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कर्नाटक विधान परिषद चुनाव: निष्कासित भाजपा विधायक सोमशेखर और हेब्बार ने कांग्रेस को वोट देने की पुष्टि की

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कर्नाटक विधान परिषद चुनाव: निष्कासित भाजपा विधायक सोमशेखर और हेब्बार ने कांग्रेस को वोट देने की पुष्टि की

सारांश

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में BJP से निष्कासित दो विधायकों ने खुलकर कांग्रेस को वोट देने की पुष्टि की और BJP पर औपचारिक संपर्क न करने का आरोप लगाया। यह घटनाक्रम NDA गठबंधन की रणनीतिक कमज़ोरी को उजागर करता है और कर्नाटक में कांग्रेस की बढ़त को और पक्का कर सकता है।

मुख्य बातें

BJP से निष्कासित विधायक एस.टी.
सोमशेखर और शिवराम हेब्बार ने 18 जुलाई को कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस को वोट देने की पुष्टि की।
दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि BJP नेतृत्व ने समर्थन माँगने के लिए एक औपचारिक बातचीत तक नहीं की।
सोमशेखर के अनुसार मुख्यमंत्री डी.के.
शिवकुमार ने व्यक्तिगत रूप से फोन कर क्षेत्र विकास का आश्वासन दिया।
कांग्रेस के पास कथित तौर पर लगभग 140 वोट हैं; प्रत्येक उम्मीदवार को 28-29 वोट आवंटित।
विश्वनाथ के अनुसार तीसरे NDA उम्मीदवार के लिए तीन वोटों की कमी है।
कांग्रेस ने अपने सभी पाँचों उम्मीदवारों की जीत का दावा किया; BJP ने दो सीटें जीतने का भरोसा जताया।

कर्नाटक विधान परिषद की सात सीटों के लिए 18 जुलाई को हुए मतदान में क्रॉस वोटिंग की अटकलें सच साबित हुईं, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) से निष्कासित विधायक एस.टी. सोमशेखर और शिवराम हेब्बार ने बेंगलुरु में पत्रकारों के सामने खुलकर स्वीकार किया कि उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया। दोनों नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि BJP नेतृत्व ने उनसे समर्थन माँगने के लिए एक औपचारिक बातचीत तक की ज़हमत नहीं उठाई।

सोमशेखर का बयान: क्षेत्र विकास को प्राथमिकता

एस.टी. सोमशेखर ने कहा कि उनका फैसला अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखकर लिया गया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्होंने तय नहीं किया था कि किस उम्मीदवार का समर्थन करेंगे — उनके शब्दों में, जो दल संपर्क करता है, उसी पर विचार होता है। सोमशेखर के अनुसार मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन कर बैठक में बुलाया और क्षेत्र के विकास कार्यों में सहयोग का आश्वासन दिया। इसी भरोसे पर उन्होंने 'अंतरात्मा की आवाज़' पर कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया।

सोमशेखर ने यह भी दावा किया कि न BJP और न ही जनता दल (सेक्युलर) (JD-S) ने उनसे संपर्क किया। उन्होंने कहा कि BJP उनके जैसे नेताओं के समर्थन से सत्ता में आई थी, और अब उन्हें विश्वास है कि कांग्रेस सरकार उनके क्षेत्र के लिए चरणबद्ध तरीके से काम करेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस के सभी पाँचों उम्मीदवार जीत दर्ज करेंगे।

हेब्बार का आरोप: BJP ने जान-बूझकर नज़रअंदाज़ किया

निष्कासित BJP विधायक शिवराम हेब्बार ने कहा कि उनकी प्राथमिकता भी अपने निर्वाचन क्षेत्र का विकास है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेताओं के साथ विकास संबंधी मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई, जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवारों के समर्थन में मतदान किया।

हेब्बार ने आरोप लगाया कि BJP ने उन्हें पार्टी से निकाला, फिर भी विधान परिषद चुनाव में समर्थन माँगने के लिए कम से कम एक औपचारिक बातचीत की उम्मीद थी। उनके अनुसार BJP का मुख्य उद्देश्य JD-S उम्मीदवार को हराना था, इसलिए पार्टी नेतृत्व ने जान-बूझकर उनसे संपर्क नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के वर्तमान और पूर्व मुख्यमंत्रियों ने उनसे समर्थन माँगा और उन्होंने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।

BJP और JD-S का पक्ष

BJP विधायक अरविंद बेल्लद ने माना कि सोमशेखर और हेब्बार के वोट कांग्रेस को जा सकते हैं, लेकिन उन्होंने भरोसा जताया कि शेष सभी BJP विधायक पार्टी उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करेंगे। उन्होंने BJP उम्मीदवार लिंगराज पाटिल और रघु कौटिल्य की जीत का भी दावा किया। JD-S के NDA समर्थित उम्मीदवार के. गोविंदराजू की संभावनाओं पर बेल्लद ने कहा कि वोटों की कमी ज़रूर है, लेकिन जीत सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

BJP विधायक एस.आर. विश्वनाथ ने दावा किया कि NDA के तीनों उम्मीदवार जीतेंगे और BJP में कोई क्रॉस वोटिंग नहीं होगी। उनके अनुसार असंतोष कांग्रेस के भीतर है, जहाँ मंत्रिमंडल विस्तार और गुटबाजी के मुद्दे मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि तीसरे NDA उम्मीदवार के लिए तीन वोटों की कमी है, जबकि कांग्रेस को अपने पाँचवें उम्मीदवार की जीत के लिए पाँच अतिरिक्त वोटों की ज़रूरत है।

कांग्रेस का दावा: पूरी एकजुटता

उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल ने कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और सभी विधायक तय रणनीति के अनुसार मतदान करेंगे। उनके अनुसार यदि कहीं क्रॉस वोटिंग की संभावना है तो वह BJP या JD-S खेमे में है।

कांग्रेस विधायक कोनारेड्डी ने बताया कि प्रत्येक उम्मीदवार को लगभग 28 से 29 वोट आवंटित किए गए हैं और अन्य दलों के कुछ उम्मीदवारों का समर्थन भी कांग्रेस को मिलने की संभावना है। पूर्व मंत्री एन. चेलुवरायस्वामी ने खरीद-फरोख्त के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस के पास लगभग 140 वोट हैं, जो पाँचों उम्मीदवारों की जीत के लिए पर्याप्त हैं। कांग्रेस विधायक दल के सचिव अल्लामप्रभु पाटिल ने भी पुष्टि की कि सभी विधायक पार्टी हाईकमान की रणनीति के अनुसार मतदान करेंगे।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

गौरतलब है कि सोमशेखर और हेब्बार दोनों को पहले ही BJP से निष्कासित किया जा चुका है, लिहाज़ा उनका कांग्रेस के पक्ष में मतदान करना तकनीकी रूप से पार्टी व्हिप का उल्लंघन नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में BJP और JD-S की NDA गठबंधन की रणनीति पहले से ही दबाव में है। परिणाम यह तय करेगा कि विधान परिषद में सत्तारूढ़ कांग्रेस की पकड़ और मज़बूत होती है या विपक्ष अपनी उपस्थिति बनाए रखने में कामयाब रहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और BJP का इस मोर्चे पर निष्क्रिय रहना रणनीतिक चूक कहा जाएगा। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री शिवकुमार का व्यक्तिगत फोन और विकास का आश्वासन — यह कांग्रेस की उस 'माइक्रो-मैनेजमेंट' राजनीति की झलक है जो विधानसभा चुनाव में भी कारगर रही थी। असली सवाल यह है कि क्या 'क्षेत्र विकास' के वादे वास्तव में पूरे होंगे, या ये वोट हासिल करने का एक और अल्पकालिक प्रबंध मात्र हैं।
RashtraPress
5 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव 2026 में क्रॉस वोटिंग किसने की?
BJP से निष्कासित विधायक एस.टी. सोमशेखर और शिवराम हेब्बार ने 18 जुलाई को कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने की पुष्टि की। दोनों ने कहा कि BJP ने उनसे समर्थन माँगने के लिए संपर्क तक नहीं किया।
सोमशेखर और हेब्बार ने कांग्रेस को वोट क्यों दिया?
दोनों नेताओं ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास को प्रमुख कारण बताया। सोमशेखर के अनुसार मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने व्यक्तिगत रूप से फोन कर बैठक में बुलाया और विकास कार्यों में सहयोग का आश्वासन दिया, जबकि BJP या JD-S ने कोई संपर्क नहीं किया।
कर्नाटक विधान परिषद की सात सीटों पर कौन-कौन से दल मैदान में थे?
कांग्रेस ने पाँच उम्मीदवार उतारे, जबकि BJP और JD-S ने NDA गठबंधन के तहत कुल तीन उम्मीदवार खड़े किए — जिनमें JD-S के NDA समर्थित उम्मीदवार के. गोविंदराजू भी शामिल हैं। कांग्रेस के पास कथित तौर पर लगभग 140 वोट हैं।
BJP ने निष्कासित विधायकों से संपर्क क्यों नहीं किया?
BJP विधायक अरविंद बेल्लद के बयान के अनुसार पार्टी का मुख्य उद्देश्य JD-S उम्मीदवार को हराना था, जिसके चलते नेतृत्व ने निष्कासित विधायकों से संपर्क नहीं किया। हेब्बार ने भी इसी आरोप को दोहराया।
कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस की स्थिति क्या है?
कांग्रेस ने दावा किया है कि उसके सभी पाँचों उम्मीदवार जीतेंगे। पार्टी के पास कथित तौर पर लगभग 140 वोट हैं और प्रत्येक उम्मीदवार को 28-29 वोट आवंटित किए गए हैं। पूर्व मंत्री एन. चेलुवरायस्वामी ने खरीद-फरोख्त के आरोपों को खारिज करते हुए पर्याप्त द्वितीय वरीयता मतों का भी दावा किया है।
राष्ट्र प्रेस
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