कर्नाटक MLC चुनाव: 'रिसॉर्ट कल्चर बंद हो' — भाजपा नेता सुरेश कुमार की राजनीतिक दलों से अपील
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता एस. सुरेश कुमार ने 18 जून 2026 को बेंगलुरु में कहा कि राजनीतिक दलों को 'रिसॉर्ट कल्चर' तत्काल बंद करना चाहिए, क्योंकि विधायकों को रिसॉर्ट में भेजना मतदाताओं को यह गलत संदेश देता है कि जनप्रतिनिधियों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। यह बयान कर्नाटक विधान परिषद (MLC) की 7 सीटों के लिए हो रहे चुनाव के दिन आया, जब क्रॉस-वोटिंग की आशंका के चलते कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को बिदादी स्थित एक रिसॉर्ट में भेज दिया।
मुख्य घटनाक्रम
18 जून को बेंगलुरु स्थित विधानसभा में सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान की प्रक्रिया चली। कुल 7 सीटों के लिए 8 उम्मीदवार मैदान में हैं और शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होनी है। यह चुनाव विधानसभा कोटे की सीटों के लिए है, जिसमें संख्याबल के साथ-साथ प्राथमिकता वोटों की रणनीति भी निर्णायक मानी जा रही है।
सुरेश कुमार का बयान और BJP का रुख
सुरेश कुमार ने कहा, 'मैं सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूँ कि इस रिसॉर्ट संस्कृति को खत्म किया जाए। इससे यह संदेश जाता है कि विधायकों पर भरोसा नहीं है और उन्हें खरीदा या प्रभावित किया जा सकता है।' उन्होंने चेतावनी दी कि यह प्रवृत्ति भविष्य में मतदाताओं को भी रिसॉर्ट में रखने तक पहुँच सकती है, जो लोकतंत्र के लिए सही नहीं होगा।
BJP नेता ने यह भी कहा कि पार्टी को अपने दोनों उम्मीदवारों की जीत का पूरा भरोसा है और NDA के तीसरे उम्मीदवार — जनता दल (सेक्युलर) [JDS] — के भी सफल होने की उम्मीद है।
कांग्रेस पर निशाना और गुटबाजी के आरोप
सुरेश कुमार ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और कैबिनेट विस्तार में देरी के कारण असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिससे कुछ विधायकों की निष्ठा को लेकर संदेह पैदा हो रहा है। BJP नेता वाई. भरत शेट्टी ने भी कांग्रेस में गुटबाजी का आरोप लगाया — उनके अनुसार सिद्दारमैया गुट, डी.के. शिवकुमार गुट और खड़गे गुट के बीच खींचतान के चलते क्रॉस-वोटिंग की संभावना बन रही है।
गौरतलब है कि कांग्रेस ने इन्हीं आशंकाओं के मद्देनज़र अपने विधायकों को बिदादी के रिसॉर्ट में भेजा, जहाँ उन्हें प्रशिक्षण और मॉक वोटिंग कराई जा रही है ताकि सभी वोट सही तरीके से डाले जा सकें।
आम जनता और लोकतंत्र पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय राजनीति में 'रिसॉर्ट कल्चर' एक बार फिर बहस के केंद्र में है। आलोचकों का कहना है कि जब भी किसी राज्य में करीबी चुनाव होता है — चाहे वह विधानसभा हो या विधान परिषद — सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों दल अपने विधायकों को 'सुरक्षित' रखने के लिए रिसॉर्ट का सहारा लेते हैं। यह प्रवृत्ति जन-प्रतिनिधित्व की भावना पर सवाल उठाती है।
आगे क्या
मतगणना के नतीजे 18 जून की शाम तक स्पष्ट होने की उम्मीद है। इन परिणामों से कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस की आंतरिक एकजुटता और NDA गठबंधन की ताकत का भी अंदाज़ा लगेगा। BJP-JDS गठबंधन की तीन सीटें जीतने की रणनीति राज्य विधान परिषद में विपक्ष के प्रभाव को बढ़ा सकती है।