यह सज़ा उस कड़े कानूनी ढाँचे के तहत दी गई है जो राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों और आतंकी संगठनों से जुड़े अपराधों पर लागू होता है।
आगे क्या होगा
पन्नू और हरप्रीत अभी भी अमेरिका में हैं और भारतीय कानून की पहुँच से बाहर हैं। एनआईए के सूत्रों के अनुसार, फरार आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही जारी है। यह फैसला उन मामलों में एनआईए की सफल अभियोजन क्षमता का संकेत देता है जहाँ मुख्य सूत्रधार विदेश में बैठकर उकसावे का काम करते हैं, जबकि स्थानीय स्तर पर काम करने वाले दोषियों को कानून के कठघरे में लाया जा सकता है।