भारत-यूके सीईटीए लागू: ₹48 अरब पाउंड के व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार, रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) 15 जुलाई 2026 को आधिकारिक रूप से लागू हो गया। अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों ने इसे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक ऐतिहासिक मोड़ बताया है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि और नए रोजगार अवसरों के सृजन की उम्मीद है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 48 अरब पाउंड प्रति वर्ष है।
समझौते की शुरुआत और पहली खेप
गुजरात के सानंद (अहमदाबाद के निकट) में पहले निर्यात कंसाइनमेंट को रवाना करने के समारोह में ब्रिटेन के उप उच्चायुक्त स्टीव हिकलिंग ने कहा, "यह समझौता भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक और राजनीतिक रिश्तों की मजबूती को दर्शाता है और दोनों देशों के बीच पहले से कहीं अधिक मजबूत और व्यापक आर्थिक साझेदारी की शुरुआत का संकेत देता है।"
समझौते के लागू होने के साथ ही मुंबई के अंधेरी स्थित विशेष आर्थिक क्षेत्र एसईईपीजेड से ब्रिटेन के लिए रत्न एवं आभूषण की पहली निर्यात खेप भी रवाना की गई। यह प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत का रत्न एवं आभूषण क्षेत्र यूके बाजार में बड़े अवसर देखता है।
व्यापार में वृद्धि की संभावना
हिकलिंग ने बताया कि विभिन्न अध्ययनों के अनुसार सीईटीए के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच 48 अरब पाउंड के मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार में और अधिक बढ़ोतरी होने की संभावना है। उन्होंने कहा, "हमारा द्विपक्षीय व्यापार पहले ही करीब 48 अरब पाउंड सालाना है और विश्लेषण बताते हैं कि इस समझौते के बाद इसमें और अधिक बढ़ोतरी होगी।"
गौरतलब है कि यह समझौता लगभग एक वर्ष की गहन वार्ता के बाद आकार लिया। इसके बाद इसे ब्रिटेन की संसद से मंजूरी मिली और फिर भारत में आवश्यक स्वीकृतियाँ प्राप्त होने के पश्चात इसे लागू किया गया। यह जानकारी एसईईपीजेड के जोनल डेवलपमेंट कमिश्नर ज्ञानेश्वर पाटिल ने दी।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
एच.के. डिजाइंस (इंडिया) एलएलपी के जनरल मैनेजर (एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट) विश्वनाथ हुबलीकर ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारत अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाने की दिशा में काम कर रहा है और ऐसे में यह समझौता बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
हुबलीकर ने यह भी रेखांकित किया कि यूरोप भारत के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार के रूप में उभर रहा है। उनके अनुसार भारत-यूके सीईटीए भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहचान दिलाने के साथ-साथ निर्यात बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अमेरिकी व्यापार नीतियों में उतार-चढ़ाव के बीच अपने निर्यात गंतव्यों में विविधता लाने पर जोर दे रहा है। सीईटीए के लागू होने से भारतीय वस्त्र, रत्न-आभूषण, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी सेवाओं को ब्रिटिश बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलने की उम्मीद है। आने वाले महीनों में दोनों देशों के व्यापारिक संगठन क्रियान्वयन की दिशा में काम करेंगे।