12 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महबूब खान पुण्यतिथि: जिनकी स्क्रिप्ट पर हँसते थे निर्माता, उन्होंने दी भारत को 'मदर इंडिया'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महबूब खान पुण्यतिथि: जिनकी स्क्रिप्ट पर हँसते थे निर्माता, उन्होंने दी भारत को 'मदर इंडिया'

सारांश

स्क्रिप्ट पर हँसने वाले निर्माताओं से लेकर ऑस्कर नामांकन तक — महबूब खान की कहानी सिर्फ एक फिल्मकार की नहीं, बल्कि उस जिद की है जो गुजरात के एक छोटे गाँव से उठकर भारतीय सिनेमा को 'मदर इंडिया' दे गई। आज उनकी पुण्यतिथि पर वह विरासत और भी प्रासंगिक लगती है।

मुख्य बातें

महबूब खान का जन्म 9 सितंबर 1906 को गुजरात के सरार गाँव में हुआ था।
शुरुआती दौर में निर्माता उनकी स्क्रिप्ट पर हँसते और दरवाज़ा बंद कर देते थे; कई रातें मुंबई के रेलवे प्लेटफॉर्म पर गुजरीं।
पहली निर्देशित फिल्म 'अल हिलाल' 1935 में रिलीज हुई और सफल रही।
1957 में रिलीज 'मदर इंडिया' को ऑस्कर के लिए नामांकित किया गया; यह उनकी पुरानी फिल्म 'औरत' का पुनर्निर्माण थी।
उन्होंने मुंबई को 'महबूब स्टूडियो' जैसी आधुनिक सुविधा दी, जो उस दौर में हॉलीवुड स्तर की मानी जाती थी।
28 मई 1964 को 56 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ।

भारतीय सिनेमा के इतिहास में महबूब खान उन विरले फिल्मकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने गरीबी, बेरोजगारी और बार-बार ठुकराए जाने के बावजूद अपना रास्ता खुद बनाया। 28 मई 1964 को 56 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ था — आज उनकी पुण्यतिथि पर उनके संघर्ष और उपलब्धियों को याद करना उतना ही प्रासंगिक है जितना तब था। उनकी फिल्म 'मदर इंडिया' आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे प्रभावशाली कृतियों में शुमार की जाती है।

गुजरात के एक छोटे गाँव से मुंबई तक का संघर्ष

महबूब खान का जन्म 9 सितंबर 1906 को गुजरात के बड़ौदा के निकट सरार गाँव में एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनके भीतर सिनेमा को लेकर एक गहरा जुनून था — वे अक्सर चुपचाप ट्रेन पकड़कर आसपास के शहरों में फिल्में देखने निकल जाते और फिर घर लौट आते। परिवार को इस जुनून की भनक देर से लगी।

जब उन्होंने मुंबई जाकर हीरो बनने का फैसला किया, तो पिता ने न केवल उन्हें वापस घर खींच लाया, बल्कि उस दिन पिटाई भी हुई। बेटे को 'सुधारने' के इरादे से जबरन विवाह भी करा दिया गया। महबूब खान एक बेटे के पिता भी बन गए, लेकिन सिनेमा के प्रति उनका लगाव समय के साथ और गहराता गया। आखिरकार वे दोबारा मुंबई पहुँचे और स्टूडियो के बाहर काम की तलाश में खड़े रहने लगे।

रेलवे प्लेटफॉर्म की रातें और ज्योति स्टूडियोज का दरवाज़ा

मुंबई में शुरुआती दिन बेहद कठिन थे। वीटी स्टेशन के पास ज्योति स्टूडियोज के बाहर वे घंटों इंतजार करते। कई रातें रेलवे प्लेटफॉर्म पर गुजरीं, फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। फिल्म निर्माता अर्देशिर ईरानी से मुलाकात ने उनके करियर को एक छोटी-सी शुरुआत दी — उन्हें एक्स्ट्रा कलाकार के रूप में काम मिला। एक फिल्म से निकाले जाने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी।

धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि उनकी असली ताकत पर्दे के सामने नहीं, बल्कि कहानी गढ़ने और निर्देशन में है। इसके बाद उन्होंने स्क्रिप्ट लिखनी शुरू कीं और अलग-अलग निर्माताओं के पास जाने लगे। उस दौर में कई निर्माता उनकी स्क्रिप्ट सुनकर मज़ाक उड़ाते थे और मुँह पर दरवाज़ा बंद कर देते थे।

पहली फिल्म से 'मदर इंडिया' तक का सफर

लगातार कोशिशों के बाद 1935 में उनकी पहली निर्देशित फिल्म 'अल हिलाल' रिलीज हुई और उसे अच्छी प्रतिक्रिया मिली। यहीं से उनके सफल सफर की नींव पड़ी। इसके बाद उन्होंने 'एक ही रास्ता', 'औरत', 'रोटी', 'अनमोल घड़ी', 'अंदाज' और 'आन' जैसी कई यादगार फिल्में बनाईं। उनकी फिल्मों में सामाजिक मुद्दों और मज़बूत महिला किरदारों को विशेष स्थान मिलता था, यही कारण है कि उन्हें भारतीय सिनेमा का प्रगतिशील और स्त्रीवादी फिल्मकार माना जाता है।

1957 में रिलीज हुई 'मदर इंडिया' उनके करियर की सर्वोच्च उपलब्धि बनी। नरगिस, सुनील दत्त, राजेंद्र कुमार और राजकुमार अभिनीत यह फिल्म एक माँ के संघर्ष, त्याग और आत्मसम्मान की मार्मिक गाथा थी। गौरतलब है कि यह उन्हीं की पुरानी फिल्म 'औरत' (1940) का पुनर्निर्मित रूप थी।

ऑस्कर नामांकन और वैश्विक पहचान

'मदर इंडिया' को ऑस्कर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया — भारतीय सिनेमा के लिए उस दौर में यह एक असाधारण उपलब्धि थी। फिल्म पुरस्कार जीत नहीं सकी, लेकिन इसने दुनियाभर में भारतीय सिनेमा को एक नई पहचान दिलाई। आज भी इसे भारतीय फिल्म इतिहास की सबसे प्रभावशाली फिल्मों में गिना जाता है।

महबूब खान ने केवल फिल्में ही नहीं बनाईं, बल्कि मुंबई फिल्म उद्योग को 'महबूब स्टूडियो' जैसी आधुनिक सुविधा भी दी, जिसे उस दौर में हॉलीवुड स्तर का माना जाता था। 28 मई 1964 को उनके निधन के छह दशक बाद भी उनकी विरासत भारतीय सिनेमा की आत्मा में ज़िंदा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ गैर-परंपरागत आवाज़ों को व्यवस्थागत रूप से हाशिए पर रखा जाता था। 'मदर इंडिया' का ऑस्कर नामांकन उस समय भारतीय सिनेमा के लिए एक असाधारण वैश्विक स्वीकृति थी, फिर भी मुख्यधारा की चर्चा अक्सर फिल्म को उसके निर्माता से अलग करके देखती है। आज जब भारतीय सिनेमा वैश्विक मंचों पर अपनी जगह बना रहा है, तो महबूब खान जैसे अग्रदूतों की विरासत को संस्थागत स्मृति में उचित स्थान मिलना चाहिए — महज़ पुण्यतिथि की याद से परे।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महबूब खान कौन थे और उन्हें क्यों याद किया जाता है?
महबूब खान भारतीय सिनेमा के अग्रणी फिल्मकार थे, जिन्हें 1957 की क्लासिक फिल्म 'मदर इंडिया' के निर्देशन के लिए सबसे अधिक जाना जाता है। उन्हें भारतीय सिनेमा का प्रगतिशील और स्त्रीवादी फिल्मकार माना जाता है क्योंकि उनकी फिल्मों में मज़बूत महिला किरदार और सामाजिक मुद्दे केंद्र में रहते थे।
'मदर इंडिया' को ऑस्कर में क्यों नामांकित किया गया था?
1957 में रिलीज 'मदर इंडिया' को अकादमी पुरस्कार (ऑस्कर) के लिए नामांकित किया गया था, जो उस दौर में भारतीय सिनेमा के लिए एक दुर्लभ अंतरराष्ट्रीय पहचान थी। फिल्म पुरस्कार नहीं जीत सकी, लेकिन इसने दुनियाभर में भारतीय सिनेमा की साख स्थापित की।
महबूब खान की पहली निर्देशित फिल्म कौन-सी थी?
महबूब खान की पहली निर्देशित फिल्म 'अल हिलाल' थी, जो 1935 में रिलीज हुई थी। इससे पहले उन्होंने बतौर एक्स्ट्रा कलाकार काम किया था और कई निर्माताओं ने उनकी स्क्रिप्ट को खारिज किया था।
'मदर इंडिया' और 'औरत' में क्या संबंध है?
'मदर इंडिया' (1957) दरअसल महबूब खान की ही पुरानी फिल्म 'औरत' (1940) का पुनर्निर्मित रूप थी। दोनों फिल्मों में एक माँ के संघर्ष, त्याग और आत्मसम्मान की कहानी को केंद्र में रखा गया था।
महबूब खान का निधन कब हुआ और उनकी विरासत क्या है?
महबूब खान का निधन 28 मई 1964 को 56 वर्ष की आयु में हुआ। उनकी विरासत में 'मदर इंडिया' जैसी कालजयी फिल्में और मुंबई में स्थापित 'महबूब स्टूडियो' शामिल हैं, जो अपने समय में हॉलीवुड स्तर की सुविधाओं वाला आधुनिक स्टूडियो माना जाता था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले