26 जून 2026
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एनआईए कोर्ट का बड़ा फैसला: मोगा DC ऑफिस पर खालिस्तानी झंडा फहराने वाले दो दोषियों को साढ़े पाँच साल की जेल

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एनआईए कोर्ट का बड़ा फैसला: मोगा DC ऑफिस पर खालिस्तानी झंडा फहराने वाले दो दोषियों को साढ़े पाँच साल की जेल

सारांश

स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले मोगा के DC दफ़्तर पर खालिस्तानी झंडा फहराकर तिरंगे को घसीटने वाले दो आरोपियों को एनआईए कोर्ट ने साढ़े पाँच साल की जेल सुनाई। पन्नू के इनाम के लालच में की गई इस हरकत पर अब कानूनी मुहर लग गई है — लेकिन मुख्य साजिशकर्ता अभी भी अमेरिका में फरार हैं।

मुख्य बातें

एनआईए की विशेष अदालत, मोहाली ने 1 मई 2026 को इंदरजीत सिंह और जसपाल सिंह को दोषी करार दिया।
दोनों को 5 साल 6 महीने की जेल और ₹16,000 जुर्माने की सज़ा सुनाई गई।
14 अगस्त 2020 को मोगा DC दफ़्तर की छत पर खालिस्तानी झंडा फहराया गया और तिरंगे को जमीन पर घसीटा गया।
घोषित आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने सोशल मीडिया पर सरकारी दफ़्तरों पर झंडा फहराने के लिए $2,500 इनाम की घोषणा की थी।
पन्नू और हरप्रीत सिंह को 2021 में 'घोषित अपराधी' करार दिया जा चुका है; दोनों अमेरिका में फरार हैं।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत, एसएएस नगर (मोहाली), ने 1 मई 2026 को 2020 के खालिस्तानी झंडा फहराने के मामले में दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हें 5 साल 6 महीने की जेल की सज़ा सुनाई। दोनों दोषियों पर ₹16,000 का जुर्माना भी लगाया गया है।

मामला क्या है

दोषियों की पहचान मोगा निवासी इंदरजीत सिंह और जसपाल सिंह के रूप में हुई है। इन दोनों ने 14 अगस्त 2020 को — स्वतंत्रता दिवस समारोह से ठीक एक दिन पहले — मोगा के डिप्टी कमिश्नर (DC) दफ़्तर के प्रशासनिक परिसर में घुसकर इमारत की छत पर एक लोहे के खंभे पर खालिस्तान शब्द अंकित केसरिया/पीले रंग का झंडा फहराया था।

इससे भी गंभीर बात यह है कि दोनों ने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की रस्सी काटकर तिरंगे को ज़मीन पर गिराया और फिर रस्सी पकड़कर उसे जमीन पर घसीटा — जो राष्ट्रीय सम्मान का खुला अपमान था।

पन्नू की भूमिका और इनाम की घोषणा

जांच में सामने आया कि प्रतिबंधित संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) के जनरल काउंसल और घोषित आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने 10-11 अगस्त 2020 के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड कर पंजाब और हरियाणा के निवासियों से खालिस्तानी झंडे फहराने की अपील की थी। पन्नू ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि दिल्ली के लाल किले पर खालिस्तानी झंडा फहराने वाले को $1,25,000 अमेरिकी डॉलर और किसी भी सरकारी दफ़्तर पर ऐसा करने वाले को $2,500 अमेरिकी डॉलर का इनाम दिया जाएगा।

जांच के दौरान यह भी पता चला कि हरप्रीत सिंह उर्फ राणा सिंह — जो एसएफजे का सदस्य है — ने इंदरजीत और जसपाल को नकद इनाम देकर इस हरकत को अंजाम दिलवाया था।

चार्जशीट और घोषित अपराधी

एनआईए ने इंदरजीत और जसपाल के साथ-साथ दो अन्य गिरफ्तार आरोपियों और अमेरिका में रह रहे फरार आरोपी गुरपतवंत सिंह पन्नू तथा हरप्रीत सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। मोहाली की विशेष अदालत ने 2021 में पन्नू और हरप्रीत को 'घोषित अपराधी' करार दे दिया था, क्योंकि दोनों अमेरिका से फरार हैं।

किन धाराओं में सज़ा

दोनों दोषियों को भारतीय दंड संहिता (IPC), गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम [UA(P)A] और राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया है। यह सज़ा उस कड़े कानूनी ढाँचे के तहत दी गई है जो राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों और आतंकी संगठनों से जुड़े अपराधों पर लागू होता है।

आगे क्या होगा

पन्नू और हरप्रीत अभी भी अमेरिका में हैं और भारतीय कानून की पहुँच से बाहर हैं। एनआईए के सूत्रों के अनुसार, फरार आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही जारी है। यह फैसला उन मामलों में एनआईए की सफल अभियोजन क्षमता का संकेत देता है जहाँ मुख्य सूत्रधार विदेश में बैठकर उकसावे का काम करते हैं, जबकि स्थानीय स्तर पर काम करने वाले दोषियों को कानून के कठघरे में लाया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब तक स्थानीय दोषियों को सज़ा देना कितना पर्याप्त है। भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि की सीमाएँ इस मामले में एक बार फिर उजागर होती हैं। न्याय आधा तब है जब सूत्रधार खुलेआम इनाम घोषित करते रहें और भारतीय कानून की पहुँच से बाहर रहें।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोगा DC ऑफिस खालिस्तानी झंडा मामला क्या है?
14 अगस्त 2020 को इंदरजीत सिंह और जसपाल सिंह ने मोगा के डिप्टी कमिश्नर दफ़्तर की छत पर खालिस्तानी झंडा फहराया और तिरंगे को जमीन पर घसीटा था। यह हरकत घोषित आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू के उकसावे और एसएफजे से नकद इनाम के बदले की गई थी।
एनआईए कोर्ट ने दोनों दोषियों को क्या सज़ा दी?
मोहाली की एनआईए विशेष अदालत ने 1 मई 2026 को इंदरजीत सिंह और जसपाल सिंह को 5 साल 6 महीने की जेल और ₹16,000 जुर्माने की सज़ा सुनाई। यह सज़ा IPC, UA(P)A और राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दी गई है।
गुरपतवंत सिंह पन्नू की इस मामले में क्या भूमिका थी?
पन्नू ने 10-11 अगस्त 2020 के बीच सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड कर सरकारी दफ़्तरों पर खालिस्तानी झंडा फहराने के लिए $2,500 इनाम की घोषणा की थी। उनके उकसावे पर ही इंदरजीत और जसपाल ने यह हरकत की थी; पन्नू को 2021 में 'घोषित अपराधी' करार दिया जा चुका है।
पन्नू और हरप्रीत सिंह को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?
दोनों अमेरिका में हैं और भारतीय कानून की सीधी पहुँच से बाहर हैं। मोहाली की विशेष अदालत ने 2021 में उन्हें 'घोषित अपराधी' करार दिया है और एनआईए के अनुसार उनके खिलाफ कार्यवाही जारी है।
सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) क्या है?
एसएफजे एक प्रतिबंधित संगठन है जिसे भारत सरकार ने गैरकानूनी घोषित किया है। यह संगठन खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को बढ़ावा देता है और इसके जनरल काउंसल गुरपतवंत सिंह पन्नू को भारत ने घोषित आतंकवादी करार दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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