14 अगस्त 2026
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दिल्ली-एनसीआर में सबवेंशन स्कीम धोखाधड़ी: ईडी ने AVJ और रुद्रा बिल्डवेल पर की छापेमारी

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दिल्ली-एनसीआर में सबवेंशन स्कीम धोखाधड़ी: ईडी ने AVJ और रुद्रा बिल्डवेल पर की छापेमारी

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर दर्ज सीबीआई एफआईआर के बाद ईडी ने दिल्ली-एनसीआर में AVJ डेवलपर्स और रुद्रा बिल्डवेल पर छापे मारे। 'कब्जा मिलने तक ईएमआई नहीं' के वादे पर फ्लैट बुक कराने वाले खरीदारों को वर्षों बाद भी न कब्जा मिला, न राहत — अब पीएमएलए की जांच उनकी आखिरी उम्मीद बनी है।

मुख्य बातें

ईडी ने 14 अगस्त 2026 को दिल्ली-एनसीआर में सबवेंशन स्कीम धोखाधड़ी के दो मामलों में तलाशी अभियान चलाया।
मामले एवीजे डेवलपर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड और रुद्रा बिल्डवेल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े हैं।
जांच पीएमएलए के तहत है, जो सर्वोच्च न्यायालय के 29 अप्रैल 2025 के आदेश पर दर्ज सीबीआई एफआईआर पर आधारित है।
बिल्डरों ने 'कब्जा मिलने तक कोई ईएमआई नहीं' का वादा करके खरीदारों से हाउसिंग लोन दिलवाए, लेकिन वर्षों बाद भी फ्लैट का कब्जा नहीं दिया।
अलग मामले में रामगोपाल अग्रवाल को छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में 11 अगस्त को गिरफ्तार किया गया; 18 अगस्त तक ईडी हिरासत में।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 14 अगस्त 2026 को दिल्ली-एनसीआर में दो अलग-अलग बिल्डर-बैंक नेक्सस मामलों में तलाशी अभियान चलाया, जिनमें 'सबवेंशन स्कीम' की आड़ में सैकड़ों घर खरीदारों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का आरोप है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) के आधार पर की गई।

किन कंपनियों पर हुई कार्रवाई

ईडी के अनुसार, ये छापे एवीजे डेवलपर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड और रुद्रा बिल्डवेल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मामलों में हुए। दोनों मामलों में दर्ज ईसीआईआर, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दर्ज दो प्राथमिकियों (एफआईआर) पर आधारित हैं।

ये एफआईआर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हिमांशु सिंह बनाम भारत संघ और अन्य मामले में 29 अप्रैल 2025 को पारित आदेश के अनुपालन में दर्ज की गई थीं — जो इस बात का संकेत है कि न्यायपालिका ने स्वयं इन प्रकरणों की गंभीरता को रेखांकित किया था।

सबवेंशन स्कीम से कैसे हुई ठगी

सीबीआई की जांच के अनुसार, आरोपी बिल्डरों ने 'कब्जा मिलने तक कोई ईएमआई नहीं' की आकर्षक योजना प्रचारित की। इस स्कीम के तहत घर खरीदारों और निवेशकों ने हाउसिंग लोन लेकर फ्लैट या अपार्टमेंट बुक किए, यह समझते हुए कि जब तक कब्जा नहीं मिलेगा, तब तक ईएमआई की जिम्मेदारी बिल्डर उठाएगा।

हालाँकि, कई वर्ष बीत जाने के बाद भी खरीदारों को फ्लैट का कब्जा नहीं दिया गया। इस बीच बैंक ईएमआई की वसूली खरीदारों से होती रही, जिससे उन्हें गंभीर वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा। गौरतलब है कि सबवेंशन स्कीम रियल एस्टेट क्षेत्र में एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें बिल्डर, बैंक और खरीदार के बीच त्रिपक्षीय समझौता होता है — और इसी कड़ी में बिल्डर-बैंक की मिलीभगत के आरोप इस मामले को और गंभीर बनाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब रियल एस्टेट क्षेत्र में अटकी परियोजनाओं और धोखाधड़ी के मामले लगातार अदालतों तक पहुँच रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने 29 अप्रैल 2025 के अपने आदेश में सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था, जो इस मामले की असाधारण गंभीरता को दर्शाता है। न्यायालय का सीधा हस्तक्षेप यह भी बताता है कि पीड़ित खरीदारों ने सामान्य उपभोक्ता मंचों से आगे जाकर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया।

रायपुर में भी ईडी की कार्रवाई

इसी बीच, 12 अगस्त को ईडी ने रायपुर में छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के सिलसिले में एक अलग कार्रवाई की। रामगोपाल अग्रवाल — जो रायपुर सेंट्रल जेल में विचाराधीन कैदी के रूप में बंद थे — को 11 अगस्त को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया। न्यायालय ने उन्हें 18 अगस्त तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है।

आगे क्या होगा

दिल्ली-एनसीआर के मामलों में तलाशी के दौरान जब्त दस्तावेज़ों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद ईडी आगे की कार्रवाई तय करेगी। पीएमएलए के तहत संपत्ति कुर्की और गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। घर खरीदारों के लिए यह छापेमारी न्याय की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है, लेकिन उनके फ्लैट और निवेश की वापसी की राह अभी लंबी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बैंक और नियामक तीनों की जवाबदेही संदिग्ध रही है — और खरीदार सबसे अंत में न्याय पाने की कतार में खड़े रहे। यह पहली बार नहीं है कि 'कब्जा मिलने तक ईएमआई नहीं' जैसी योजनाएँ खरीदारों के लिए जाल साबित हुई हैं; जेपी इन्फ्राटेक और यूनिटेक जैसे मामले इसी कहानी के पुराने अध्याय हैं। असली सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और ईडी की कार्रवाई के बावजूद पीड़ित खरीदारों को उनके फ्लैट या पैसे कब और कैसे मिलेंगे — क्योंकि अब तक ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया वर्षों खिंचती रही है और मुआवज़ा नाममात्र का रहा है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सबवेंशन स्कीम क्या होती है और इसमें धोखाधड़ी कैसे हुई?
सबवेंशन स्कीम एक त्रिपक्षीय व्यवस्था है जिसमें बिल्डर, बैंक और घर खरीदार के बीच समझौता होता है — जब तक खरीदार को फ्लैट का कब्जा नहीं मिलता, तब तक ईएमआई बिल्डर चुकाता है। इस मामले में बिल्डरों ने यह वादा करके खरीदारों से लोन दिलवाए, लेकिन वर्षों बाद भी न कब्जा दिया और न ईएमआई चुकाई, जिससे खरीदारों पर दोहरा वित्तीय बोझ पड़ा।
ईडी ने किन कंपनियों पर छापे मारे?
ईडी ने एवीजे डेवलपर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड और रुद्रा बिल्डवेल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मामलों में 14 अगस्त 2026 को दिल्ली-एनसीआर में तलाशी अभियान चलाया। यह जांच पीएमएलए के तहत दर्ज ईसीआईआर पर आधारित है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की क्या भूमिका रही?
सर्वोच्च न्यायालय ने हिमांशु सिंह बनाम भारत संघ और अन्य मामले में 29 अप्रैल 2025 को आदेश पारित कर सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। इन्हीं एफआईआर के आधार पर ईसीआईआर बनी और ईडी की जांच शुरू हुई।
रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी किस मामले में हुई?
रामगोपाल अग्रवाल को छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में पीएमएलए की धारा 19 के तहत 11 अगस्त को गिरफ्तार किया गया। वे रायपुर सेंट्रल जेल में पहले से विचाराधीन कैदी थे और अदालत ने उन्हें 18 अगस्त तक ईडी की हिरासत में भेजा है।
इस मामले में घर खरीदारों को आगे क्या उम्मीद है?
ईडी की तलाशी के बाद जब्त साक्ष्यों के आधार पर संपत्ति कुर्की और गिरफ्तारी की कार्रवाई हो सकती है। हालाँकि, पीएमएलए मामलों में कानूनी प्रक्रिया लंबी होती है और खरीदारों को फ्लैट या निवेश की वापसी के लिए अभी और प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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