कर्नाटक में SIR टालने की मांग: कांग्रेस ने BLO सूची में विसंगतियों का हवाला देकर CEO को सौंपा ज्ञापन
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 29 जून 2026 को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) और BLO सुपरवाइजरों की सूचियों में कथित विसंगतियों को तत्काल दुरुस्त किया जाए और जब तक सत्यापित जानकारी सार्वजनिक न हो, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को स्थगित किया जाए। यह मांग ऐसे समय में आई है जब चुनाव आयोग ने राज्य में 29 जून से 29 जुलाई तक घर-घर जाकर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है।
मुख्य आरोप: दो अलग-अलग सूचियाँ, अलग-अलग जानकारी
ज्ञापन एमएलसी रमेश बाबू ने CEO को सौंपा। उनका आरोप है कि CEO की आधिकारिक वेबसाइट पर BLO और BLO सुपरवाइजरों की दो अलग-अलग सूचियाँ प्रकाशित हैं — एक जिसका शीर्षक है 'BLO और BLO सुपरवाइजर लिस्ट' और दूसरी जिसका शीर्षक है 'वोटर सुविधा केंद्रों, BLO सुविधा केंद्रों और अधिकारियों के संपर्क विवरण की जानकारी।' कांग्रेस के अनुसार, दोनों सूचियों में एक ही पोलिंग क्षेत्र के लिए अलग-अलग नाम और मोबाइल नंबर दर्ज हैं।
पार्टी ने विधानसभा क्षेत्र 128 और 153 का विशेष उदाहरण दिया, जहाँ दोनों सूचियों में परस्पर विरोधाभासी जानकारी प्रकाशित पाई गई।
जनता और स्टेकहोल्डर्स पर असर
कांग्रेस का तर्क है कि विरोधाभासी आधिकारिक डेटा से मतदाताओं, राजनीतिक दलों, बूथ लेवल एजेंट्स (BLA), चुनाव पर्यवेक्षकों और अन्य पक्षों के बीच गंभीर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। पार्टी ने कहा कि यदि कोई मतदाता एक सूची के आधार पर BLO से संपर्क करने जाता है, तो उसे दूसरी सूची में भिन्न अधिकारी का नाम मिल सकता है — जिससे नाम जुड़वाने, सुधरवाने या हटवाने की प्रक्रिया बाधित होती है।
गौरतलब है कि इलेक्टोरल रोल में संशोधन एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें चुनाव अधिकारियों की पहचान के संबंध में पूर्ण सटीकता और पारदर्शिता अनिवार्य है। कांग्रेस का कहना है कि परस्पर विरोधाभासी जानकारी चुनावी प्रक्रिया में जनता के विश्वास को कमज़ोर करती है।
कांग्रेस की छह सूत्री माँगें
ज्ञापन में कांग्रेस ने CEO से छह ठोस कदम उठाने की माँग की है:
पहला, दोनों प्रकाशित सूचियों के बीच विसंगतियों का तत्काल सत्यापन और सुधार। दूसरा, सही नाम, पद, पोलिंग स्टेशन विवरण और मोबाइल नंबर सहित BLO और BLO सुपरवाइजरों की एकल, प्रमाणित सूची का प्रकाशन। तीसरा, वेबसाइट से गलत या पुरानी सूचियाँ हटाना। चौथा, सुधार पूर्ण होने तक सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी करना। पाँचवाँ, SIR आगे बढ़ाने से पूर्व सभी BLO और BLO सुपरवाइजरों के संपर्क विवरण का जिले-वार सत्यापन। छठा, यदि विसंगतियाँ तत्काल ठीक न हो सकें, तो सत्यापित जानकारी उपलब्ध होने तक SIR को स्थगित रखना।
चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया का संदर्भ
चुनाव आयोग ने कर्नाटक में 29 जून से 29 जुलाई 2026 तक 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' के तहत घर-घर जाकर मतदाता सत्यापन कराने की योजना बनाई है। यह प्रक्रिया मतदाता सूची को अद्यतन और शुद्ध रखने के लिए नियमित रूप से की जाती है। कांग्रेस का कहना है कि जब तक BLO की सूचनाएँ ही स्पष्ट नहीं होंगी, इस अभ्यास का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता।
आगे क्या होगा
कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से अनुरोध किया है कि इस मामले को प्राथमिकता देते हुए तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए और की गई कार्रवाई की जानकारी शीघ्र साझा की जाए। अब यह देखना होगा कि CEO कार्यालय इस ज्ञापन पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या SIR की समयसीमा में कोई बदलाव किया जाता है।