11 अगस्त 2026
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बांग्लादेश: पलाशबाड़ी के राधा-गोविंद मंदिर में भगवान राम की तस्वीर के अपमान का आरोप, हिंदू-बौद्ध-क्रिश्चियन एकता परिषद ने की कड़ी निंदा

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बांग्लादेश: पलाशबाड़ी के राधा-गोविंद मंदिर में भगवान राम की तस्वीर के अपमान का आरोप, हिंदू-बौद्ध-क्रिश्चियन एकता परिषद ने की कड़ी निंदा

सारांश

बांग्लादेश के गायबंधा जिले में भगवान राम की तस्वीर के कथित अपमान और मंदिर को धमकियों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन एकता परिषद ने कड़ी निंदा करते हुए तत्काल गिरफ्तारी की माँग की है। प्रस्तावित राम प्रतिमा का निर्माण भी प्रशासन ने रोका, आलोचकों ने कट्टरपंथी दबाव को ज़िम्मेदार ठहराया।

मुख्य बातें

बांग्लादेश के गायबंधा जिले के पलाशबाड़ी स्थित राधा-गोविंद मंदिर में भगवान राम की तस्वीर के कथित अपमान का मामला सामने आया।
एक सांप्रदायिक समूह के जुलूस के दौरान तस्वीर का अपमान किया गया; मंदिर परिसर और प्रतिमा को नुकसान पहुँचाने की धमकियाँ भी दी गईं।
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन एकता परिषद ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी सज़ा की माँग की।
पलाशबाड़ी में प्रस्तावित विशाल राम प्रतिमा के निर्माण को प्रशासन ने रोका; आलोचकों का आरोप — कट्टरपंथी समूहों के दबाव में निर्णय।
अखबार ब्लिट्ज के संपादक सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने भी घटनाक्रम पर चिंता जताई।
परिषद ने चेतावनी दी कि ये गतिविधियाँ व्यापक सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले सकती हैं।

बांग्लादेश के गायबंधा जिले के पलाशबाड़ी उपजिला स्थित राधा-गोविंद मंदिर में भगवान राम की तस्वीर के कथित अपमान और मंदिर परिसर में स्थापित प्रतिमा को नुकसान पहुँचाने की धमकियों को लेकर विवाद तेज़ हो गया है। देश के प्रमुख अल्पसंख्यक अधिकार संगठन बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन एकता परिषद ने 15 जून 2026 को इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं पर सीधा आघात बताया है।

मुख्य घटनाक्रम

परिषद के अनुसार, एक सांप्रदायिक समूह द्वारा निकाले गए जुलूस के दौरान भगवान राम की तस्वीर का अपमान किया गया। संगठन ने आरोप लगाया कि 'पिछले कई दिनों से कुछ कट्टरपंथी तत्व पलाशबाड़ी में भगवान श्रीराम की प्रतिमा और मंदिर परिसर को नुकसान पहुँचाने की धमकियाँ दे रहे हैं।' परिषद ने यह भी कहा कि 'इन समूहों द्वारा सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से अल्पसंख्यक समुदायों के विरुद्ध नफरत फैलाने का अभियान भी चलाया जा रहा है।'

यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सुरक्षा पहले से ही एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। गौरतलब है कि पलाशबाड़ी में प्रस्तावित भगवान राम की विशाल प्रतिमा के निर्माण कार्य को भी स्थानीय प्रशासन ने रोक दिया है। मंदिर के सलाहकार श्यामल कुमार महंत ने हाल ही में इस निर्माण परियोजना की घोषणा की थी।

संगठन की माँगें

बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन एकता परिषद ने बांग्लादेश सरकार से माँग की है कि सांप्रदायिक शक्तियों पर तत्काल और कड़ी कार्रवाई की जाए। परिषद ने कहा, 'लोकतांत्रिक और बहुलतावादी समाज में इस प्रकार की उकसावे वाली और भड़काऊ गतिविधियाँ पूरी तरह अस्वीकार्य हैं।'

संगठन ने भगवान राम की तस्वीर के अपमान और धार्मिक भावनाएँ भड़काने में शामिल लोगों की तत्काल गिरफ्तारी तथा कड़ी सज़ा की माँग की है। साथ ही सभी धर्मनिरपेक्ष नागरिकों, सामाजिक संगठनों और लोकतांत्रिक राजनीतिक दलों से इन गतिविधियों के विरुद्ध एकजुट होकर आवाज़ उठाने की अपील की है।

प्रशासन का रुख और आलोचना

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पलाशबाड़ी में प्रस्तावित विशाल राम प्रतिमा के निर्माण पर प्रशासन ने रोक लगा दी है। आलोचकों का आरोप है कि यह निर्णय इस्लामी कट्टरपंथी समूहों के दबाव में लिया गया, हालाँकि प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।

बांग्लादेशी अखबार ब्लिट्ज के संपादक सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने भी इस घटनाक्रम पर चिंता जताई और कहा कि स्थानीय जिहादी और इस्लामवादी संगठनों के विरोध के बाद मंदिर परियोजना की गतिविधियाँ रोक दी गई हैं।

व्यापक संदर्भ और धार्मिक स्वतंत्रता की बहस

यह मामला बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर नई बहस का केंद्र बन गया है। परिषद ने चेतावनी दी है कि ऐसी गतिविधियाँ किसी भी समय व्यापक सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले सकती हैं। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों की घटनाएँ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के रडार पर बनी हुई हैं।

आने वाले दिनों में बांग्लादेश सरकार की प्रतिक्रिया और प्रशासनिक कार्रवाई यह तय करेगी कि क्या इस संवेदनशील मामले में अल्पसंख्यक समुदाय को न्याय मिल पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब तक 'बहुलतावादी समाज' की बात महज़ कागज़ी रहेगी। यह मामला बांग्लादेश की धार्मिक स्वतंत्रता की साख की असली परीक्षा है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश के पलाशबाड़ी मंदिर में क्या हुआ?
गायबंधा जिले के पलाशबाड़ी उपजिला स्थित राधा-गोविंद मंदिर में एक सांप्रदायिक समूह के जुलूस के दौरान भगवान राम की तस्वीर का कथित तौर पर अपमान किया गया। इसके साथ ही मंदिर परिसर और प्रतिमा को नुकसान पहुँचाने की धमकियाँ भी दी गई हैं।
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन एकता परिषद ने क्या माँग की है?
परिषद ने बांग्लादेश सरकार से माँग की है कि भगवान राम की तस्वीर के अपमान और धार्मिक भावनाएँ भड़काने में शामिल लोगों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और कड़ी सज़ा दी जाए। संगठन ने सांप्रदायिक शक्तियों पर तुरंत सख्त कार्रवाई की भी अपील की है।
पलाशबाड़ी में राम प्रतिमा का निर्माण क्यों रोका गया?
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन ने प्रस्तावित विशाल राम प्रतिमा के निर्माण पर रोक लगा दी है। आलोचकों का आरोप है कि यह निर्णय इस्लामी कट्टरपंथी समूहों के दबाव में लिया गया, हालाँकि प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है।
इस घटना से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर क्या असर पड़ता है?
परिषद ने चेतावनी दी है कि ऐसी उकसावे वाली गतिविधियाँ किसी भी समय व्यापक सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले सकती हैं। यह घटना बांग्लादेश में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर नई बहस का विषय बन गई है।
ब्लिट्ज अखबार के संपादक ने इस मामले पर क्या कहा?
बांग्लादेशी अखबार ब्लिट्ज के संपादक सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने इस घटनाक्रम पर चिंता जताई और कहा कि स्थानीय जिहादी और इस्लामवादी संगठनों के विरोध के बाद मंदिर परियोजना की गतिविधियाँ रोक दी गई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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