गंगा एक्सप्रेसवे 15 दिन टोल-फ्री: योगी सरकार का बड़ा फैसला, IRB और अदाणी को यूपीडा के निर्देश जारी

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गंगा एक्सप्रेसवे 15 दिन टोल-फ्री: योगी सरकार का बड़ा फैसला, IRB और अदाणी को यूपीडा के निर्देश जारी

सारांश

594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर CM योगी ने COD से 15 दिन का टोल-फ्री तोहफा दिया है। यूपीडा ने IRB इंफ्रास्ट्रक्चर और अदाणी इन्फ्रास्ट्रक्चर को तत्काल टोल संग्रह स्थगित करने के निर्देश जारी किए। मेरठ से प्रयागराज तक 12 जनपदों को जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे यूपी के इन्फ्रास्ट्रक्चर इतिहास का सबसे बड़ा PPP प्रोजेक्ट है।

Key Takeaways

CM योगी आदित्यनाथ ने 1 मई 2026 को गंगा एक्सप्रेसवे को COD से 15 दिन टोल-फ्री रखने की घोषणा की। यूपीडा ने कन्सेशनैयर्स आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर और अदाणी इन्फ्रास्ट्रक्चर को टोल संग्रह स्थगित रखने के आदेश जारी किए। एक्सप्रेसवे 594 किलोमीटर लंबा है और मेरठ से प्रयागराज तक 12 जनपदों को जोड़ता है। PPP मॉडल के तहत कन्सेशनैयर्स को 27 वर्षों तक टोल वसूली का अधिकार है। टोल-फ्री अवधि के राजस्व नुकसान की भरपाई राज्य सरकार या यूपीडा कंसेशन एग्रीमेंट के तहत करेगी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 मई 2026 को जनहित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए गंगा एक्सप्रेसवे को उसकी कमर्शियल ऑपरेशन डेट (COD) से 15 दिनों तक पूरी तरह टोल-फ्री रखने की घोषणा की है। इस फैसले के तहत प्रदेश के नागरिक बिना किसी शुल्क के उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे और अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे पर यात्रा कर सकेंगे।

यूपीडा ने जारी किए तत्काल निर्देश

मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) ने तत्काल कार्रवाई करते हुए परियोजना के कन्सेशनैयर्स आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर और अदाणी इन्फ्रास्ट्रक्चर को 15 दिनों तक टोल संग्रह स्थगित रखने के आदेश जारी कर दिए हैं। यूपीडा द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस पूरी अवधि में यात्रियों से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।

यह निर्णय उस समय आया जब इंडिपेंडेंट इंजीनियर ने कंसेशन एग्रीमेंट के अनुच्छेद 14.3.1 के तहत प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी किया, जिससे एक्सप्रेसवे की कमर्शियल ऑपरेशन डेट आधिकारिक रूप से निर्धारित हो गई और एक्सप्रेसवे को आम जनता के उपयोग के लिए पूर्णतः तैयार घोषित किया गया।

594 किलोमीटर का सफर, 12 जनपद जुड़े

मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह 594 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे प्रदेश के 12 जनपदों को आपस में जोड़ता है। इसे उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है। गौरतलब है कि यह एक्सप्रेसवे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के तहत DBFOT (टोल) मॉडल पर विकसित किया गया है, जिसमें कन्सेशनैयर्स को 27 वर्षों तक टोल वसूली का अधिकार दिया गया है।

योगी सरकार का उद्देश्य है कि शुरुआती चरण में अधिक से अधिक लोग इस अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता, गति और जन-सुविधाओं से सीधे परिचित हो सकें। यह पहल न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि एक्सप्रेसवे के प्रति जनविश्वास को भी मजबूत करेगी।

राजस्व नुकसान की भरपाई का प्रावधान

15 दिन की टोल छूट से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई राज्य सरकार अथवा यूपीडा द्वारा कंसेशन एग्रीमेंट के प्रावधानों के अनुसार की जाएगी। यूपीडा ने स्पष्ट किया है कि टोल-फ्री अवधि के दौरान भी अनुच्छेद 17 सहित कंसेशन एग्रीमेंट के सभी प्रावधानों के तहत सड़क की गुणवत्ता, सुरक्षा, ट्रैफिक मैनेजमेंट और यात्री सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।

आम जनता पर असर और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब प्रदेश सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास को जन-जागरूकता से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। 15 दिन की यह टोल छूट न केवल आम नागरिकों को राहत देगी, बल्कि इस मेगा प्रोजेक्ट के प्रति सकारात्मक माहौल भी तैयार करेगी। इस फैसले को प्रदेश सरकार की 'जनहित प्रथम' नीति की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है। टोल-फ्री अवधि समाप्त होने के बाद कन्सेशन एग्रीमेंट के तहत नियमित टोल संग्रह शुरू हो जाएगा।

Point of View

लेकिन असली सवाल यह है कि इस राजस्व नुकसान की भरपाई का बोझ अंततः किस पर पड़ेगा — राज्य के करदाताओं पर या यूपीडा के बजट पर। PPP मॉडल में इस तरह की छूट की परंपरा दीर्घकालिक वित्तीय संतुलन को प्रभावित कर सकती है, खासकर जब 27 साल की कंसेशन अवधि में कन्सेशनैयर्स की वापसी पहले से ही निर्धारित टोल दरों पर निर्भर है। गौरतलब है कि यह घोषणा COD के ठीक बाद आई है, जो राजनीतिक दृष्टि से सुविचारित है — लेकिन बिना पारदर्शी राजस्व-भरपाई ढाँचे के, यह नज़ीर भविष्य के एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में निवेशकों की धारणा को भी प्रभावित कर सकती है।
NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

गंगा एक्सप्रेसवे टोल-फ्री कब से कब तक रहेगा?
गंगा एक्सप्रेसवे की कमर्शियल ऑपरेशन डेट (COD) से अगले 15 दिनों तक टोल-फ्री रहेगा। यूपीडा ने कन्सेशनैयर्स को इस अवधि में किसी भी यात्री से शुल्क न लेने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
गंगा एक्सप्रेसवे कहाँ से कहाँ तक जाता है और कितना लंबा है?
गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक 594 किलोमीटर लंबा है और उत्तर प्रदेश के 12 जनपदों को जोड़ता है। यह यूपी का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे है।
टोल-फ्री अवधि में राजस्व नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
15 दिन की टोल छूट से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई राज्य सरकार अथवा यूपीडा द्वारा कंसेशन एग्रीमेंट के प्रावधानों के अनुसार की जाएगी। कन्सेशनैयर्स आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर और अदाणी इन्फ्रास्ट्रक्चर को इससे वित्तीय नुकसान नहीं होगा।
गंगा एक्सप्रेसवे किस मॉडल पर बना है और टोल का अधिकार किसे है?
गंगा एक्सप्रेसवे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के तहत DBFOT (टोल) मॉडल पर विकसित किया गया है। इसके तहत कन्सेशनैयर्स को 27 वर्षों तक टोल वसूली का अधिकार दिया गया है।
टोल-फ्री अवधि में एक्सप्रेसवे की सुरक्षा और रखरखाव पर क्या असर पड़ेगा?
यूपीडा ने स्पष्ट किया है कि टोल-फ्री अवधि के दौरान भी कंसेशन एग्रीमेंट के अनुच्छेद 17 सहित सभी प्रावधानों के तहत सड़क की गुणवत्ता, सुरक्षा, ट्रैफिक मैनेजमेंट और यात्री सुविधाओं में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
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