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राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने जनगणना 2027 का शुभारंभ किया, 1 मई से स्व-गणना पोर्टल शुरू

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राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने जनगणना 2027 का शुभारंभ किया, 1 मई से स्व-गणना पोर्टल शुरू

सारांश

राजस्थान में जनगणना 2027 का आगाज़ हो गया है — और इस बार सब कुछ डिजिटल है। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने 1 मई को जयपुर के लोक भवन में स्व-गणना करके इस ऐतिहासिक प्रक्रिया की शुरुआत की। यह भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी, जो डेढ़ दशक के अंतराल के बाद देश का व्यापक जनसांख्यिकीय चित्र सामने लाएगी।

मुख्य बातें

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने 1 मई 2026 को जयपुर के लोक भवन में जनगणना 2027 की औपचारिक शुरुआत की।
स्व-गणना की सुविधा 1 मई से 15 मई तक आधिकारिक जनगणना वेब पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी।
यह भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें डेटा संग्रह डिजिटल उपकरणों से होगा।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी स्व-गणना में भाग लेकर नागरिकों के लिए मिसाल कायम की।
जनगणना निदेशक विष्णु चरण मलिक के अनुसार, नागरिक मोबाइल नंबर से लॉग इन कर परिवार की जानकारी ऑनलाइन जमा कर सकते हैं।
पिछली जनगणना 2011 में हुई थी; 2021 की जनगणना कोविड-19 के कारण स्थगित रही थी।

राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने शुक्रवार, 1 मई 2026 को जयपुर के लोक भवन में स्वयं की गणना करके राज्य में जनगणना 2027 की औपचारिक शुरुआत की। इस कदम के साथ राजस्थान में जनगणना गतिविधियों का पहला चरण आधिकारिक तौर पर प्रारंभ हो गया है, जो भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी।

स्व-गणना प्रक्रिया और पोर्टल की विशेषताएँ

अधिकारियों के अनुसार, स्व-गणना की सुविधा 1 मई से 15 मई तक आधिकारिक जनगणना वेब पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी। नागरिक अपने मोबाइल नंबर और आवश्यक विवरणों का उपयोग करके लॉग इन कर सकते हैं तथा अपने व अपने परिवार की जानकारी ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। जनगणना निदेशक विष्णु चरण मलिक ने बताया कि यह वेब-आधारित प्रणाली सरल, सुरक्षित और उपयोगकर्ता के अनुकूल है।

गौरतलब है कि यह भारत की पहली जनगणना होगी जिसमें डेटा संग्रह पूरी तरह डिजिटल उपकरणों के माध्यम से किया जाएगा — पारंपरिक कागज़ी प्रक्रिया से यह एक बड़ा बदलाव है।

राज्यपाल की नागरिकों से अपील

राज्यपाल बागडे ने इस अवसर पर नागरिकों से अपील की कि वे इस राष्ट्रीय कार्य में सक्रिय रूप से भाग लें और सटीक जानकारी जमा करें। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और सामाजिक संगठनों से आग्रह किया कि वे उन लोगों की सहायता करें जो डिजिटल प्लेटफॉर्म से परिचित नहीं हैं, ताकि कोई भी इस प्रक्रिया से वंचित न रहे।

राज्यपाल ने यह भी कहा कि आगामी घर-घर सर्वेक्षण के दौरान नागरिक जनगणना कर्मियों के साथ सहयोग करें, सही जानकारी दें और किसी भी संदेह की स्थिति में हेल्पलाइन सेवाओं का उपयोग करें। इस शुभारंभ समारोह में राज्यपाल के सचिव डॉ. पृथ्वी भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी की स्व-गणना

इससे पहले, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी जनगणना 2027 के तहत स्व-गणना प्रक्रिया में भाग लिया और राज्य के नागरिकों के सामने एक मिसाल पेश की। उन्होंने आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपनी व्यक्तिगत जानकारी सफलतापूर्वक ऑनलाइन जमा की।

मुख्यमंत्री ने जनगणना 2027 को शासन और नियोजन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और नागरिकों से इस राष्ट्र-निर्माण के कार्य में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

जनगणना 2027 का महत्व

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी और 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित कर दी गई थी। इस प्रकार, जनगणना 2027 डेढ़ दशक से अधिक के अंतराल के बाद देश का पहला व्यापक जनसांख्यिकीय सर्वेक्षण होगा।

राज्यपाल बागडे ने जोर दिया कि जनता की भागीदारी देश के समावेशी और समग्र विकास में सीधा योगदान है। सटीक जनगणना डेटा से सरकारी योजनाओं का लाभ उन लोगों तक पहुँचाना आसान होगा जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

आगे क्या होगा

स्व-गणना चरण के समाप्त होने के बाद घर-घर सर्वेक्षण का दूसरा चरण शुरू होगा, जिसमें जनगणना कर्मी सीधे घरों में जाकर जानकारी एकत्र करेंगे। राजस्थान में इस प्रक्रिया की सफलता पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकती है, क्योंकि यह देश की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती डिजिटल खाई को पाटने में है। राजस्थान में ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में इंटरनेट पहुँच अभी भी सीमित है, और केवल युवाओं व सामाजिक संगठनों पर निर्भरता एक अधूरी रणनीति है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि 2021 की जनगणना कोविड के बाद भी वर्षों तक नहीं हो पाई — यानी नीयत और क्रियान्वयन के बीच की खाई पहले भी दिखी है। बिना ज़मीनी तैयारी और डिजिटल साक्षरता अभियान के, डेटा की सटीकता पर सवाल उठना स्वाभाविक होगा।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनगणना 2027 की स्व-गणना प्रक्रिया क्या है?
जनगणना 2027 की स्व-गणना एक ऑनलाइन सुविधा है जिसके तहत नागरिक आधिकारिक जनगणना वेब पोर्टल पर मोबाइल नंबर से लॉग इन करके अपने व अपने परिवार की जानकारी स्वयं जमा कर सकते हैं। यह सुविधा 1 मई से 15 मई तक उपलब्ध रहेगी।
राजस्थान में जनगणना 2027 का शुभारंभ कब और कहाँ हुआ?
राजस्थान में जनगणना 2027 का शुभारंभ 1 मई 2026 को जयपुर के लोक भवन में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने स्वयं की गणना करके किया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी इससे पहले स्व-गणना में भाग लिया।
जनगणना 2027 क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी और 2021 की जनगणना कोविड-19 के कारण स्थगित हो गई थी। जनगणना 2027 डेढ़ दशक से अधिक के अंतराल के बाद देश का पहला व्यापक जनसांख्यिकीय सर्वेक्षण होगा, जो सरकारी योजनाओं और नीति-निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है।
क्या जनगणना 2027 पूरी तरह डिजिटल होगी?
हाँ, अधिकारियों के अनुसार जनगणना 2027 भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें डेटा संग्रह डिजिटल उपकरणों के माध्यम से किया जाएगा। इसके अलावा नागरिकों को वेब पोर्टल के ज़रिए स्व-गणना का विकल्प भी दिया गया है।
जो लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म से परिचित नहीं हैं, उनके लिए क्या व्यवस्था है?
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने युवाओं और सामाजिक संगठनों से अपील की है कि वे ऐसे लोगों की सहायता करें। इसके अलावा, घर-घर सर्वेक्षण का दूसरा चरण भी होगा जिसमें जनगणना कर्मी सीधे घरों में जाकर जानकारी एकत्र करेंगे।
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