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मयूरी कांगो: IIT छोड़ 90s की नेशनल क्रश बनीं, फिर Google India तक का सफर

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मयूरी कांगो: IIT छोड़ 90s की नेशनल क्रश बनीं, फिर Google India तक का सफर

सारांश

IIT की परीक्षा पास करके बॉलीवुड चुना, 'पापा कहते हैं' से 90s की नेशनल क्रश बनीं — और फिर ग्लैमर छोड़ MBA किया, Google India में इंडस्ट्री हेड बनीं। मयूरी कांगो की कहानी बताती है कि असली करियर कभी-कभी दूसरे अध्याय में लिखा जाता है।

मुख्य बातें

मयूरी कांगो का जन्म 15 अगस्त 1982 को औरंगाबाद, महाराष्ट्र में हुआ; 15 साल की उम्र में आईआईटी कानपुर प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की।
फिल्म निर्माता सईद अख्तर मिर्जा ने उन्हें 'नसीम' (1995) में खोजा; महेश भट्ट की 'पापा कहते हैं' (1996) से वे 90s की नेशनल क्रश बनीं।
लगभग 16 फिल्मों और कई टीवी धारावाहिकों के बाद 28 दिसंबर 2003 को शादी कर अमेरिका गईं।
सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू यॉर्क से 2007 में मार्केटिंग व फाइनेंस में MBA किया।
2019 में गूगल इंडिया में इंडस्ट्री हेड — एजेंसी पार्टनरशिप बनीं; वर्तमान में CEO पद पर वैश्विक मीडिया, टेक और AI समाधानों का नेतृत्व कर रही हैं।

मयूरी कांगो की कहानी बॉलीवुड और कॉरपोरेट जगत दोनों में असाधारण उपलब्धि की मिसाल है — महज 15 साल की उम्र में आईआईटी कानपुर की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली इस प्रतिभाशाली अभिनेत्री ने 90 के दशक में हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाई और बाद में ग्लैमर की दुनिया को छोड़कर डिजिटल मार्केटिंग व तकनीक क्षेत्र में शीर्ष नेतृत्व हासिल किया। मुंबई से शुरू हुई यह यात्रा आज वैश्विक मीडिया, टेक और एआई समाधानों तक पहुँच चुकी है।

प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

मयूरी कांगो का जन्म 15 अगस्त 1982 को महाराष्ट्र के औरंगाबाद (अब छत्रपति संभाजीनगर) में हुआ था। उनके पिता भालचंद्र कांगो राजनीति से जुड़े थे, जबकि माता सुजाता कांगो एक प्रतिष्ठित थिएटर कलाकार थीं। इस सुशिक्षित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध पारिवारिक माहौल ने मयूरी के बौद्धिक और कलात्मक व्यक्तित्व को गढ़ने में निर्णायक भूमिका निभाई।

किशोरावस्था में ही उन्होंने आईआईटी कानपुर की अत्यंत प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षा पास कर अपनी असाधारण बौद्धिक क्षमता का परिचय दिया। हालांकि, नियति ने उनके लिए एक अलग मार्ग चुना था।

फिल्मी करियर की शुरुआत

एक बार जब वह अपनी माँ के साथ मुंबई के एक शूट पर गई थीं, तब प्रसिद्ध फिल्म निर्माता सईद अख्तर मिर्जा की नज़र उन पर पड़ी। मिर्जा ने उन्हें बाबरी मस्जिद विध्वंस की पृष्ठभूमि पर आधारित अपनी संवेदनशील फिल्म 'नसीम' (1995) में मुख्य भूमिका का प्रस्ताव दिया। मयूरी ने शिक्षा और कला के बीच फिल्म को चुना और इस तरह उनके अभिनय करियर की नींव पड़ी।

'नसीम' में उनके परिपक्व और भावनात्मक अभिनय ने उद्योग के दिग्गजों का ध्यान खींचा। जाने-माने निर्देशक महेश भट्ट ने प्रभावित होकर उन्हें रोमांटिक ड्रामा 'पापा कहते हैं' (1996) में जुगल हंसराज के साथ कास्ट किया। जावेद अख्तर रचित और उदित नारायण की आवाज़ में गाया गया गीत 'घर से निकलते ही' 90 के दशक के युवाओं का लव एंथम बन गया और मयूरी को 'नेशनल क्रश' का दर्जा दिलाया।

फिल्मों का सफर और विदाई

इस सफलता के बाद मयूरी ने कई फिल्मों में काम किया। 1997 में 'बेताबी' बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली। 1999 में 'होगी प्यार की जीत' सेमी-हिट रही। 2000 में एक्शन-थ्रिलर 'बादल' हिट रही, जिसमें उन्होंने बॉबी देओल और रानी मुखर्जी के साथ 'सोनी' की सहायक भूमिका निभाई।

लगभग 16 फिल्मों — जिनमें से आधी रिलीज़ भी नहीं हो सकीं — और 'डॉलर बहू''कारिश्मा: द मिरेकल्स ऑफ डेस्टिनी' जैसे टेलीविजन धारावाहिकों में काम करने के बाद मयूरी ने 28 दिसंबर 2003 को एनआरआई व्यवसायी आदित्य ढिल्लों से विवाह किया और संयुक्त राज्य अमेरिका चली गईं।

कॉरपोरेट जगत में नई पहचान

अमेरिका में उन्होंने सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू यॉर्क से मार्केटिंग और फाइनेंस में एमबीए की डिग्री हासिल की और 2007 में स्नातक हुईं। यह कदम उनके पेशेवर पुनर्जागरण की आधारशिला साबित हुआ।

2007 में उन्होंने 360आई न्यूयॉर्क में एसोसिएट मीडिया मैनेजर के रूप में कॉरपोरेट करियर की शुरुआत की। 2012 में वह ज़ेनिथ भारत की चीफ डिजिटल ऑफिसर बनीं। 2016 में परफॉर्मिक्स की मैनेजिंग डायरेक्टर का पदभार संभाला और 2019 में गूगल इंडिया में इंडस्ट्री हेड — एजेंसी पार्टनरशिप की भूमिका में आईं।

आगे का रास्ता

वर्तमान में मयूरी कांगो सीईओ की भूमिका में भारत के परिचालन के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर मीडिया, टेक और एआई समाधानों को आकार दे रही हैं। आईआईटी की परीक्षा से लेकर गूगल इंडिया तक का उनका यह सफर बताता है कि प्रतिभा का कोई एक ही रूप नहीं होता — यह परिस्थितियों के साथ खुद को नए सिरे से गढ़ती रहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर बॉलीवुड छोड़कर — परंपरागत रास्ते से हटने का साहस दिखाया और दोनों बार सफल रहीं। यह उस बड़े ट्रेंड की भी मिसाल है जहाँ 2000 के दशक की अभिनेत्रियाँ शिक्षा और कॉरपोरेट पहचान की ओर लौट रही हैं — एक बदलाव जिसे मुख्यधारा की मनोरंजन कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मयूरी कांगो कौन हैं और वे किस फिल्म से प्रसिद्ध हुईं?
मयूरी कांगो 90 के दशक की हिंदी फिल्म अभिनेत्री हैं, जो 1996 की रोमांटिक फिल्म 'पापा कहते हैं' और उसके सुपरहिट गीत 'घर से निकलते ही' से नेशनल क्रश बनीं। इससे पहले उन्होंने 1995 में सईद अख्तर मिर्जा की फिल्म 'नसीम' से अभिनय की शुरुआत की थी।
क्या मयूरी कांगो ने सच में IIT की परीक्षा पास की थी?
हाँ, मयूरी कांगो ने महज 15 साल की उम्र में आईआईटी कानपुर की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की थी। हालांकि, एक शूट के दौरान फिल्म निर्माता सईद अख्तर मिर्जा ने उन्हें खोजा और उन्होंने अभिनय को चुना।
मयूरी कांगो ने बॉलीवुड क्यों छोड़ा?
28 दिसंबर 2003 को एनआरआई व्यवसायी आदित्य ढिल्लों से विवाह के बाद मयूरी अमेरिका चली गईं। वहाँ उन्होंने सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू यॉर्क से MBA किया और डिजिटल मार्केटिंग व विज्ञापन क्षेत्र में नया करियर बनाया।
मयूरी कांगो अभी क्या करती हैं?
वर्तमान में मयूरी कांगो CEO की भूमिका में भारत और वैश्विक स्तर पर मीडिया, टेक और AI समाधानों का नेतृत्व कर रही हैं। इससे पहले वे 2019 में गूगल इंडिया में इंडस्ट्री हेड — एजेंसी पार्टनरशिप रह चुकी हैं।
मयूरी कांगो के करियर की प्रमुख फिल्में कौन-सी हैं?
'नसीम' (1995), 'पापा कहते हैं' (1996), 'बेताबी' (1997), 'होगी प्यार की जीत' (1999) और 'बादल' (2000) उनकी प्रमुख फिल्में हैं। लगभग 16 फिल्मों में काम किया, जिनमें से आधी रिलीज़ नहीं हो सकीं।
राष्ट्र प्रेस
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