नागेश कुकूनूर ने इंजीनियरिंग छोड़ी, सिनेमा में बनाया अनोखा करियर

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नागेश कुकूनूर ने इंजीनियरिंग छोड़ी, सिनेमा में बनाया अनोखा करियर

सारांश

नागेश कुकूनूर ने एक सफल इंजीनियरिंग करियर को छोड़कर सिनेमा में एक नई पहचान बनाई। उनकी फिल्में समाज को विचार करने पर मजबूर करती हैं, जो उन्हें हिंदी सिनेमा के प्रमुख फिल्मकारों में स्थान देती हैं।

Key Takeaways

  • सपने का पीछा करना कभी नहीं छोड़ें।
  • शौक को जुनून में बदलें।
  • समाज के मुद्दों पर फिल्में बनाना महत्वपूर्ण है।
  • कड़ी मेहनत और लगन से सफलता प्राप्त की जा सकती है।
  • अभिनय और निर्देशन में प्रशिक्षण लेना आवश्यक है।

मुंबई, 29 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सपने जब जुनून में बदलते हैं, तो उन्हें पूरा करना संभव हो जाता है। ऐसे ही एक व्यक्ति हैं नागेश कुकूनूर, जिन्होंने एक सफल इंजीनियरिंग करियर को छोड़कर सिनेमा में अपनी पहचान बनाई। आज, वह हिंदी सिनेमा के प्रमुख फिल्मकारों में गिने जाते हैं, जिनकी फिल्में न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि समाज को सोचने पर भी मजबूर करती हैं।

नागेश कुकूनूर का जन्म 30 मार्च 1967 को हैदराबाद में हुआ था। उन्हें बचपन से ही फिल्में देखने का शौक था। वह अपने घर के पास स्थित सिनेमाघरों में जाकर तेलुगु और हिंदी फिल्में देखा करते थे। पढ़ाई में अव्‍वल होने के कारण उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय से केमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद, वह अमेरिका चले गए, जहाँ उन्होंने जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की।

पढ़ाई पूरी करने के बाद, नागेश ने अमेरिका में एनवायरनमेंटल कंसल्टेंट के रूप में कार्य करना प्रारंभ किया। उनकी नौकरी अच्छी थी और जीवन आराम से चल रहा था, लेकिन उनका सपना सिनेमा में करियर बनाने का था। इसी कारण, उन्होंने नौकरी के साथ-साथ फिल्म वर्कशॉप्स में भाग लेना शुरू किया और अभिनय और निर्देशन सीखा। धीरे-धीरे, यह शौक उनके लिए जुनून बन गया।

इसके बाद, वह भारत लौट आए और अपने इंजीनियरिंग करियर से अर्जित धन को फिल्मों में निवेश किया। 1998 में, उन्होंने अपनी पहली फिल्म 'हैदराबाद ब्लूज' बनाई, जिसमें उन्होंने कहानी लिखी, निर्देशन किया और अभिनय भी किया। कम बजट में बनी यह फिल्म बड़ी हिट साबित हुई और उन्हें इंडस्ट्री में अलग पहचान दिलाई।

इसके बाद, नागेश ने कई अनूठी फिल्में बनाई। 2003 में आई 'तीन दीवारें' को प्रशंसा मिली, और इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ कहानी का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। लेकिन असली सफलता उन्हें 2005 में आई 'इकबाल' से मिली, जो एक मूक-बधिर लड़के की कहानी है, जो क्रिकेटर बनने का सपना देखता है। इस फिल्म ने दर्शकों का दिल जीत लिया।

नागेश ने 'डोर', 'आशाएं', 'लक्ष्मी' और 'धनक' जैसी कई बेहतरीन फिल्में बनाई। उनकी फिल्मों की विशेषता यह है कि वे हमेशा समाज के अलग-अलग मुद्दों को सरल और भावनात्मक तरीके से प्रस्तुत करती हैं। 'लक्ष्मी' ने समाज के कड़वे सच को उजागर किया, जबकि 'धनक' ने बच्चों के सपनों और उम्मीदों को खूबसूरती से दिखाया।

नागेश कुकूनूर को उनके योगदान के लिए कई पुरस्कार भी मिले हैं। 'इकबाल' के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला, वहीं 'धनक' को सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। इसके अलावा, 'लक्ष्मी' को अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में सम्मानित किया गया।

नागेश कुकूनूर आज भी सिनेमा उद्योग में सक्रिय हैं और फिल्मों व वेब सीरीज के माध्यम से समाज को संदेश पहुंचा रहे हैं।

Point of View

जो न केवल मनोरंजन करता है बल्कि सोचने पर भी मजबूर करता है।
NationPress
03/04/2026

Frequently Asked Questions

नागेश कुकूनूर का जन्म कब हुआ था?
नागेश कुकूनूर का जन्म 30 मार्च 1967 को हैदराबाद में हुआ था।
नागेश कुकूनूर ने अपना करियर किस क्षेत्र में शुरू किया?
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एनवायरनमेंटल इंजीनियर के रूप में की थी।
कौन सी फिल्म ने नागेश को वास्तविक सफलता दिलाई?
फिल्म 'इकबाल' ने नागेश कुकूनूर को वास्तविक सफलता दिलाई।
नागेश कुकूनूर ने कितनी पुरस्कार जीते हैं?
उन्हें कई पुरस्कार मिले हैं, जिनमें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर अवॉर्ड शामिल हैं।
आजकल नागेश कुकूनूर क्या कर रहे हैं?
नागेश कुकूनूर आज भी फिल्में और वेब सीरीज बना रहे हैं।
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